देश में कोरोना के मामलों में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इस बीच INSACOG (इंडियन सार्स-कोव-2 जिनोमिक्स कंसोर्टियम) के मुताबिक कोरोना वायरस के दो नए वैरिएंट सामने आए हैं। NB.1.8.1 और LF.7 नाम के ये नए वैरिएंट भारत में मिले हैं।
कहां मिले नए वैरिएंट?
INSACOG के आंकड़ों के अनुसार, NB.1.8.1 वैरिएंट का एक केस अप्रैल में तमिलनाडु में पाया गया, जबकि LF.7 के चार मामले मई में गुजरात में सामने आए हैं।
क्या कोई खतरा है इनसे?
अभी के लिए WHO (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन) ने NB.1.8.1 और LF.7 को ‘Variants Under Monitoring’ यानी निगरानी वाले वैरिएंट की श्रेणी में रखा है। इन्हें अभी तक ‘Variants of Concern’ या ‘Variants of Interest’ नहीं माना गया है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि फिलहाल की जानकारी के हिसाब से NB.1.8.1 से दुनियाभर में बहुत ज्यादा खतरा नहीं है। साथ ही अभी जो कोविड वैक्सीन्स मौजूद हैं, वो इस वैरिएंट के खिलाफ असरदार मानी जा रही हैं, खासतौर पर गंभीर बीमारी और लक्षणों को रोकने में।
भारत में कौन सा वैरिएंट ज्यादा फैला है?
भारत में JN.1 वैरिएंट सबसे ज्यादा पाया जा रहा है, जो करीब 53% मामलों में देखा गया है। इसके बाद 26% लोगों में BA.2 वैरिएंट और बाकी 20% लोगों में ओमिक्रॉन सबवैरिएंट्स देखे जा रहे हैं।
डॉक्टर्स की सलाह: घबराने की जरूरत नहीं है
डॉक्टर्स का कहना है कि JN.1 या इन नए वैरिएंट्स को लेकर लोगों को पैनिक होने की जरूरत नहीं है। IMA JDN (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क) के प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान ने कहा कि JN.1, जो कि ओमिक्रॉन BA.2.86 की संतति है, ज्यादा खतरनाक नहीं है।
डॉ. चौहान ने ये भी कहा, ‘लक्षण दिखें तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। घबराहट और अफरा-तफरी खुद एक बड़ी बीमारी बन सकती है।’
अगे उन्होंने कहा, ‘ये घातक वैरिएंट नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना हमेशा बेहतर होता है। जैसे हाथ धोना, जरूरत पड़ने पर मास्क पहनना (जैसे अस्पताल या भीड़भाड़ वाली जगहों में), और खांसते-छींकते वक्त मुंह ढंकना, ये सब जरूरी है।’
भारत में फिर से कोरोना वायरस के मामले धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं। फिलहाल सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 12 मई से 19 मई तक अपडेट हुए डैशबोर्ड पर कुल 257 एक्टिव केस दिख रहे हैं। इनमें ज्यादातर मामले केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से सामने आए हैं।