EPF Transfer: नई नौकरी मिलते ही ज्यादातर लोग ऑफर लेटर, सैलरी और नई जिम्मेदारियों में उलझ जाते हैं। इसी जल्दबाजी में कई लोग पुराने नियोक्ता (एम्प्लॉयर) से एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) ट्रांसफर करवाना भूल जाते हैं। सुनने में यह सिर्फ कागजी औपचारिकता लगती है, लेकिन अगर EPF पुराने अकाउंट में ही पड़ा रह गया, तो आगे चलकर आपकी रिटायरमेंट सेविंग पर सीधा असर पड़ सकता है।
EPF अकाउंट ट्रांसफर नहीं करवाने के नुकसान
अगर किसी EPF अकाउंट में 36 महीने तक कोई नया योगदान नहीं होता, तो वह इनएक्टिव माना जा सकता है। भले ही एम्प्लॉयीज प्रोविडेंट फंड आर्गेनाईजेशन (EPFO) कुछ समय तक ब्याज जोड़ता रहे, लेकिन टैक्स के नियम उतने फायदेमंद नहीं रहते। ऐसे इनएक्टिव बैलेंस पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल इनकम माना जा सकता है, जिससे आपकी सेविंग धीरे-धीरे कम हो जाती है।
कम्पाउंडिंग के फायदे से चूक न जाएं
EPF की सबसे बड़ी ताकत है लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग। जब सारा पैसा एक ही एक्टिव अकाउंट में रहता है, तो हर साल पूरे बैलेंस पर ब्याज जुड़ता है। लेकिन अगर आपका पैसा अलग-अलग EPF अकाउंट्स में बंटा पड़ा है, तो कंपाउंडिंग का असर कमजोर पड़ जाता है। इसका नतीजा ये होता है कि रिटायरमेंट पर मिलने वाला फंड काफी छोटा हो सकता है।
समय से पहले पैसा निकालने से घाटा
जब पुराने EPF अकाउंट अलग-अलग पड़े होते हैं, तो कई बार लोग जरूरत पड़ने पर उन्हें निकाल लेते हैं। लेकिन अगर कुल सेवा अवधि पांच साल पूरी नहीं हुई है, तो ऐसा निकासी टैक्सेबल हो जाती है। EPF ट्रांसफर करने से आपकी सर्विस कंटिन्यू रहती है और पांच साल पूरे होने के बाद टैक्स-फ्री विदड्रॉल का फायदा मिल सकता है।
पेंशन रिकार्ड्स भी होते हैं प्रभावित
EPF ट्रांसफर सिर्फ बचत के लिए नहीं, बल्कि पेंशन के लिए भी अहम है। एम्प्लॉयीज पेंशन स्कीम (EPS) के तहत रिटायरमेंट के बाद पेंशन पाने के लिए कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा जरूरी होती है। अगर हर नौकरी का रिकॉर्ड अलग-अलग रह गया और ट्रांसफर नहीं किया, तो सर्विस हिस्ट्री अधूरी रह सकती है। इससे पेंशन कैलकुलेशन में दिक्कतें आ सकती हैं।
देरी नहीं, अभी करें EPF ट्रांसफर
अगर आपने जॉब बदल ली है और आपका EPF अब भी पुराने अकाउंट में पड़ा है, तो इसे जल्द से जल्द नए नियोक्ता के अकाउंट में ट्रांसफर करना समझदारी है। इससे टैक्स फायदे बने रहते हैं, कंपाउंडिंग मजबूत होती है और पेंशन से जुड़ी परेशानियों से भी बचाव होता है। इसे नजरअंदाज करना आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग को कमजोर कर सकता है। सही समय पर ट्रांसफर करके आप अपने पैसों को सुरक्षित, टैक्स-एफिशिएंट और भविष्य के लिए मजबूत बना सकते हैं।