
देशभर में प्रॉपर्टी की कीमतें ताबड़तोड़ बढ़ रही हैं। इससे प्रॉपर्टी खरीदने वालों पर अगर कीमत का बोझ बढ़ रहा है तो बेचने वालों को मुनाफा भी जमकर होता है। जाहिर है अगर प्रॉपर्टी बेचने पर लाखों का मुनाफा हुआ है तो इस पर टैक्स भी निश्चित रूप से चुकाना पड़ेगा। लेकिन, इनकम टैक्स के तहत टैक्स में बचत कर सकते हैं।
इसबीच Taxbuddy.com और चार्टर्ड अकाउंटेंट डॉ. सुरेश सुराना ने मौजूदा आयकर कानून से जुड़ी एक बड़ी समस्या के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अगर किसी टैक्सपेयर्स को अपनी संपत्ति बेचकर कोई लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (Long Term Capital Gains - LTCG) नहीं मिलता है, तब भी उसे टैक्स भरना पड़ेगा।
TaxBuddy.com ने 22 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक घटना शेयर की है। इसमें उन्होंने बताया कि रमेश को 61,360 रुपये अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़ा है। जबकि उन्हें कैपिटल गेन पर कोई फायदा नहीं हुआ था। संपत्तियों पर 10 फीसदी का सरचार्ज लागू होता है।
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, चार्टर्ड अकाउंटेंट डॉ. सुरेश सुराणा ने कहा कि फाइनैंस (नं. 2) अधिनियम, 2024 में संपत्ति बिक्री लेनदेन के लिए LTCG पर टैक्स लगाने के तरीके में बदलाव हो गया है। 23 जुलाई, 2024 को या उसके बाद होने वाले संपत्ति बिक्री लेनदेन के लिए धारा 48 के कैलकुलेशन के प्रावधानों के तहत लागत के इंडेक्सेशन की अनुमति नहीं दी गई है।
अब इस पर सुराणा का कहना है कि आय की गणना के लिए कैपिटल गेन की गणना बिक्री मूल्य और मूल लागत के बीच के अंतर के रूप में किया जाता है। इसमें किसी भी तरह की महंगाई का एडजेस्टमेंट नहीं होता है। फाइनैंस एक्ट (No.2), 2024 के सेक्शन 112 में लागू टैक्स रेट को बदल दिया गया है और इसे 12.5 फीसदी कर दिया गया है।
हालांकि ग्रैंडफादरिंग राहत के तौर पर 23 जुलाई 2024 से पहले अर्जित भूमि या भवन बेचने वाले निवासी व्यक्तियों और एचयूएफ टैक्सपेयर्स के लिए एक ग्रैंडफादरिंग लाभ जोड़ा गया है। इसके अनुसार अगर पुराने कैपिटल गेन टैक्स रिजीम (इंडेक्सेशन के साथ 20%) के तहत जोड़ा गया टैक्स नई 12.5% (इंडेक्सेशन के बिना) व्यवस्था से कम है, तो अतिरिक्त टैक्स को नजरअंदाज किया जाएगा। दूसरे शब्दों में, ऐसे टैक्सपेयर्स प्रभावी रूप से उपरोक्त विकल्पों में से कम दर पर टैक्स का भुगतान करते हैं।
सुराणा आगे कहते हैं कि अब मुद्दे की बात यह है कि यह राहत सिर्फ टैक्स कम्यूटेशन के चरण में ही लागू होती है। इससे ‘टोटल इनकम’ में शामिल लाभ की राशि में कोई बदलाव होता है। सेक्शन 48 के तहत पूर्ण, नॉन इंडेक्सड गेन को कुल आय का हिस्सा माना जाना चाहिए, भले ही ग्रैंडफादरिंग प्रावधान के कारण धारा 112 के तहत उस हिस्से पर फाइनली कोई टैक्स देय न हो।
सुराणा के अनुसार, सरचार्ज तय करते समय यह अंतर बेहद अहम हो जाता है। सरचार्ज तब लगाया जाता है जब 'टोटल इनकम' 50 लाख रुपये से 1 करोड़ की तय लिमिट को पार कर जाए। दरअसल, ‘टोटल इनकम’ नॉन इंडेक्सेड कैपटल गेन शामिल रहता है। इसलिए ऐसे गेन से किसी भी टैक्सपेयर्स को हाएर सरचार्ज का सामना करना पड़ सकता है। भले ही इसमें अतिरिक्त कैपिटल गेन टैक्स न लगे।
1 जनवरी 2024 को 1.30 करोड़ रुपये में खरीदा फिर 2 करोड़ रुपये में बेच दिया।
अन्य आय - 30,00,000 रुपये (बैंक ब्याज और वेतन)
CII 2013-14 = 220; 2024-25 = 363 → इंडेक्सेड कॉस्ट 2.145 करोड़ रुपये
TaxBuddy ने बताया कि आखिर ऐसे कैसे हुआ
इनकम रूल - 23 जुलाई 2024 से भूमि, भवन पर LCG इनकम के लिए नॉन इंडेक्सड है।
टैक्स रूल - 23 जुलाई, 2024 से पहले अधिग्रहण करने वाले लोगों को इंडेक्सेशन के कारण 12.5 प्रतिशत बनाम 20 प्रतिशत से तुलना करना होगा और कम पेमेंट करना होगा। इसमें राशि कम होती है, इनकम नहीं कम होती है। इस पर सरचार्ज लागू किया जाता है।
वही घर वही खरीदार और वही कीमत सिर्फ ट्रांसफर करने की तारीख से आपके सरचार्ज का बैंड बदल गया।
1 अप्रैल 2024: इनकम 30 लाख रुपये → 6,13,600 टैक्स
1 जनवरी, 2025: इनकम 1 करोड़ रुपये → सरचार्ज लागू → 6,74,960 टैक्स
चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुरणा ने आगे बताया कि 23 जुलाई, 2024 से पहले के लेन-देन के लिए, टैक्सपेयर्स ने इंडेक्सेशन लागू करने के बाद 14.5 लाख रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल नुकसान हुआ। इसमें कोई टैक्सेबल कैपिटल गेन नहीं था, और कुल इनकम में सिर्फ 30 लाख रुपये की अन्य आय (वेतन और बैंक ब्याज) शामिल थी। चूंकि कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक नहीं थी, इसलिए कोई सरचार्ज नहीं लगा, और टैक्स लायबिलिटी 30 लाख रुपये + सरचार्ज की स्लैब दर तक सीमित थी। सुरेश आगे बताते हैं कि 23 जुलाई 2024 के बाद, इंडेक्सेशन हटाने के बाद गैर-इंडेक्स्ड लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का कैलुकेशन 70 लाख रुपये की गई।
वहीं संपत्ति के मामले में लेन-देन पर टैक्स जीरो था। इसकी वजह ये है कि दोनों विकल्पों नें इंडेक्सेशन के बिना 12.5 फीसदी और इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी लागू किया गया था। फिर भी कुल आय की गणना करते समय 70 लाख रुपये के गेन को शामिल किया गया। इससे टैक्सपेयर्स की कुल इनकम 30 लाख रुपये से बढ़कर 1 करोड़ रुपये हो गई, जिससे उस पर सरचार्ज लागू हो गया।
सुरेश का कहना है कि कुल इनकम 50 लाख रुपये से अधिक हो जाती है तो सरचार्ज लागू हो जाते हैं। इस केस में 5.9 लाख रुपये के बेसिक स्लैब टैक्स पर 10 फीसदी सरचार्ज लगाया गया। ऐसे में 59,000 रुपये की अतिरिक्त देनदारी बन गई, साथ ही थोड़ा सरचार्ज भी लगा। कुल मिलाकर संपत्ति के लेनदेन पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन न होने के बावजूद 61,360 रुपये का अतिरिक्त टैक्स लग गया।
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