Madras HC case: जज का ऐसा आदेश आया कि मच गया बवाल, 107 सांसदों ने कर दी उन्हें हटाने की मांग

Madras High Court case: धार्मिक परंपरा के नाम पर मद्रास हाईकोर्ट के एक जज के आदेश ने बड़ा राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है। INDIA ब्लॉक के 107 सांसदों ने जज जीआर स्वामीनाथन पर सांप्रदायिक और राजनीतिक झुकाव का आरोप लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष को उन्हें हटाने का प्रस्ताव दिया है।

Priya Shandilya
पब्लिश्ड10 Dec 2025, 12:54 PM IST
 मद्रास HC के जज जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव
मद्रास HC के जज जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव

Madras High Court case: देश की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब विपक्षी गठबंधन 'INDIA' ब्लॉक के 107 सांसदों ने मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन को पद से हटाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक महाभियोग प्रस्ताव सौंपा। इस प्रस्ताव में कांग्रेस, DMK, AAP, सपा, सीपीआई, सीपीएम, और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) सहित कई प्रमुख दलों के सांसदों के हस्ताक्षर हैं। नियम के अनुसार, किसी जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होती है, जो यहां पूरी हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

इस पूरे राजनीतिक विवाद की जड़ न्यायमूर्ति स्वामीनाथन का एक फैसला है। पिछले हफ्ते, उन्होंने तमिलनाडु के तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित 6वीं शताब्दी के सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के प्रशासन को एक निर्देश दिया। यह निर्देश था कि 13वीं शताब्दी की सिकंदर बादुशाह दरगाह के पास एक स्तंभ पर 'दीपक जलाने की परंपरा' को फिर से शुरू किया जाए। जब राज्य सरकार ने विरोध किया और मंदिर प्रबंधन ने पालन नहीं किया, तो जज ने अवमानना का आदेश भी जारी किया।

फैसले से बढ़ा सांप्रदायिक तनाव?

मामला तब और बढ़ गया जब अदालत ने एक हिंदुत्व समूह को इस रस्म को निभाने की अनुमति दी और यहां तक कि उन्हें केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की सुरक्षा भी मुहैया कराने का निर्देश दिया, जिसे पुलिस ने निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders) लागू करते हुए रोक दिया। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने पहले उच्च न्यायालय और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहां उनकी याचिका स्वीकार कर ली गई है। वामपंथी दलों ने इसे "सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा" देने वाला कदम बताया और कहा कि जज ने राज्य के कानून-व्यवस्था के अधिकार को दरकिनार किया है।

पक्षपात और धर्मनिरपेक्षता पर गंभीर सवाल

सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव में न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए। आरोप है कि जज ने एक वरिष्ठ अधिवक्ता एम. श्रीचरण रंगनाथन और एक विशेष समुदाय के अधिवक्ताओं के पक्ष में फैसला किया, और संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ निर्णय लिए।

सरकारी अधिकारियों को फटकार और नोटिस

न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने अपने आदेशों का पालन न करने पर तमिलनाडु के मुख्य सचिव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) को 17 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश होने के लिए भी तलब किया है। उन्होंने राज्य सरकार के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, "मैं यहां हाथ उठाकर असहाय होकर यह कहने के लिए नहीं हूं कि, 'हे पिता, उन्हें माफ कर दो, क्योंकि वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं।' यह जानबूझकर उल्लंघन है।" उन्होंने CISF की रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था कि मदुरै पुलिस आयुक्त ने 200 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ अदालत के आदेश का पालन करने से CISF टुकड़ी को रोका था।

संसद से सड़क तक गरमाई सियासत

यह मुद्दा सिर्फ अदालत तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि पिछले हफ्ते लोकसभा में भी बवाल मच गया था। DMK सदस्यों ने सदन में विरोध प्रदर्शन करते हुए BJP पर 'सांप्रदायिक तनाव' भड़काने का आरोप लगाया। वहीं, केंद्रीय उपमंत्री एल. मुरुगन ने DMK पर 'एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने' का पलटवार किया। DMK सांसद टीआर बालू ने सदन में न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के 'एक विशेष विचारधारा' के प्रति निष्ठा रखने की आलोचना की, जिस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने न्यायपालिका पर आक्षेप न लगाने की चेतावनी दी थी। अब स्पीकर ओम बिरला के सामने इन आरोपों की जांच और प्रस्ताव पर निर्णय लेने की बड़ी जिम्मेदारी है।

Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.

बिजनेस न्यूज़न्यूज़Madras HC case: जज का ऐसा आदेश आया कि मच गया बवाल, 107 सांसदों ने कर दी उन्हें हटाने की मांग
More
बिजनेस न्यूज़न्यूज़Madras HC case: जज का ऐसा आदेश आया कि मच गया बवाल, 107 सांसदों ने कर दी उन्हें हटाने की मांग