Agnivesh Agarwal passes away: बेटा पिता से पहले नहीं जाना चाहिए… अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन, लिखा भावुक संदेश

Agnivesh Agarwal passes away: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का अमेरिका में स्कीइंग हादसे के बाद कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। 49 साल की उम्र में बेटे को खोने का दर्द साझा करते हुए अग्रवाल ने समाज को 75% देने के संकल्प को दोहराया।

Priya Shandilya
अपडेटेड8 Jan 2026, 07:48 AM IST
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन (फाइल फोटो)
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन (फाइल फोटो)(X)

Agnivesh Agarwal passes away: सफलता, दौलत और पहचान… इन सबके बीच जब कोई पिता अपना बेटा खो देता है, तो जिंदगी अचानक रुक सी जाती है। वेदांता ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन अनिल अग्रवाल के लिए भी यह वही पल है। अमेरिका में स्कीइंग हादसे के बाद कार्डियक अरेस्ट से उनके बेटे अग्निवेश का निधन हो गया। वह सिर्फ 49 साल के थे। पिता ने सोशल मीडिया पर इसे अपनी जिंदगी का सबसे अंधेरा दिन बताया।

स्कीइंग हादसे के बाद टूटी उम्मीदें

जानकारी के मुताबिक, अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के दौरान हादसे का शिकार हुए थे। इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। परिवार को लगा था कि हालात संभल रहे हैं और सबसे बुरा वक्त पीछे छूट गया है, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अचानक आए कार्डियक अरेस्ट ने सबकुछ बदल दिया।

अनिल अग्रवाल का सोशल मीडिया पोस्ट

सोशल मीडिया पर साझा किए गए भावुक संदेश में अनिल अग्रवाल ने लिखा कि यह उनकी जिंदगी का सबसे अंधेरा दिन है। उन्होंने लिखा, “आज मेरी जिंदगी का सबसे अंधेरा दिन है। मेरा प्यारा बेटा अग्निवेश हमें बहुत जल्दी छोड़कर चला गया। वह सिर्फ 49 साल का था, बिल्कुल स्वस्थ, जिंदगी और सपनों से भरा हुआ। अमेरिका में स्कीइंग हादसे के बाद न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल में उसका इलाज चल रहा था और हालत भी बेहतर हो रही थी। हमें लगा था कि मुश्किल वक्त पीछे छूट गया है, लेकिन किस्मत ने कुछ और ही तय कर रखा था। अचानक हुए कार्डियक अरेस्ट ने हमारा बेटा हमसे छीन लिया।”

‘बेटा पिता से पहले नहीं जाना चाहिए’

अनिल अग्रवाल ने गहरे दुख में कहा, “बेटा कभी अपने पिता से पहले नहीं जाना चाहिए। एक मां-बाप के लिए अपने बच्चे को अलविदा कहना ऐसा दर्द है जिसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता। यह नुकसान हमें अंदर तक तोड़ गया है और हम अब भी समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इसे कैसे सहें।”

अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे की यादें साझा करते हुए लिखा, “मुझे आज भी वो दिन याद है जब अग्नि का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। एक साधारण बिहारी परिवार से निकलकर वह ताकत, करुणा और उद्देश्य से भरा इंसान बना। अपनी मां की आंखों का तारा, बहन का सहारा, दोस्तों का भरोसेमंद साथी और ऐसा नरम दिल इंसान जिसने हर किसी को छू लिया जिससे वो मिला।”

एक सफल प्रोफेशनल, लेकिन सबसे पहले इंसान

अनिल अग्रवाल ने बेटे को सिर्फ एक कॉरपोरेट लीडर के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान के तौर पर याद किया। अग्निवेश ने मायो कॉलेज, अजमेर से पढ़ाई की, फुजैराह गोल्ड जैसी कंपनी खड़ी की और बाद में हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन बने। लेकिन इन सब उपलब्धियों के बावजूद, परिवार के लिए वह एक सादा, अपनापन देने वाला बेटा और दोस्त थे। अनिल अग्रवाल ने लिखा, "मेरे लिए वो सिर्फ मेरा बेटा नहीं, मेरा दोस्त, मेरा गर्व और मेरी दुनिया था।"

समाज के लिए 75% देने का संकल्प

इस दुख की घड़ी में अनिल अग्रवाल ने बेटे के सपनों को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने दोहराया कि वह और उनका परिवार अपनी कमाई का 75% से ज्यादा समाज को लौटाने के संकल्प पर कायम रहेंगे। भूख, शिक्षा, महिलाओं का सशक्तिकरण और युवाओं को रोजगार, ये वो सपने थे, जिन्हें अग्निवेश भारत के लिए साकार होते देखना चाहते थे।

परिवार और दोस्तों को लगा सदमा

अग्निवेश की अचानक मौत ने परिवार और दोस्तों को गहरा सदमा दिया है। लेकिन उनकी सोच और सपने हमेशा जिंदा रहेंगे। अनिल अग्रवाल ने वादा किया है कि वे बेटे की रोशनी को आगे बढ़ाते रहेंगे और समाज के लिए काम करेंगे।

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