भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने ग्राहकों की सुरक्षा को और मजबूत करने पर जोर देते हुए छोटे मूल्य की धोखाधड़ी के शिकार लोगों को राहत देने के लिए अहम कदमों की घोषणा की है। केंद्रीय बैंक ने छोटे फ्रॉड मामलों के लिए एक नया मुआवजा ढांचा पेश किया है। आरबीआई के अनुसार, करीब 65 प्रतिशत धोखाधड़ी के मामले 50 हजार रुपये से कम राशि के होते हैं।
आरबीआई ने कहा कि वह छोटे फ्रॉड के लिए मुआवजा देने का एक ढांचा ला रहा है। भले ही इन मामलों में रकम कम होती है, लेकिन संख्या के लिहाज से ये बहुत ज्यादा हैं। ऐसे मामलों में 25 हजार रुपये तक की धोखाधड़ी पर ग्राहक से कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा और वह इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा। सिस्टम में ऐसे नियम होंगे, जिससे गलत इस्तेमाल न हो सके।
आरबीआई ने कहा कि इसमें ग्राहक की 15 प्रतिशत और बैंक की भी 15 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि बाकी रकम आरबीआई की ओर से दी जाएगी। भले ही राशि छोटी हो, लेकिन छोटे ग्राहकों के लिए यह बहुत मायने रखती है। इसका मकसद तुरंत राहत और संतोष देना है।
इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, सुरक्षा उपायों के साथ 25 हजार रुपये तक के नुकसान के लिए ग्राहक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। इस ढांचे में जिम्मेदारी साझा की गई है, जिसमें ग्राहक और बैंक 15 प्रतिशत 15 प्रतिशत का बोझ उठाएंगे और शेष राशि आरबीआई द्वारा मुआवजे के रूप में दी जाएगी। इससे छोटे जमाकर्ताओं को तुरंत राहत मिलेगी।
आरबीआई ने यह भी साफ किया है कि धोखाधड़ी पर मुआवजा किसी ग्राहक को केवल एक बार ही मिलेगा। इसका मतलब है कि यह व्यवस्था बार बार सुरक्षा देने के लिए नहीं है, बल्कि तुरंत राहत देने के लिए है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि ग्राहकों को सतर्क रहना चाहिए, जिम्मेदारी से काम करना चाहिए और अपनी पिछली गलतियों से सीख लेनी चाहिए। बार बार की लापरवाही या गलती पर इस योजना के तहत मुआवजा नहीं दिया जाएगा।