नीतीश सरकार का ऐलान, अब बिहार के हर गांव में बनेगी दुग्ध समिति, जानें कैसे बदलेगी पशुपालकों की किस्मत?

Bihar Dairy Policy: बिहार में डेयरी सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति और पंचायतों में बिक्री केंद्र खोलने की योजना से पशुपालकों, महिलाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

Priya Shandilya( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
पब्लिश्ड7 Feb 2026, 03:32 PM IST
अब बिहार के हर गांव में बनेगी दुग्ध समिति
अब बिहार के हर गांव में बनेगी दुग्ध समिति

बिहार सरकार ने ग्रामीण इलाकों में डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि राज्य के हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति बनाई जाएगी, ताकि पशुपालकों को दूध का सही दाम मिल सके और उनकी आमदनी बढ़े।

‘सात निश्चय-3’ के तहत बड़ा ऐलान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि ‘सात निश्चय-3’ के तीसरे निश्चय ‘कृषि में प्रगति-प्रदेश में समृद्धि’ के तहत राज्य के हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति बनाई जाएगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि पशुपालकों को उनके दूध का उचित मूल्य मिल सकेगा।

25 हजार से ज्यादा गांवों में समितियां तैयार

राज्य के कुल 39,073 गांवों में से 25,593 गांवों में दुग्ध उत्पादन समितियों का गठन हो चुका है। बाकी गांवों में अगले दो साल के भीतर समितियां बनाने का निर्देश पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे पशुपालकों की आमदनी बढ़ेगी और दूध की उपलब्धता भी सुधरेगी।

गांव की पंचायत में भी बिक्री केंद्र

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि ‘सात निश्चय-2’ के तहत सभी प्रखंडों में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र पहले ही खोले जा चुके हैं। अब ‘सात निश्चय-3’ के तहत सभी पंचायतों में भी सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र खोलने का फैसला लिया गया है।

2026-27 तक पूरा होगा लक्ष्य

राज्य की 8,053 पंचायतों में से फिलहाल 100 पंचायतों में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र खुल चुके हैं। शेष 7,953 पंचायतों में वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक केंद्र खोलने का निर्देश दिया गया है, ताकि हर पंचायत तक दूध और दुग्ध उत्पाद आसानी से पहुंच सकें।

महिला उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा

पंचायतों में खुलने वाले नए सुधा दुग्ध बिक्री केंद्रों को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़ी जीविका दीदियों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किया जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों में महिला उद्यमिता को नया सहारा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डेयरी व्यवसाय के विस्तार से गांवों में स्थानीय स्तर पर नए रोजगार पैदा होंगे। लोगों की आमदनी बढ़ेगी, दूध और दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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