
TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर एक अलग गुट के रूप में मान्यता मांग से ठीक एक दिन पहले, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मोर्चा खोल दिया है। बनर्जी ने ओम बिरला को तीन पन्नों का एक पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में अपील की है कि वे पार्टी के भीतर किसी भी विभाजित या अलग हुए ग्रुप को मान्यता न दें। अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से तर्क दिया है कि TMC राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टिकोण से एक एकल और एकीकृत पॉलिटिकल पार्टी है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में पार्टी का संसदीय दल मूल संगठन का एक अविभाज्य हिस्सा है और सांसदों का कोई भी समूह उसी राजनीतिक दल के भीतर रहते हुए अलग से मान्यता का दावा नहीं कर सकता है।
अभिषेक बनर्जी ने लिखा, "तृणमूल कांग्रेस एक अविभाज्य राजनीतिक दल है। कानूनी तौर पर भी केवल एक ही तृणमूल कांग्रेस है।" उन्होंने आगे लिखा कि लोकसभा में पार्टी का केवल एक ही मान्यता प्राप्त नेता और एक ही व्हिप है, जिनकी नियुक्ति पार्टी के संगठनात्मक नेतृत्व की मंजूरी से की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सांसद एकतरफा तरीके से कोई समानांतर समूह नहीं बना सकते और न ही सदन में अलग मान्यता की मांग कर सकते हैं।
यह पत्र रविवार शाम को राज्यसभा सांसद सागरिका घोष और लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद की तरफ से ओम बिरला के आवास पर पहुंचाया गया। दोनों नेताओं को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट खेमे का वफादार माना जाता है। यह कदम बागी तृणमूल सांसदों की सोमवार को होने वाली लोकसभा अध्यक्ष के साथ बैठक से कुछ घंटे पहले उठाया गया है, जिसमें उनके अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता की मांग करने की संभावना है।
संयोग से, जिस समय सागरिका घोष और कीर्ति आजाद नई दिल्ली के अकबर रोड लोकसभा अध्यक्ष स्थित के आवास पर थे, ठीक उसी समय बागी तृणमूल सांसद मोतीलाल नेहरू मार्ग पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर अपनी रणनीति बनाने के लिए बैठक कर रहे थे।
बनर्जी ने अपने पत्र में महाराष्ट्र के राजनीतिक विवाद में हाई कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि संवैधानिक और कानूनी मिसालें किसी दल के संसदीय रैंकों के भीतर इस तरह के विभाजन की अनुमति नहीं देती हैं। पत्र सौंपने के बाद कीर्ति आजाद ने हाई कोर्ट की संवैधानिक पीठ के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि "पार्टी में कोई विभाजन नहीं हो सकता।" वहीं,सगारिका घोष ने भी इसी बात को दोहराते हुए कहा कि पार्टी को तोड़ने की कोशिश करने वाले कभी सफल नहीं होंगे और एक अलग गुट बनाने का प्रयास पूरी तरह से संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है।
इस बीच, बागी खेमे ने रविवार दोपहर को भूपेंद्र यादव के आवास पर एक और दौर की चर्चा की। इस बैठक की सामने आई एक तस्वीर ने सियासी हलचल तेज कर दी है, जिसमें टीएमसी के कई प्रमुख सांसद और नेता एक साथ नजर आए। इनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, सुदीप बंदोपाध्याय, देव, पार्थ भौमिक, असित माल, जगदीश चंद्र बसुनिया, प्रसून बनर्जी, माला रॉय, शर्मिला सरकार, मिताली बाग, बापी हलदर, यूसुफ पठान, जून मलिया, सयानी घोष और कालीपद सोरेन शामिल हैं।
इस घटनाक्रम ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही सत्ता की लड़ाई को और तेज कर दिया है, जहां अब दोनों खेमे लोकसभा में पार्टी के संसदीय प्रतिनिधित्व के भविष्य को लेकर स्पीकर के सामने एक महत्वपूर्ण कानूनी और राजनीतिक मुकाबले के लिए तैयार हैं।
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