
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन रूस के साथ नए शांति फार्मूले पर तेजी से काम कर रहा है। अमेरिकी न्यूज चैनल CNN की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ इस बैक-चैनल वार्ता की कमान संभाल रहे हैं और हाल के दिनों में बातचीत की रफ्तार बढ़ी है। सूत्र बताते हैं कि इस बार क्रेमलिन की ओर से कुछ 'नई खुली मानसिकता' दिखाई दे रही है, जिसने उम्मीदें फिर जगा दी हैं।
इसी कूटनीतिक मोर्चे को मजबूत करने के लिए अमेरिकी आर्मी सेक्रेटरी डैन ड्रिस्कॉल इस हफ्ते एक वरिष्ठ पेंटागन प्रतिनिधिमंडल के साथ यूक्रेन पहुंचे। यह दौरा राष्ट्रपति ट्रम्प के निर्देश पर हुआ, ताकि जमीनी हालात, हथियारों की जरूरतों और संभावित समझौते की राह पर तेजी लाई जा सके। यूक्रेन के रक्षा मंत्री डेनिस श्मिहाल ने ड्रिस्कॉल से मुलाकात की पुष्टि की और अमेरिकी समर्थन के लिए कृतज्ञता जताई।
एक और अमेरिकी न्यूज चैनल NBC News का कहना है कि ट्रम्प ने कुछ दिनों पहले रूस–यूक्रेन शांति वार्ता के लिए 28-पॉइंट प्लान को मंजूरी दी है। यह दस्तावेज अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच पिछले कई सप्ताह से चल रही चर्चाओं का परिणाम बताया जा रहा है। खास बात यह है कि यह ड्राफ्ट अभी तक आधिकारिक रूप से यूक्रेन के शीर्ष नेतृत्व को पेश नहीं किया गया है, मगर यह अमेरिकी सेना के यूक्रेन दौरे के साथ ही पूरा किया गया है।
रूसी अधिकारियों ने CNN को पुष्टि की है कि अमेरिका और रूस के बीच उच्च-स्तरीय संपर्क जारी हैं। रूसी विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव अक्टूबर में अमेरिका आए थे, जहां उनके साथ हुई चर्चाओं को प्रॉडक्टिव बताया गया। हालांकि, क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने वार्ता की गति को लेकर उत्साह कम दिखाया और कहा कि फिलहाल कोई नई जानकारी नहीं है।
ट्रम्प प्रशासन पहले भी कई बार युद्ध खत्म करने की कोशिश कर चुका है, लेकिन हर बार बातचीत उस वक्त टूट जाती थी जब राष्ट्रपति पुतिन किसी ठोस शर्त पर सहमत नहीं होते थे। अमेरिका और यूरोप द्वारा सुझाई गई योजना को भी रूस ने यह कहते हुए ठुकरा दिया कि उसे अस्थायी विराम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान चाहिए। योजना के तहत मौजूदा फ्रंटलाइन को फ्रीज किए जाने का प्रस्ताव था।
फरवरी 2022 में रूस के आक्रमण के बाद से यूक्रेन युद्ध यूरोप के लिए दशकों की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बना हुआ है। पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में जबर्दस्त लड़ाई, ड्रोन हमले, और लंबी दूरी की मिसाइलें लगातार भारी तबाही मचा रही हैं। यूक्रेन पश्चिमी सैन्य सहायता के सहारे अपने क्षेत्रों की रक्षा कर रहा है, जबकि रूस कब्जाए इलाकों को मजबूत करने और यूक्रेन की बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाए हुए है। युद्ध अब तक लाखों लोगों को विस्थापित कर चुका है और हालात एक गहरे गतिरोध में फंसे हुए हैं। यही कारण है कि नई शांति पहल पर दुनिया की निगाहें टिक गई हैं।
ट्रम्प-पुतिन की पिछली कई मुलाकातें ठोस नतीजों तक नहीं पहुंच पाईं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा 28-सूत्रीय योजना, कीव में अमेरिकी उपस्थिति और मॉस्को की हालिया नरम संकेतों ने इस पहल को एक अवसर जरूर दिया है। अब सवाल यह है कि क्या यूक्रेन और यूरोपीय सहयोगी इस डिप्लोमेटिक ब्लूप्रिंट को स्वीकार करेंगे? और क्या मॉस्को वास्तव में इस बार किसी वास्तविक समझौते के लिए तैयार है?
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