वंदे मातरम् पर सियासी घामासन जारी, गृहमंत्री अमित शाह बोले- गीत न बंटता तो देश भी न बंटता

राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यदि वंदे मातरम् को दो हिस्सों में न बांटा गया होता तो देश का विभाजन नहीं होता। उन्होंने 1937 में इस गीत को सीमित किए जाने को तुष्टिकरण की शुरुआत बताया और कांग्रेस पर वंदे मातरम् के विरोध का आरोप लगाया। शाह ने गांधी परिवार की गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए।

Rishabh Shukla
अपडेटेड9 Dec 2025, 04:07 PM IST
गृहमंत्री अमित शाह
गृहमंत्री अमित शाह (ANI)

राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर बड़ा बयान दिया। वंदे मातरम् के रचयिता बंकिमचंद्र चटर्जी की रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए शाह ने कहा कि यदि वंदे मातरम् को दो हिस्सों में न बांटा गया होता, तो देश का विभाजन भी नहीं होता। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक गीत ने आजादी की लड़ाई में भारत को जोड़ने का कार्य किया और आने वाली पीढ़ियों को इसके महत्व को समझने की जरूरत है।

नेहरू, तुष्टिकरण और विभाजन का आरोप

गृहमंत्री ने 1937 का जिक्र करते हुए कहा कि वंदे मातरम् की स्वर्ण जयंती के समय जवाहरलाल नेहरू ने इसके केवल दो अंतरों को मान्यता दी, जो तुष्टिकरण की राजनीति की शुरुआत थी। शाह ने कहा कि यही नीति आगे चलकर देश के विभाजन की वजह बनी। उन्होंने साफ कहा कि यदि यह फैसला न लिया गया होता, तो आज भारत विभाजित नहीं होता। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् लिखे जाने के जब 100 साल पूरे हुए तो उस समय देश में आपातकाल लगा दिया गया था और इसे बोलने वालों को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जेल में डाल दिया था। शाह ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के डीएनए में वंदे मातरम् का विरोध रहा है, जो नेहरू से लेकर आज तक चला आ रहा है।

अमित शाह का गांधी परिवार सीधा हमला

गृहमंत्री अमित शाह ने गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि वंदे मातरम् पर लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस से जुड़े गांधी परिवार के दोनों सदस्य सदन से नदारद रहे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा कराने की कोई जरूरत नहीं है। शाह ने कहा कि कुछ लोग इस चर्चा को पश्चिम बंगाल चुनाव से जोड़कर इसके महत्व को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

शाह के बयान पर जयराम रमेश ने उठाए सवाल

गृहमंत्री ने दावा किया कि संसद में कभी राष्ट्रगीत का गायन बंद करा दिया गया था, जिसे 1992 में भाजपा सांसद राम नाईक और लालकृष्ण आडवाणी की पहल से फिर शुरू किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडी गठबंधन के कई नेताओं ने राष्ट्रगीत गाने से इनकार किया था और आज भी कुछ सांसद राष्ट्रगान से पहले सदन छोड़ देते हैं। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के सवाल पर शाह ने जवाब दिया कि वह ऐसे कांग्रेस सदस्यों की सूची सदन के पटल पर रखने को तैयार हैं। उन्होंने राष्ट्रगीत के 150 वर्ष होने के अवसर पर सरकार द्वारा देश भर में किए जाने वाले विभिन्न आयोजनों और कार्यक्रमों के बारे में सदन को जानकारी दी।

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