LTCG: क्या है LTCG टैक्स? हर साल बजट से पहले क्यों उठती है इसे हटाने की मांग

Long term capital gain tax: लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स शेयर बाजार में लंबे समय से बहस का मुद्दा है। निवेशकों का कहना है कि यह टैक्स कंपाउंडिंग और लॉन्ग टर्म निवेश को नुकसान पहुंचाता है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इसे 10% पर वापस लाया जाए ताकि भारत निवेश के लिए और आकर्षक बने।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम लाइवमिंट.कॉम)
पब्लिश्ड24 Jan 2026, 09:02 PM IST
हर बजट में क्यों उठती है LTCG हटाने की मांग? निवेशकों की सबसे बड़ी शिकायत समझिए (सांकेतिक तस्वीर)
हर बजट में क्यों उठती है LTCG हटाने की मांग? निवेशकों की सबसे बड़ी शिकायत समझिए (सांकेतिक तस्वीर)

Long Term Capital Gain Tax: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए बजट सिर्फ सरकार का हिसाब नहीं, बल्कि उनके रिटर्न और भविष्य की प्लानिंग से जुड़ा होता है। इसलिए हर बजट से पहले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स का मुद्दा फिर चर्चा में आ जाता है। निवेशकों का मानना है कि यह टैक्स लंबे निवेश और कंपाउंडिंग की ताकत को कमजोर करता है, जबकि सरकार इसे जरूरी बताती है।

क्या है ये LTCG?

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी किसी एसेट को एक तय समय से ज्यादा रखने के बाद बेचने पर होने वाला मुनाफा। भारत में अगर आप लिस्टेड शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड को 12 महीने से ज्यादा समय तक होल्ड करने के बाद बेचते हैं, तो उस पर हुआ मुनाफा LTCG माना जाता है।

फिलहाल नियम यह है कि 1 लाख से ज्यादा के मुनाफे पर 10% टैक्स देना होता है, वो भी बिना इंडेक्सेशन के। 2018 के बजट में इसे दोबारा लागू किया गया था, इससे पहले लंबे समय तक ऐसे मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं था। सरकार का तर्क था कि टैक्स छूट से राजस्व का नुकसान हो रहा है और एसेट क्लास में असंतुलन पैदा हो रहा था।

निवेशकों को क्यों खटकता है ये टैक्स

निवेशकों का कहना है कि LTCG टैक्स लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट को हतोत्साहित करता है। रिटायरमेंट प्लानिंग या लंबे समय की वेल्थ क्रिएशन करने वालों के लिए यह टैक्स कंपाउंडिंग की ताकत को कमजोर कर देता है।

सबसे बड़ी शिकायत यह है कि इसमें इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता, यानी महंगाई से बढ़ी वैल्यू पर भी टैक्स देना पड़ता है। ऊपर से कंपनियां पहले ही कॉरपोरेट टैक्स देती हैं और डिविडेंड पर भी टैक्स लगता है, ऐसे में निवेशकों को यह डबल या ट्रिपल टैक्सेशन जैसा लगता है।

टैक्स से बदल जाता है निवेशकों का बर्ताव

मार्केट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि LTCG की वजह से निवेशक अच्छा स्टॉक बेचने से कतराते हैं, ताकि टैक्स न देना पड़े। इससे लिक्विडिटी घटती है और सही प्राइस डिस्कवरी पर असर पड़ता है। कई बार लोग पोर्टफोलियो रीबैलेंस भी नहीं करते, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।

एक्सपर्ट्स की राय

रेलिगेयर ब्रोकिंग के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट राजीव गुप्ता का कहना है कि भारत अब सेविंग-बेस्ड इकॉनमी से इन्वेस्टर-बेस्ड इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है। उनका कहना है कि भारत में जिनकी आय 2 करोड़ से ज्यादा है, वे लगभग 39-43% टैक्स देते हैं, जिससे टैलेंट और पूंजी देश से बाहर जा रही है। दुबई जैसे टैक्स-फ्री देशों की ओर शिफ्ट होने का ट्रेंड बढ़ रहा है।

गुप्ता ने कहा कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को 10% पर वापस लाना चाहिए, क्योंकि 12.5% टैक्स से निवेशकों को अनावश्यक रुकावट का सामना करना पड़ रहा है। उनका मानना है कि अगर भारत को विकसित भारत 2047 का सपना पूरा करना है, तो लॉन्ग टर्म निवेश को आसान और टैक्स-फ्रेंडली बनाना होगा।

बजट 2026 से क्या उम्मीद?

अब नजरें यूनियन बजट 2026 पर टिकी हैं। बजट के बाद ही साफ होगा कि क्या सरकार LTCG टैक्स हटाकर या कम करके लंबे निवेश को बढ़ावा देगी, या फिर यह बहस एक बार फिर अगले बजट तक टल जाएगी? निवेशकों के लिए यह सिर्फ टैक्स का मुद्दा नहीं, बल्कि भविष्य की वेल्थ प्लानिंग से जुड़ा सवाल है।

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