अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान पर किया हमला, फिर बढ़ा तनाव, जवाब में दागी गईं मिसाइलें

अमेरिकी सेना ने रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के रॉकेट लॉन्चरों पर हमला किया। इससे दोनों देशों के बीच करीब एक महीने से बनी शांति टूट गई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागने का दावा किया। जॉर्डन ने आठ मिसाइलें मार गिराने की जानकारी दी।

Manali Rastogi( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड31 Aug 2026, 08:23 AM IST
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। पिछले करीब एक महीने में ईरान के खिलाफ अमेरिका की यह पहली सैन्य कार्रवाई बताई जा रही है। इस हमले के साथ पिछले छह महीने से ज्यादा समय से चल रहे संघर्ष के बीच बनी शांति भी खत्म हो गई।

होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी हमला

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने बताया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के जवान होर्मुज जलडमरूमध्य में रॉकेट दागने और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहे थे। अमेरिकी सेना ने हाल ही में इस इलाके के अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगें हटाने का अभियान पूरा किया था।

ईरान की कुछ अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों ने बताया कि लारक द्वीप के आसपास विस्फोटों की आवाज सुनी गई। ईरान के सरकारी प्रसारक पर जारी रिवोल्यूशनरी गार्ड के बयान में कहा गया कि हमले में उसके कई जवान और आम नागरिक मारे गए तथा कई लोग घायल हुए हैं।

ईरान ने भी किया जवाबी हमला

इसके बाद ईरान के सरकारी टेलीविजन ने कुछ तस्वीरें और वीडियो दिखाते हुए दावा किया कि अमेरिकी हमले के जवाब में जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया गया।

हालांकि, जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल होने वाली आठ मिसाइलों को मार गिराया। इस घटनाक्रम ने पूरे पश्चिम एशिया में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा दी है।

पहले भी हो चुके हैं ईरान पर हमले

ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी से संघर्ष जारी है। इस दौरान ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दूसरे महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया है। ऐसे में दोनों देशों के बीच दोबारा खुला संघर्ष शुरू होना पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

अमेरिकी सेना ने इससे पहले 29 जुलाई को भी ईरान के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी थी। उस दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड के कई ठिकानों पर बड़े हमले किए गए थे। इनमें तटीय निगरानी और रक्षा से जुड़े ठिकाने भी शामिल थे।

इसके कुछ दिन बाद, एक अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी सहयोगी देशों की अपील के बाद अमेरिका ईरान पर सैन्य हमले फिलहाल रोक रहा है। अब होर्मुज जलडमरूमध्य की ताजा कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ गया है।

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