अगर आप भी हर महीने के अंत में बैंक बैलेंस, शेयर बाजार निवेश, म्यूचुअल फंड, पीएफ और इंश्योरेंस की जानकारी के लिए अलग-अलग ऐप और स्टेटमेंट खंगालते हैं, तो आपके लिए राहत भरी खबर है। जल्द ही वह दिन आ सकता है जब आपकी सारी जमा पूंजी और निवेश का पूरा हिसाब-किताब एक ही मासिक स्टेटमेंट में मिल जाएगा।
देश के वित्तीय नियामक इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। उनका मकसद आम आदमी को उसकी पूरी फाइनेंशियल हेल्थ की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराना है। अभी स्थिति यह है कि बैंक, म्यूचुअल फंड, बीमा और पेंशन से जुड़ी जानकारियां अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मिलती हैं, जिससे निवेशकों को काफी परेशानी होती है।
क्या है नया प्रस्ताव?
प्रस्ताव यह है कि अलग-अलग स्टेटमेंट की जगह एक सिंगल मंथली स्नैपशॉट जारी किया जाए। आसान शब्दों में कहें तो एक ही स्टेटमेंट में आपकी सेविंग्स और निवेश की पूरी तस्वीर साफ-साफ दिखेगी।
इस पहल की शुरुआत शेयर बाजार नियामक सेबी ने की है। सेबी इस मामले में आरबीआई (बैंकों का नियामक), आईआरडीएआई (बीमा नियामक) और पीएफआरडीए (पेंशन नियामक) के साथ बातचीत कर रहा है। उद्देश्य यह है कि मौजूदा कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) का दायरा बढ़ाया जाए।
अभी क्या जानकारी मिलती है?
फिलहाल निवेशकों को जो कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट मिलता है, उसमें सिर्फ डीमैट अकाउंट में मौजूद शेयरों और म्यूचुअल फंड निवेश की जानकारी होती है। बैंक खाते, बीमा या पीएफ का विवरण इसमें शामिल नहीं होता।
नए सिस्टम में क्या-क्या जुड़ सकता है?
नए प्रस्ताव के लागू होने पर स्टेटमेंट में ये जानकारियां भी शामिल की जा सकती हैं:
- बैंक खातों की डिटेल
- स्मॉल सेविंग स्कीम्स
- बीमा पॉलिसी और बॉन्ड होल्डिंग्स
- प्रोविडेंट फंड (PF)
- नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)
रिपोर्ट के मुताबिक, एनपीएस को पहले ही इस सिस्टम में जोड़ने की दिशा में काम शुरू हो चुका है। लक्ष्य यह है कि शेयर बाजार, बैंक, बीमा और पेंशन से जुड़ा पैसा एक ही छत के नीचे दिखाई दे।
आगे क्या हो सकता है?
भविष्य में यह स्टेटमेंट सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें आपकी पूरी वित्तीय तस्वीर सामने आ सकती है। यानी आपकी संपत्तियां (सेविंग्स और निवेश) के साथ-साथ कर्ज और देनदारियां भी दिख सकती हैं, जैसे:
- होम लोन
- पर्सनल लोन
- क्रेडिट कार्ड का बकाया
- एक तरह से यह आपकी मंथली पर्सनल बैलेंस शीट जैसा होगा।
क्या यह अनिवार्य होगा?
इस बारे में सेबी चेयरमैन ने कहा है कि यह व्यवस्था अनिवार्य भी हो सकती है या फिर निवेशकों को अपनी सहमति (कंसेंट) देने का विकल्प मिल सकता है। यानी आपकी अनुमति से ही अलग-अलग संस्थानों का डेटा जोड़ा जा सकता है।
तकनीकी तौर पर कैसे होगा संभव?
तकनीकी रूप से अलग-अलग नियामक और संस्थाएं API (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) के जरिए डेटा शेयर करेंगी। आपका पैन नंबर इस सिस्टम से लिंक हो सकता है। इसके बाद डिपॉजिटरी संस्थाएं NSDL और CDSL एक ही स्टेटमेंट में सारी जानकारी दिखा सकेंगी। कुल मिलाकर, अगर यह योजना लागू होती है तो आम निवेशकों के लिए अपने पैसे का पूरा हिसाब रखना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।
(डिस्क्लेमर: ये सलाह सामान्य जानकारी के लिए दी गई है। कोई फैसला लेने से पहले विशेषज्ञ से बात करें। मिंट हिंदी किसी भी परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं है।)