झारखंड के चतरा में क्रैश हुआ एयर एंबुलेंस जिसका दिल्ली में इलाज के लिए रांची से उड़ान भरा था, वह शख्स एक होटल संचालक था। संजय कुमार शाव लातेहार जिले के चंदवा में एक होटल चलाते थे। होटल में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई और संजय उस आग में बुरी तरह झुलस गए।
7.5 लाख रुपये कर्ज लेकर मंगवाया था एयर एंबुलेंस
65 प्रतिशत जल चुके संजय कुमार शाव का इलाज रांची के एक प्राइवेट अस्पताल देवकमल हॉस्पिटल में हो रहा था। लेकिन स्थिति नहीं सुधरी तो डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन संजय की हालत ऐसी नहीं थी कि उन्हें रांची से दिल्ली सड़क मार्ग से लाया जा सके। तब परिवार ने 7.5 लाख रुपये कर्ज लेकर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की। लेकिन नियती को कुछ और ही मंजूर था।
हम अभी घर पहुंचे ही थे कि क्रैश की खबर टीवी पर आ गई। सबकुछ एक क्षण में खत्म हो गया।- विजय कुमार शाव, दुर्घटना में मारे गए मरीज संजय के भाई
20 मिनट में ही क्रैश कर गया विमान
देवकमल हॉस्पिटल के सीईओ अनंत सिन्हा ने बताया कि संजय के लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था अस्पताल में इलाज करवा रहे एक मरीज ने करवाई थी। रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लि. का ब्रीचक्राफ्ट सी90 विमान सोमवार शाम 7.11 बजे रांची से उड़ान भरा, लेकिन 20 मिनट बाद ही उसका एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से कनेक्शन टूट गया और प्लेन चतरा के जंगल में गिर गया।
हादसे में सात लोगों की दर्दनाक मौत
जो प्लेन एक व्यक्ति की जान बचान के लिए उड़ी थी, उसने सात लोगों की जान ले ली। देशभर में शोक की लहर फैला देने वाली इस दुर्घटना ने संजय के अलावा उनकी पत्नी अर्चना देवी, भांजा ध्रुव कुमार, डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता, नर्स सचिन कुमार मिश्रा और दो पायलट कैप्टन विवेक विकास भगत एवं कैप्टन सवराजदीप सिंह की जिंदगियां लील लीं।
जमीन बेचकर बेटे को बनाया डॉक्टर, अब नहीं रहा
घटना में मारे गए डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता के पिता बजरंगी प्रसाद ने कहा कि उन्होंने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी सारी जमीन बेच दी थी। डॉ. विकास गुप्ता रांची के सदर अस्पताल में पोस्टे थे। बजरंगी प्रसाद ने बताया, ‘उसका एक सात वर्ष का बेटा है। वह बहुत मेधावी था। उसने ओडिशा के कटक से एमबीबीएस डिग्री ली थी।’
एक पल में सबकुछ लुट गया
विजय कुमार शाव अपने भाई संजय को रांची एयरपोर्ट तक पहुंचाकर आए और घर लौट भी नहीं पाए कि उन्हें कलेजा चीर देने वाला यह वाकया पता चला। विजय कहते हैं, 'हम अभी घर पहुंचे ही थे कि क्रैश की खबर टीवी पर आ गई। सबकुछ एक क्षण में खत्म हो गया।' अब संजय के दो बच्चे अनाथ हो गए क्योंकि दुर्घटना में संजय के साथ उनकी पत्नी अर्चना भी मारी गईं।
पति-पत्नी दोनों खत्म, बच्चे हुए अनाथ
परिवार को इस बात का अफसोस सता रहा है कि अगर रांची में ही इलाज की व्यवस्था होती तो संजय को एयर एंबुलेंस से भेजना ही नहीं पड़ता और न यह घटना होती। संजय के साले ने न्यूज एजेंसी भाषा से कहा, 'मेरे जीजा को रांची में ही इलाज मिल गया होता तो बहुमूल्य जिंदगियां बच गई होतीं। मैंने संजय और अपनी बहन अर्चना, दोनों को खो दिया।'