Delhi AQI: दिल्ली में 91 प्राइवेट और सरकारी इमारतों में लगी एंटी-स्मॉग गन, अब सुधरेगी हवा?

Delhi Air Quality: दिल्ली में गुरुवार को हवा बहुत खराब रही। हालांकि, रेखा गुप्ता सरकार ने हवा को साफ करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए एंटी-स्मॉग गन लगाने का काम तेज कर दिया है। 

Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड6 Nov 2025, 10:21 PM IST
दिल्ली में 91 प्राइवेट और सरकारी इमारतों में एंटी-स्मॉग गन लगाई गई (सांकेतिक तस्वीर)
दिल्ली में 91 प्राइवेट और सरकारी इमारतों में एंटी-स्मॉग गन लगाई गई (सांकेतिक तस्वीर)(ANI)

Delhi AQI News Today: दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए कुल 91 सार्वजनिक और निजी भवनों में एंटी-स्मॉग गन लगाई जा चुकी हैं। दिल्ली सरकार ने आदेश दिया था कि ग्राउंड+5 मंजिल और उससे अधिक ऊंचाई वाली सभी निजी और सरकारी इमारतों में 29 नवंबर तक एंटी-स्मॉग गन लगानी होंगी। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि शहर की 150 इमारतों में एंटी-स्मॉग गन लगाई जाएं। इस बीच, गुरुवार को भी दिल्ली में वायु की गुणवत्ता 'बहुत खराब' स्तर में पाई गई।

दिल्ली की कुल 171 बिल्डिंगों में लगने हैं एंटी-स्मॉग गन

हाल ही में आयोजित एक बैठक में चर्चा की गई कि दिल्ली नगर निगम (MCD) 149, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) 21 जबकि दिल्ली छावनी बोर्ड एक एंटी-स्मॉग गन लागएंगे। एक अधिकारी के अनुसार, एंटी-स्मॉग गन लगाने के लिए चिन्हित भवनों की कुल संख्या 171 है। दिल्ली परिवहन अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (DTIDC) सभी अंतर-राज्यीय बस टर्मिनलों (ISBT) पर एंटी-स्मॉग गन भी लगाएगा। एजेंसियों को एंटी-स्मॉग गन लगाने के संबंध में अनुपालन प्रमाणपत्र (Compliance Certificate) प्रस्तुत करना होगा।

सरकार जो कर रही है वह एक अस्थायी उपाय है। एंटी-स्मॉग गन वास्तव में आस-पास के क्षेत्र में पीएम10 के स्तर को कम करती हैं और समग्र प्रदूषण स्तर पर कोई प्रभाव नहीं डालती हैं। यह एक मरहम-पट्टी का उपाय है और सरकार प्रदूषण के स्रोत पर प्रहार करने के बजाय केवल लक्षणों का उपचार कर रही है।- विमलेंदु झा, पर्यावरणविद

एंटी-स्मॉग गन लगाने का यह है फॉर्म्युला

सरकारी आदेश के मुताबिक 10 हजार वर्ग मीटर से कम निर्मित क्षेत्रफल वाली संपत्तियों के लिए कम से कम तीन एंटी-स्मॉग गन लगाना अनिवार्य है जबकि 10,001 से 15 हजार वर्ग मीटर के बीच निर्मित क्षेत्रफल वाली इमारतों में कम से कम चार एंटी-स्मॉग गन लगानी होंगी, वहीं 15,001 से 20 हजार वर्ग मीटर के बीच निर्मित क्षेत्रफल वाली इमारतों में कम से कम पांच एंटी-स्मॉग गन लगानी होंगी।

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एंटी-स्मॉग गन प्रदूषण की समस्या पर मरहम-पट्टी, स्थायी समाधान नहीं: एक्सपर्ट

हालांकि, पर्यावरणविदों का कहना है कि एंटी-स्मॉग गन प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए एक अस्थायी उपाय की तरह है। पर्यावरणविद् विमलेंदु झा ने कहा, 'सरकार जो कर रही है वह एक अस्थायी उपाय है। एंटी-स्मॉग गन वास्तव में आस-पास के क्षेत्र में पीएम10 के स्तर को कम करती हैं और समग्र प्रदूषण स्तर पर कोई प्रभाव नहीं डालती हैं। यह एक मरहम-पट्टी का उपाय है और सरकार प्रदूषण के स्रोत पर प्रहार करने के बजाय केवल लक्षणों का उपचार कर रही है।' विमलेंदु झा के साथ सहमति जताते हुए पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी ने कहा कि पानी का छिड़काव कभी भी प्रदूषकों, विशेषकर पीएम 2.5 को कम करने का उपाय नहीं हो सकता।

दिल्ली की वायु गुणवत्ता फिर 'बहुत खराब'

दो दिनों तक मामूली सुधार के बाद बृहस्पतिवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता फिर खराब हो गई और यह 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गई तथा निकट भविष्य में उससे राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। वायु गुणवत्ता बिगड़ जाने का एक प्रमुख पराली जलाना बताया जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से जारी किये गये आंकड़े के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में अपराह्न चार बजे 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 311 दर्ज किया गया।

दिल्ली चौथा सबसे प्रदूषित शहर: सीपीसीबी

सीपीसीबी के अनुसार, दिल्ली सबसे प्रदूषित शहरों में चौथे स्थान पर है, जबकि रोहतक एक्यूआई 348 के साथ शीर्ष पर है । बोर्ड ने एक्यूआई के लिहाज से 254 शहरों की रैकिंग की है। बुधवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता में कुछ सुधार हुआ और समग्र एक्यूआई 202 रहा, क्योंकि अनुकूल वायु परिस्थितियों ने प्रदूषकों को छितराने में मदद की। सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 291 और सोमवार को 309 था। इस बीच, बृहस्पतिवार को पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक बना रहा।

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दिल्ली के 38 में से 32 स्टेशनों में एयर क्वॉलिटी बहुत खराब

सीपीसीबी के समीर ऐप के अनुसार, राजधानी के 38 निगरानी स्टेशनों में से 32 ने वायु गुणवत्ता को 'बहुत खराब' श्रेणी में बताया, क्योंकि उनकी रीडिंग 300 से ऊपर थी। इस बीच, वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान के लिए निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) ने अनुमान लगाया कि गुरुवार को दिल्ली के पीएम 2.5 के स्तर में पराली जलाने की हिस्सेदारी 21.5 प्रतिशत थी, जो शुक्रवार को बढ़कर 36.9 प्रतिशत और शनिवार को 32.4 प्रतिशत हो सकती है, जबकि बुधवार को यह केवल 1.2 प्रतिशत थी।

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