
Travel Insurance: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण कई देशों के हवाई क्षेत्र में अचानक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कई फ्लाइट्स रद्द हो गईं, कुछ के रूट बदल दिए गए और हजारों यात्री अलग-अलग एयरपोर्ट्स पर फंस गए। कई लोग घंटों नहीं बल्कि दिनों से यह सोचते हुए इंतजार कर रहे हैं कि उनकी फ्लाइट कब चलेगी, टिकट का खर्च कितना बढ़ेगा और क्या इस युद्ध जैसी स्थिति में उनका ट्रैवल इंश्योरेंस किसी काम आएगा या नहीं।
हालांकि, इसी बीच दुबई, अबू धाबी और पूरे यूएई में प्रशासन ने फंसे यात्रियों की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं।
ट्रैवल इंश्योरेंस के मामले में सबसे अहम बात यह होती है कि फ्लाइट में बाधा आखिर किस वजह से आई। इंश्योरेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर फ्लाइट में देरी या कैंसिलेशन किसी ऑपरेशनल वजह से हुआ है जैसे एयरस्पेस अचानक बंद होना, रूट बदलना या एयर ट्रैफिक से जुड़ी तकनीकी दिक्कत तो कई पॉलिसियों में इसके लिए क्लेम किया जा सकता है।
प्रोबस इंश्योरेंस की हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस हेड सरिता जोशी के अनुसार, अगर कोई यात्री दुबई, कतर, ईरान या मिडिल ईस्ट के अन्य देशों में अचानक एयरस्पेस बंद होने के कारण फंस जाता है, तो ट्रिप डिले, ट्रिप इंटरप्शन या मिस्ड कनेक्शन जैसी सुविधाओं के तहत क्लेम संभव हो सकता है। लेकिन इसके लिए एक महत्वपूर्ण शर्त होती है- पॉलिसी उस घटना से पहले खरीदी गई हो जब यह स्थिति “नोन सरकमस्टांस” यानी पहले से ज्ञात घटना नहीं बनी थी।
अधिकांश ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसियों में एक 'वॉर एक्सक्लूजन क्लॉज' शामिल होता है। इसका मतलब यह है कि अगर नुकसान सीधे तौर पर युद्ध, सैन्य कार्रवाई, गृह युद्ध या किसी बड़े सशस्त्र संघर्ष की वजह से हुआ है, तो बीमा कंपनी भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं होती।
सीधे शब्दों में कहें तो अगर आपकी यात्रा का नुकसान किसी सक्रिय युद्ध के कारण हुआ है, जैसे मिसाइल हमले, सैन्य कार्रवाई या बड़े पैमाने पर संघर्ष तो होटल में अतिरिक्त ठहरने या नई टिकट बुक करने का खर्च बीमा कवर नहीं कर सकता। हालांकि कुछ मामलों में ऐसी स्थितियां पूरी तरह साफ नहीं होतीं। जैसे अचानक एयरस्पेस बंद होना, एहतियात के तौर पर फ्लाइट का रूट बदलना या घोषित युद्ध से पहले का तनाव। ऐसे मामलों में क्लेम मंजूर होगा या नहीं, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि बीमा कंपनी उस घटना को सीधा परिणाम मानती है या नहीं।
हजारों यात्रियों के फंसने के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने आपातकालीन कदम उठाए हैं। यूएई की जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी (GCAA) ने बताया कि क्षेत्रीय एयरस्पेस में बाधा के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों की उड़ानें प्रभावित हुई हैं। अनुमान के मुताबिक अब तक करीब 20,200 यात्री फ्लाइट रीशेड्यूलिंग से प्रभावित हुए हैं।
यात्रियों की परेशानी को देखते हुए एयरपोर्ट के पास अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई है। साथ ही खाने-पीने और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी दी जा रही हैं ताकि लोग सुरक्षित तरीके से आगे की जानकारी का इंतजार कर सकें।
अबू धाबी के डिपार्टमेंट ऑफ कल्चर एंड टूरिज्म ने भी इस संकट के दौरान अहम कदम उठाया है। विभाग ने शहर के सभी होटल मैनेजरों को निर्देश दिया है कि जिन मेहमानों की यात्रा बाधित हो गई है और जो देश छोड़कर नहीं जा पा रहे हैं, उन्हें होटल में अतिरिक्त दिनों तक ठहरने की अनुमति दी जाए। खास बात यह है कि ऐसे अतिरिक्त ठहराव का पूरा खर्च DCT अबू धाबी द्वारा कवर किया जाएगा। यह फैसला उन हालातों को देखते हुए लिया गया है जब ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद कई उड़ानें प्रभावित हुईं।
इसी बीच यूएई की प्रमुख एयरलाइन एमिरेट्स ने सुरक्षा कारणों से दुबई से आने-जाने वाली सभी उड़ानों को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। एयरलाइन ने साफ कहा है कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यात्रियों को फिलहाल एयरपोर्ट न आने की सलाह दी गई है। जिन यात्रियों की बुकिंग 28 फरवरी से 31 मार्च के बीच है, उन्हें विकल्प दिया गया है कि वे अपनी यात्रा को 30 अप्रैल तक के लिए रीबुक कर सकते हैं या फिर टिकट का पूरा रिफंड ले सकते हैं। इसके साथ ही दुबई में मौजूद सभी सिटी चेक-इन सेंटर भी अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।
बीमा एक्सपर्ट का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति ऐसे क्षेत्र में यात्रा करने जा रहा है जहां राजनीतिक या सैन्य तनाव ज्यादा है, तो उसे अपनी ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी को बेहद ध्यान से पढ़ना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति सरकार की आधिकारिक ट्रैवल एडवाइजरी के खिलाफ जाकर यात्रा करता है, तो कई मामलों में बीमा कंपनियां क्लेम देने से मना कर सकती हैं। इसके अलावा यात्रियों को यह भी देखना चाहिए कि उनकी पॉलिसी में ट्रिप डिले, मेडिकल क्लेम, बैगेज लॉस और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा जैसी शर्तें किन परिस्थितियों में लागू होंगी।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वैश्विक राजनीतिक संकट किस तरह आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल हजारों यात्री एयरपोर्ट्स और होटलों में इंतजार कर रहे हैं कि हालात कब सामान्य होंगे और उनकी यात्रा कब फिर से शुरू हो पाएगी। ऐसे समय में ट्रैवल इंश्योरेंस कुछ राहत दे सकता है, लेकिन इसकी सीमाएं भी हैं। इसलिए यात्रा से पहले सही जानकारी और सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन सकती है।
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