बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुस्लिम महिला चिकित्सक का नकाब हटाने का मामला चौथे दिन भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र सौंपते समय हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विपक्षी दल इसे महिला की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बता रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ खेमे से बचाव की कोशिशें जारी हैं।
गिरिराज सिंह के बयान से विवाद और भड़का
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कोई गलत काम नहीं किया। सिंह ने विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कहा कि महिला चाहे तो नौकरी से इनकार करे या जहन्नुम में जाए। उन्होंने तर्क दिया कि सरकारी दस्तावेज लेते समय चेहरे की पहचान जरूरी होती है और भारत किसी धार्मिक कानून से नहीं बल्कि संविधान से चलता है। इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भारी नाराजगी पैदा कर दी।
विपक्ष का हमला, बिना शर्त माफी की मांग
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, कांग्रेस सांसद तारिक अनवर, एनसीपी (एसपी) की फौजिया खान और डीएमके सांसद कनिमोझि ने इस घटना को महिला अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया। विपक्षी नेताओं ने कहा कि किसी महिला को सार्वजनिक मंच पर जबरन नकाब हटाने का अधिकार किसी को नहीं है और मुख्यमंत्री को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
मानवाधिकार संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी जताई नाराजगी
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस कदम को महिला की गरिमा, स्वायत्तता और पहचान पर हमला बताया। मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने भी घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि पर्दा प्रथा से उनकी असहमति के बावजूद इस तरह का सार्वजनिक व्यवहार अस्वीकार्य है। पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी गिरिराज सिंह की टिप्पणी को बेहद आपत्तिजनक बताया।
सरकार के मंत्री मंगल पांडेय ने दी सफाई
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने दावा किया कि महिला डॉक्टर द्वारा नौकरी ठुकराने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है और एनडीए सरकार महिला सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, पश्चिम एशियाई देशों तक आलोचना पहुंचने और अंतरराष्ट्रीय छवि पर सवाल उठने के बाद यह विवाद नीतीश कुमार के लिए एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले चुका है।