इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी। चुनाव के समय फर्जी शैक्षणिक डिग्री पेश करने और एक पेट्रोल पंप हासिल करने में उस डिग्री का उपयोग करने के आरोपों को लेकर मौर्या के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई थी।
भाजपा नेता ने ही दायर की थी केशव मौर्या के खिलाफ याचिका
दिलचस्प बात है कि मौर्य के खिलाफ याचिका दायर करने वाले कोई और नहीं, उनकी पार्टी भाजपा के ही नेता दिवाकर नाथ त्रिपाठी हैं। प्रयागराज निवासी दिवाकर नाथ एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने कहा, 'शिकायतकर्ता ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जिन्हें केशव प्रसाद मौर्य से धोखा मिला हो। इसलिए सीआरपीसी की धारा 39 के मद्देनजर धारा 156(3) के तहत कथित धोखाधड़ी के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश मांगने का उनका कोई आधार नहीं है।'
हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता को ही लगाई फटकार
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में याचिकाकर्ता को ही फटकार लगाई है। अदालत ने कहा, 'आपराधिक न्याय प्रणाली के पहियों को तुच्छ शिकायतों से अवरुद्ध होने की अनुमति नहीं दी जा सकती जहां शिकायतकर्ता स्वयं किसी भी तरह से पीड़ित ना हो। यह मुकदमा प्रथम दृष्टया कुछ लाभ हासिल करने या हिसाब बराबर करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से शुरू किया गया प्रतीत होता है।' पहले अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने के अनुरोध के साथ दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 156(3) के तहत दायर अर्जी खारिज कर दी थी जिसके बाद त्रिपाठी ने उच्च न्यायालय का रुख किया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाई कोर्ट ने की थी सुनवाई
हालांकि, फरवरी 2024 में अदालत ने याचिका दायर करने में विलंब के आधार पर उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी थी। इसका आधार यह था कि त्रिपाठी ने निचली अदालत के आदेश के 300 से अधिक दिनों बाद यह याचिका दायर की थी। इस वर्ष जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इस विलंब को माफ करते हुए हाई कोर्ट को इस मामले में गुण-दोष के आधार पर विचार करने का निर्देश दिया था। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद त्रिपाठी ने फिर से उच्च न्यायालय में इन्हीं आरोपों के आधार पर नए सिरे से याचिका दायर की थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 23 मई को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।