2001 Parliament Attack Anniversary: 13 दिसंबर की तारीख भारत के इतिहास में एक दर्दनाक याद के तौर पर दर्ज है। इसी दिन साल 2001 में देश की संसद पर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें कई बहादुर सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। इस हमले की बरसी पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शहीदों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और आतंकवाद के खिलाफ देश की अडिग प्रतिबद्धता को दोहराया।
शहीदों को किया कोटि-कोटि नमन
संसद हमले की बरसी के मौके पर ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा,"वर्ष 2001 में भारत की संसद पर हुए कायराना आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त होने वाले हमारे साहसी सुरक्षाकर्मियों और कर्मठ कर्मचारियों के सर्वोच्च बलिदान को कोटि-कोटि नमन। लोकतंत्र की इस सर्वोच्च संस्था की रक्षा करते हुए जिन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर दिए, उनके प्रति हम कृतज्ञ हैं। देश के प्रति उनकी अद्वितीय निष्ठा हमें निरंतर प्रेरणा देती है।"
लोकतंत्र की रक्षा में अद्वितीय साहस
ओम बिरला ने अपने संदेश में कहा कि शहीदों ने जिस वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ आतंकियों का सामना किया, वह सिर्फ बहादुरी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र रक्षा के प्रति भारत की मजबूत इच्छाशक्ति का प्रतीक है। भारत आतंकवाद के विरोध में हमेशा दृढ़ता से खड़ा रहा है। राष्ट्र की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता केवल औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि एक सशक्त संदेश है कि भारत किसी भी प्रकार की आतंकवादी मंशा के सामने कभी झुकेगा नहीं। उनका यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों को साहस, त्याग और जिम्मेदारी का रास्ता दिखाता रहेगा।
पीएम मोदी-राहुल गांधी समेत नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
पीएम मोदी ने X पर लिखा, "आज के दिन हमारा देश उन वीरों को याद करता है जिन्होंने 2001 में संसद पर हुए घिनौने हमले में अपनी जान कुर्बान कर दी। उस मुश्किल घड़ी में उनका साहस, सतर्कता और कर्तव्य निभाने का जज्बा काबिले-तारीफ था। भारत हमेशा उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए आभारी रहेगा।
13 दिसंबर 2001: जब संसद को बनाया गया निशाना
गौरतलब है कि 13 दिसंबर 2001 को पांच आतंकवादी संसद भवन की सुरक्षा में सेंध लगाकर परिसर में घुस आए थे। आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें कई सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी शहीद हो गए। हालांकि सुरक्षाबलों की मुस्तैदी और साहस की वजह से आतंकियों के मंसूबे नाकाम कर दिए गए और देश की संसद सुरक्षित रही।