Bangladesh election: पिछले साल की उथल-पुथल के बाद आज बांग्लादेश में सियासी पारा चरम पर है। 2024 के छात्र आंदोलन ने 15 साल तक सत्ता में रहीं शेख हसीना की सरकार को हटा दिया था, और अब देश 13वें संसदीय चुनाव में नई दिशा चुनने जा रहा है। करीब 12.7 करोड़ मतदाता आज बांग्लादेश में नई सरकार के चुनाव के लिए वोट डालेंगे।
सुबह से सख्त सुरक्षा के बीच मतदान
मतदान सुबह 7:30 बजे शुरू हो चुका है और शाम 4:30 बजे तक चलेगा। कुल 299 संसदीय सीटों के लिए 42,766 मतदान केंद्रों पर वोटिंग हो रही है। नतीजे शुक्रवार तक आने की उम्मीद है।
यह मुकाबला मुख्य रूप से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले छात्र व इस्लामी समूहों के गठबंधन के बीच माना जा रहा है। कुल 51 राजनीतिक दल और करीब 2,000 उम्मीदवार मैदान में हैं।
BNP vs Alliance
BNP को बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन क्या उसे स्पष्ट बहुमत मिलेगा, यह साफ नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव तय करेगा कि 2024 का “Gen-Z” आंदोलन वोट में तब्दील होता है या फिर सत्ता पारंपरिक दलों के पास लौटती है।
आवामी लीग, जिसकी अध्यक्ष शेख हसीना हैं, फिलहाल निलंबित है और चुनाव नहीं लड़ रही। अगस्त 2024 में विरोध प्रदर्शनों के बाद हसीना देश छोड़कर चली गई थीं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार उस दौर में हुई हिंसा में करीब 1,400 लोगों की जान गई। बाद में एक ट्रिब्यूनल ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों में अनुपस्थित रहते हुए मौत की सजा सुनाई।
नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां
जो भी सरकार बनेगी, उसे ऊंची महंगाई और वैश्विक व्यापार संकट से जूझती अर्थव्यवस्था विरासत में मिलेगी। खासकर गारमेंट उद्योग, जो 80% से ज्यादा निर्यात का आधार है, दबाव में है। साथ ही राजनीतिक हिंसा, कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय पर हमलों को लेकर चिंता बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों है खास
नई दिल्ली इस चुनाव पर करीबी नजर रखे हुए है। अगस्त 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के रिश्तों में ठंडापन आ गया था। हाल के महीनों में भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के टूरिस्ट वीजा पर पाबंदियां लगाईं और सुरक्षा कारणों से अपने राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाया। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी का प्रभाव बढ़ता है, तो द्विपक्षीय संबंधों में अनिश्चितता और बढ़ सकती है।
इसी बीच खेल के मैदान से भी एक भावनात्मक पहलू जुड़ गया है। हाल ही में आईसीसी मेंस T20 वर्ल्ड कप से बांग्लादेश के बाहर होने के बाद दोनों देशों के बीच सोशल मीडिया पर बयानबाजी और माहौल में तल्खी देखने को मिली।
इतिहास की सबसे बड़ी सुरक्षा तैनाती
चुनाव आयोग ने करीब 10 लाख सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की है, जिनमें लगभग 1 लाख सेना के जवान शामिल हैं। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने मतदाताओं से शांतिपूर्ण और जिम्मेदारी से मतदान करने की अपील की है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किए जाएंगे। यह चुनाव 84 बिंदुओं वाले सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह के साथ हो रहा है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई है।
बांग्लादेश के लिए यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन के बाद स्थिरता की अग्नि परीक्षा है। जनता तय करेगी कि बदलाव की लहर जारी रहेगी या पुराना राजनीतिक ढांचा फिर मजबूत होगा। नतीजे आने के बाद देश की दिशा साफ हो जाएगी।