
US-Iran War: मध्य-पूर्व में जंग का धुआं अब दुनिया की सबसे अहम तेल-गली यानी होर्मुज स्ट्रेट तक पहुंच गया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान पर समन्वित हवाई हमले किए, जिनमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को धमकी दी कि 'कोई भी जहाज यहां से नहीं गुजरेगा।' अब तक कम-से-कम पांच तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, दो नाविकों की जान जा चुकी है और करीब 150 जहाज स्ट्रेट के आसपास फंसे हुए हैं।
इस संकट के बीच भारत सरकार ने मंगलवार को कहा कि देश के पास 25 दिनों का क्रूड ऑयल और 25 दिनों का पेट्रोल-डीजल का स्टॉक है। कुल मिलाकर, 8 हफ्ते का क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का भंडार मौजूद है। LPG और LNG के मामले में भी भारत अभी अच्छी स्थिति में बताया जा रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया को मौजूदा हालात में देश की तैयारियों के बारे में जानकारी दी।
भारत का सिर्फ 40% क्रूड होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। बाकी 60% दूसरे रास्तों और स्रोतों से आता है, जिसमें रूस का हिस्सा बड़ा है। भारत पिछले अनुबंधों के तहत रूस से क्रूड इम्पोर्ट जारी रखे हुए है, जो इस संकट में एक अहम सुरक्षा कवच बन गया है। एक तरफ सरकारी आंकड़े हैं, दूसरी तरफ जमीनी तस्वीर, जो ज्यादा जटिल है।
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) के फेलो हेमंत मल्या कहते हैं, 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी भारत के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पाद के आधे से अधिक आयात को प्रभावित करती है। अल्पकालिक उपाय के रूप में दोबारा रूसी कच्चे तेल की ओर रुख किया जा सकता है। हालांकि, वैश्विक संघर्षों को हमारी आर्थिक वृद्धि को धीमा करने से रोकने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाने की जरूरत है।'
जेएम फाइनैंशियल इंस्टिट्यूशनल सिक्यॉरिटीज में एनालिस्ट दयानंद मित्तल का विश्लेषण कहता है कि फरवरी 2026 में ही ब्रेंट क्रूड 10% से ज्यादा उछलकर 73 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा, 'होर्मुज स्ट्रेट के लंबे समय तक बंद रहने पर क्रूड आसानी से 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है, हालांकि ऐतिहासिक मिसालों के आधार पर यह कम-संभावित घटना है। प्रति बैरल की कीमत में 1 डॉलर की बढ़ोतरी से ओएनजीसी और ऑइल इंडिया की ईपीएस में 1.5 से 2% का इजाफा होगा, लेकिन ऑइल मार्केटिंग कंपनियों की ऑटो-फ्यूल मार्जिन पर 55 पैसे प्रति लीटर की चोट पड़ेगी।'
एक्सिस सिक्यॉरिटीज की वीकली कमोडिटी रिपोर्ट के मुताबिक, NYMEX क्रूड लगातार दूसरे हफ्ते भी बढ़त पर रहा और सात महीने के उच्च स्तर को छू गया। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर जल्द सीजफायर न हुआ तो कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी.के. विजयकुमार निवेशकों को घबराहट में बेचने से बचने की सलाह देते हैं। वे कहते हैं, 'बाजार के नजरिए से सबसे बड़ा जोखिम एनर्जी रिस्क है- क्रूड में तेज उछाल। ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर के आसपास रहा तो इक्विटी मार्केट कमजोर जरूर रह सकता है, लेकिन बड़ी गिरावट की आशंका कम है। अनुभव बताता है कि संकट के वक्त घबराहट में बेचना गलत रणनीति है।'
डॉ. विजयकुमार आगे कहते हैं कि कोविड क्राइसिस, रूस-यूक्रेन युद्ध और गाजा संघर्ष- इन तीनों संकटों के बाद मार्केट छह महीने में पुरानी स्थिति में लौट आया। उनकी सलाह है कि बाजार की कमजोरी का इस्तेमाल बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, कैपिटल गुड्स और डिफेंस जैसे घरेलू खपत वाले क्षेत्रों में धीरे-धीरे क्वॉलिटी स्टॉक जमा करने के लिए करें।
तकनीकी रूप से होर्मुज स्ट्रेट अभी पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन कमोडिटी ट्रैकर Kpler के मुताबिक, बड़ी कमर्शियल शिपिंग कंपनियां, तेल कंपनियां और बीमा प्रदाता व्यावहारिक रूप से इस गलियारे से हट चुके हैं, केवल ईरानी और चीनी झंडे वाले जहाज सीमित आवाजाही कर रहे हैं। Kpler Maersk, Hapag-Lloyd और CMA CGM जैसी दिग्गज शिपिंग कंपनियों ने होर्मुज स्ट्रेट से होकर जाने वाले अपने जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते डायवर्ट कर दिया है। CNBC इससे ट्रांजिट समय हफ्तों बढ़ जाएगा और लागत में भारी इजाफा होगा।
एनर्जी आस्पेक्ट्स की फाउंडर अमृता सेन का कहना है कि भले ही ईरान स्ट्रेट को पूरी तरह बंद न करे, टैंकरों पर एकाध हमले भी बाजार को बेहद सतर्क रखने के लिए काफी हैं। वहीं, इंटरनैशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर अली वाएज ने अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल अल जजीरा को बताया कि होर्मुज की बंदी रातोंरात वैश्विक कारोबारी तेल का पांचवां हिस्सा रोक देगी और कीमतें सिर्फ उछलेंगी नहीं, बल्कि अकेले डर की वजह से एकदम से गैप ऊपर खुलेंगी।
CEEW के हेमंत मल्या के अनुसार, भारत को तुरंत और लंबे समय, दोनों के लिए सोचना होगा। उनके सुझाव हैं...
इजरायल के ईरान पर शुरू हुए हमले के अगले दिन 1 मार्च को तेल उत्पादक देशों की संगठन OPEC+ बैठक हुई। इसमें अप्रैल के लिए 2.06 लाख बैरल प्रति दिन अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने का ऐलान किया गया। साथ ही मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि सऊदी अरब और यूएई ने संभावित बाधाओं से पहले ही अपना निर्यात बढ़ा लिया था। जेएम फाइनैंशियल के दयानंद मित्तल के अनुसार, ईरान का 15-20 लाख बैरल प्रतिदिन का निर्यात रुकने की स्थिति को भी अच्छी तरह से आपूर्ति वाला वैश्विक बाजार झेल सकता है, क्योंकि वर्ष 2026 में करीब 37 लाख बैरल प्रतिदिन की ओवरसप्लाई और सऊदी अरब के पास 10–20 लाख बैरल की स्पेयर कैपेसिटी मौजूद है।
कुल मिलाकर, होर्मुज संकट अभी एक 'लो-प्रोबेबिलिटी, हाई-इम्पैक्ट' परिदृश्य में है। भारत सरकार स्थिति पर करीबी नजर रख रही है और फिलहाल देश का एनर्जी बफर पर्याप्त है। लेकिन विशेषज्ञों की आवाज साफ है- अल्पकालिक राहत काफी नहीं है। रूस पर निर्भरता कम करना, एलएनजी स्टोरेज क्षमता बढ़ाना और ऊर्जा आयात में विविधता लाना- ये वो कदम हैं जो भारत को अगले ऐसे संकट से पहले उठाने होंगे।
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