
भारत ने 26 नवंबर 2008 को अपनी सबसे भयानक आतंकी घटनाओं में से एक का सामना किया, जब एक समूह ने मुंबई में समन्वित हमले किए। ये हमले लगभग चार दिनों तक चलते रहे और बड़ी संख्या में लोगों की मौत और भारी नुकसान हुआ। इस घटना ने भारत की आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी तंत्र में कई कमजोरियों को उजागर किया, खासकर समुद्री सुरक्षा में।
हमलावर समुद्र के रास्ते भारत में घुसे और तटीय सुरक्षा को आसानी से पार कर गए। इस घटना के बाद भारत ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार शुरू किए, जिसमें खास ध्यान खुफिया जानकारी और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर था।
हमलों के बाद भारत के नेतृत्व ने समझा कि देश की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और सुरक्षा खामियों को दूर करना बेहद जरूरी है। इसके बाद देश में कई बड़े सुधार किए गए, जिनसे सुरक्षा का एक नया दौर शुरू हुआ।
26/11 के बाद भारत की तटीय सुरक्षा में बड़े बदलाव किए गए। पहले समुद्री सुरक्षा कई अलग-अलग एजेंसियों के हाथ में थी और इनके बीच समन्वय की कमी थी। लेकिन हमले के बाद सरकार ने एक “पूरे तंत्र” की तरह काम करने वाला मॉडल अपनाया।
इन सबके बीच एक अहम फैसला यह था कि भारतीय नौसेना को समुद्री सुरक्षा की मुख्य ज़िम्मेदारी दी गई और वो है तटीय और अपतटीय यानी दोनों क्षेत्रों की। पहले नौसेना, कोस्ट गार्ड और राज्य की मरीन पुलिस सभी अलग-अलग ज़िम्मेदारियां संभालते थे, लेकिन अब नौसेना के नेतृत्व में ये सभी एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।
मुंबई, विशाखापत्तनम, कोच्चि और पोर्ट ब्लेयर में JOCs स्थापित किए गए, जहां नौसेना और कोस्ट गार्ड मिलकर समुद्री खतरे से निपटने के लिए काम करते हैं। यहां सेना, BSF, कस्टम्स और IB जैसी एजेंसियों से भी इनपुट लिए जाते हैं, जिससे सुरक्षा प्रतिक्रिया और भी तेज होती है।
नौसेना ने सागर प्रहरी बल (SPB) बनाया, जिसमें 80 तेज नावें (FICs) और 1,000 से अधिक जवान हैं। इनका काम तटों की निगरानी करना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया देना है। भारत का समुद्री क्षेत्र 7,500 किमी से ज्यादा लंबा है, इसलिए यह बल बेहद महत्वपूर्ण है।
26/11 के बाद भारत ने तटीय रडार चेन बनाई, जिससे समुद्र में चल रही हर गतिविधि की लगातार निगरानी की जा सके। इसके साथ ही ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) लागू किया गया, जिससे नावों और जहाजों की पहचान और ट्रैकिंग आसान हो गई।
सुरक्षा में स्थानीय लोगों, खासकर मछुआरों की भूमिका बहुत अहम है। इसलिए नौसेना और कोस्ट गार्ड ने उन्हें जागरूक करने के कार्यक्रम चलाए। सरकार ने नावों का रजिस्ट्रेशन और मछुआरों को पहचानपत्र देना भी अनिवार्य किया, ताकि छोटी नौकाओं का गलत इस्तेमाल न हो सके।
26/11 ने यह भी दिखाया कि भारत की खुफिया जानकारी एक-दूसरे तक समय पर नहीं पहुंचती थी। इसलिए सरकार ने एक ऐसी प्रणाली बनाने पर जोर दिया, जिसमें रियल-टाइम जानकारी साझा हो सके।
यह एक प्रमुख प्रोजेक्ट है जो 21 खुफिया और कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों को बैंक, एयरलाइन, रेलवे, टेलीकॉम जैसी सेवाओं के डेटा से जोड़ता है।
AI और बिग डेटा की मदद से यह संदिग्ध गतिविधियों का पता लगा सकता है। हालांकि, इसकी गोपनीयता और निगरानी को लेकर चिंता भी जताई गई है, क्योंकि ऐसे सिस्टम में गलत इस्तेमाल की संभावना रहती है।
CCTNS एक नेटवर्क है जो भारत के सभी पुलिस स्टेशनों को जोड़ता है, जिससे अपराध संबंधी जानकारी तुरंत साझा हो सके। यह आतंकवाद और संगठित अपराध से निपटने में बड़ी मदद करता है।
DRDO द्वारा विकसित NETRA इंटरनेट ट्रैफिक की निगरानी कर सकता है और “bomb”, “attack” जैसे शब्दों पर अलर्ट भेजता है। हालांकि, इसके दायरे और पारदर्शिता की कमी के कारण इसे लेकर भी आलोचना है।
26/11 भारत के लिए एक दर्दनाक मोड़ था, लेकिन इसके बाद देश ने सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है—चाहे समुद्री सुरक्षा हो, निगरानी हो या खुफिया जानकारी। अब चुनौती यह है कि सुरक्षा और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखा जाए, ताकि देश सुरक्षित भी रहे और लोगों की स्वतंत्रता भी सुरक्षित रहे।
Catch all the Business News, Market News, Breaking News Events and Latest News Updates on Live Mint. Download The Mint News App to get Daily Market Updates.