
LPG vs Induction: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत में भी इसका असर रसोई गैस (LPG) की किल्लत और सिलेंडर के लिए लगती लंबी कतारों के रूप में दिख रहा है। हर आम आदमी को डर है कि अगर सिलेंडर खत्म हो गया और एजेंसी से रिफिल नहीं मिला, तो खाना कैसे बनेगा?
स्थिति यह है कि कई शहरों में होटल और ढाबों पर भी भीड़ बढ़ गई है, जबकि कुछ छोटे होटल गैस की कमी के कारण अस्थायी तौर पर बंद होने लगे हैं। ऐसे में अब लोगों को अपनी रसोई के लिए एक भरोसेमंद प्लान-बी तैयार रखने की जरूरत महसूस हो रही है। यहीं पर इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हा एक बड़े विकल्प के रूप में सामने आ रहा है। आइए समझते हैं कि गैस के मुकाबले इंडक्शन पर खाना बनाना आपकी जेब पर कितना असर डालता है और बाजार में कौन-कौन से इंडक्शन कुकटॉप बेहतर विकल्प माने जा रहे हैं।
आमतौर पर एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग ₹900 से ₹950 के आसपास होती है। एक मध्यम वर्गीय परिवार में, जहां रोजाना तीनों समय का खाना बनता है, वहां एक सिलेंडर लगभग एक महीना (30 दिन) चलता है। यानी, गैस पर खाना बनाने का आपका रोज का खर्च लगभग ₹30 से ₹32 बैठता है।
अब बात करते हैं इंडक्शन की। एक स्टैंडर्ड इंडक्शन चूल्हा 1000-2000 वॉट की बिजली पर चलता है। अगर एक परिवार रोज खाना बनाने में लगभग 4 यूनिट बिजली खर्च करता है और आपके इलाके में बिजली का रेट करीब ₹8 प्रति यूनिट है, तो महीने का कुल खर्च लगभग ₹960 बैठता है।
कुल मिलाकर देखें तो गैस और इंडक्शन दोनों का खर्च कई मामलों में लगभग बराबर ही रहता है। हालांकि, इंडक्शन का एक बड़ा वैज्ञानिक फायदा यह है कि इसकी ऊर्जा (Heat) सीधे बर्तन को गर्म करती है, जिससे खाना जल्दी बनता है और ऊर्जा बर्बाद नहीं होती। वहीं गैस चूल्हे पर खाना बनाते समय आंच का कुछ हिस्सा हवा में भी निकल जाता है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी होती है। ध्यान रहे कि इंडक्शन के लिए आपको फ्लैट बेस यानी चपटे तले वाले बर्तनों की ही जरूरत होती है।
हाल की खबरों के मुताबिक गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ने के बाद लोग वैकल्पिक कुकिंग उपकरणों की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडक्शन स्टोव की बिक्री में अचानक तेज उछाल देखा गया है और कई शहरों में लोग इसे बैकअप कुकिंग ऑप्शन के रूप में खरीद रहे हैं।
लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमी है बिजली पर पूरी निर्भरता।
अगर आप क्वालिटी और भरोसे की बात करें, तो भारतीय बाजार में Prestige, Philips, और Pigeon के इंडक्शन सबसे ज्यादा बिकते हैं। इनमें ऑटो-कट, टाइमर और अलग-अलग डिश (जैसे- इडली, करी, डोसा) के लिए प्री-सेट मेन्यू होते हैं, जो बिजली की बचत करते हैं।
इसके अलावा Bajaj, Havells aur Butterfly ब्रांड्स भी काफी पॉपुलर हैं। इन ब्रांड्स के इंडक्शन कुकटॉप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह आसानी से मिल जाते हैं।
यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो पहली बार इंडक्शन इस्तेमाल करना चाहते हैं या इसे बैकअप के तौर पर रखना चाहते हैं।
| मॉडल | अनुमानित कीमत |
|---|---|
| Pigeon Cruise | ₹1,650 के आसपास |
| Lifelong Inferno (2000W) | ₹1,599 के आसपास |
| Greenchef Spectra | ₹1,700 – ₹1,900 |
| iBELL Castor | ₹1,850 – ₹2,100 |
| Usha Cook Joy | ₹2,200 – ₹2,400 |
यह रेंज सबसे ज्यादा बिकती है क्योंकि इसमें मजबूती और फीचर्स का अच्छा तालमेल होता है।
| मॉडल | अनुमानित कीमत |
|---|---|
| Prestige PIC 20.0 | ₹3,100 – ₹3,400 |
| Philips Viva Collection HD4928 | ₹3,500 – ₹3,800 |
| Bajaj Majesty ICX Neo | ₹3,200 – ₹3,500 |
| Havells Insta Cook ET-X | ₹3,700 – ₹4,000 |
| V-Guard VIC 15 | ₹2,800 – ₹3,100 |
अगर आप गैस का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना चाहते हैं और स्टाइलिश, हाई-टेक किचन चाहते हैं।
| मॉडल | अनुमानित कीमत |
|---|---|
| Philips HD4938 (Sensor Touch) | ₹5,800 – ₹6,200 |
| Prestige PIC 3.1 V3 | ₹5,000 – ₹5,400 |
| V-Guard VIC 25 | ₹4,900 – ₹5,200 |
| Samsung Slim Design Induction | ₹6,500 – ₹7,500 |
| Faber 2000W Premium | ₹6,000 – ₹7,000 |
नोट: कीमतें विभिन्न शहरों और ऑनलाइन सेल के दौरान बदल सकती हैं। ऊपर दी गई लिस्ट वर्तमान बाजार रुझान और बेस्ट सेलिंग डेटा के औसत पर आधारित है।
अगर गैस नहीं है और इंडक्शन भी नहीं है, तो कुछ और इलेक्ट्रिक उपकरण मदद कर सकते हैं जैसे राइस कुकर, इलेक्ट्रिक केटल, माइक्रोवेव, एयर फ्रायर, इलेक्ट्रिक तवा। इनसे बेसिक खाना बनाना संभव है।
गैस संकट के इस समय में इंडक्शन न केवल आपकी रसोई को चालू रखेगा, बल्कि लंबे समय में यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। ऊर्जा मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रिक कुकिंग गैस के मुकाबले अधिक एनर्जी एफिशियंट है। कीमतों का यह अनुमान प्रमुख ई-कॉमर्स साइट्स और कंज्यूमर रिपोर्ट्स इंडिया के ताजा बाजार सर्वे के आधार पर दिया गया है।
सिलेंडर की कमी की खबर फैलते ही बिहार से लेकर पंजाब तक हड़कंप मच गया है। पटना, भागलपुर और रोहतास जैसे शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें दिख रही हैं। लोग परेशान हैं क्योंकि कहीं सर्वर डाउन है तो कहीं मोबाइल पर OTP नहीं आ रहा। हालात संभालने के लिए पटना में तो कंट्रोल रूम तक बनाना पड़ा है। दूसरी ओर, जालंधर, नागालैंड और हरिद्वार के प्रशासन का कहना है कि स्टॉक की कोई कमी नहीं है। समस्या गैस की नहीं, बल्कि ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम में आई तकनीकी खराबी की है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे पैनिक न हों और बेमतलब में सिलेंडरों की जमाखोरी न करें।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि भारत के पास कच्चा तेल और रिफाइनिंग की पूरी क्षमता है। सरकार के मुताबिक, देश पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के मामले में आत्मनिर्भर है। मंत्रालय ने माना कि कुछ शहरों में कमर्शियल सप्लाई में दिक्कत हो सकती है, लेकिन घरेलू सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह नॉर्मल है। सरकार ने लोगों को सलाह दी है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।
आज के समय में सिर्फ गैस सिलेंडर पर निर्भर रहना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है। गैस की कमी, सप्लाई की समस्या या अचानक खत्म हो जाने की स्थिति में इंडक्शन जैसे विकल्प काफी मददगार साबित हो सकते हैं। अगर घर में एक छोटा इंडक्शन चूल्हा बैकअप के तौर पर रखा जाए तो कई बार बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।
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