जीरो-कूपन बॉन्ड: लॉन्ग टर्म निवेशकों को मिलेगा फायदा, जानिए कैसे

पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन के जीरो-कूपन बॉन्ड का सार्वजनिक निर्गम वर्तमान में सदस्यता के लिए खुला है। यह 30 जनवरी को बंद हो जाएगा। इन बॉन्डों की अवधि 10 साल की है।

एडिटेड बाय Jitendra Singh
पब्लिश्ड27 Jan 2026, 04:35 PM IST
जीरो कूपन बॉन्ड में अवधि के दौरान कोई ब्याज नहीं मिलता।
जीरो कूपन बॉन्ड में अवधि के दौरान कोई ब्याज नहीं मिलता।(Livemint)

जीरो कूपन बॉन्ड (Zero Coupon Bond) एक ऐसा बॉन्ड होता है जिस पर कोई नियमित ब्याज (कूपन) नहीं मिलता, बल्कि इसे अंकित मूल्य (Face Value) से कम कीमत पर बेचा जाता है। इसके बाद परिपक्वता (Maturity) पर पूरा अंकित मूल्य चुकाया जाता है। इस खरीद मूल्य और अंकित मूल्य (फेस वैल्यू) क अंतर ही निवेशक का रिटर्न होता है, जो लंबी अवधि के लक्ष्यों (जैसे रिटायरमेंट या शिक्षा) के लिए उपयोगी है। बॉन्ड की अवधि के दौरान आपको कोई ब्याज नहीं मिलता। जब बॉन्ड परिपक्व होता है, तो आपको पूरा अंकित मूल्य ( 100) मिलता है।

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन के जीरो-कूपन बॉन्ड का सार्वजनिक निर्गम वर्तमान में सदस्यता के लिए खुला है। यह 30 जनवरी को बंद होगा। इसकी अवधि 10 साल और एक महीने की है। इस मामले में बॉन्डबे के सह-संस्थापक तुषार शर्मा कहते हैं, "जीरो-कूपन बॉन्ड में, कोई अंतरिम नकदी प्रवाह नहीं होता है। पूरा रिटर्न परिपक्वता के बाद मिलता है।

मुख्य विशेषताएं

डिस्काउंट बॉन्ड: इन्हें डिस्काउंट बॉन्ड भी कहा जाता है क्योंकि ये भारी छूट पर जारी होते हैं।

दीर्घकालिक लक्ष्य: ये शिक्षा या सेवानिवृत्ति जैसे लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों के लिए अच्छे होते हैं।

पुनर्निवेश जोखिम नहीं: चूंकि कोई आवधिक भुगतान नहीं होता, इसलिए ब्याज दरों में बदलाव के कारण आय को फिर से निवेश करने का कोई जोखिम नहीं होता।

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जीरो-कूपन बॉन्ड का टैक्सेशन

जीरो-कूपन बॉन्ड पर पूंजीगत संपत्ति के रूप में कर लगाया जाता है, न कि ब्याज-उपज वाले उपकरणों के रूप में। लाभ पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ के रूप में कर लगाया जाता है। अगर एक साल से अधिक रखते हैं तो 12.5 फीसदी टैक्स लगता है। इसके उलट सावधि जमा (FD) और बॉन्ड कूपन से ब्याज पर वार्षिक रूप से स्लैब दरों पर कर लगाया जाता है।

किसे निवेश करना चाहिए?

जीरो-कूपन बॉन्ड सेवानिवृत्ति या शिक्षा योजना जैसे लॉन्ग टर्म के लिए टारगेट रखे वाले निवेशकों के लिए यह बेहतर माना जाता है। जानकारों का कहना है कि हाई इनकम वालों के लिए भी जीरो कूपन बॉन्ड में निवेश करना बेहतर माना गया है। इसकी वजह ये है कि हाएर इनकम टैक्स वालों को नियमित आय की जरूरत नहीं रहती है।

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बॉन्ड इश्यू की कैसे करें तुलना

निवेशकों को बॉन्ड निर्गमों की तुलना जरूर करना चाहिए। जिसने जारी किया है, उसकी क्रेडिट रेटिंग का आकलन करें। मूल्य संवेदनशीलता और द्वितीयक बाजार तरलता की भी जांच करना चाहिए। अगर आप यह जांच पड़ताल कर लेते हैं तो जोखिम को कम कर सकते हैं और कभी भी बाहर निकल सकते हैं।

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