
Vijay Kumar Malhotra Passed Away: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली बीजेपी के पहले अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा का 94 की उम्र में निधन हो गया है। दिल्ली के एम्स अस्पताल में वे लंबे समय से भर्ती थे। सुबह 6 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई। उनका निधन भारतीय राजनीति और दिल्ली बीजेपी के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है। कल ही देश के प्रधानमंत् नरेंद्र मोदी ने प्रो. मल्होत्रा का जिक्र किया था, जो उनके राजनीतिक योगदान और समाज सेवा को सम्मान देने जैसा था।
वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अत्यंत दुख के साथ यह बताना पड़ रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली भाजपा के प्रथम अध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा का आज सुबह आकस्मिक निधन हो गया है। वह 94 वर्ष के थे। प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा का जीवन सादगी एवं जनसेवा को समर्पण की मिसाल रहा, उन्होने दिल्ली में संघ की विचारधारा के विस्तार के लिए जनसंघ काल से बहुत काम किया। उनका जीवन हम सभी भाजपा कार्यकर्ताओं को सदैव प्रेरणा देता रहा है और देता रहेगा।
विजय कुमार मल्होत्रा का जन्म 3 दिसंबर 1931 को लाहौर, पंजाब (अब पाकिस्तान) में हुआ। वह कविराज खजान चंद के सात बच्चों में चौथे थे। मल्होत्रा भारतीय राजनीति और खेल प्रशासन में अपनी छवि के लिए जाने जाते थे। उन्होंने दिल्ली प्रदेश जनता संघ का अध्यक्ष (1972-1975) और 2 बार दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष (1977-1980, 1980-1984) के रूप में काम किया। उनके सक्रिय योगदान के कारण बीजेपी दिल्ली में मजबूती से स्थापित रही।
मल्होत्रा का सक्रिय राजनीति में एक लंबा सफर रहा। उन्हें केदारनाथ साहनी और मदनलाल खुराना के साथ कई साल तक दिल्ली में भाजपा को बचाए रखने का श्रेय दिया जाता है। उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक जीत 1999 के लोकसभा चुनाव में दक्षिण दिल्ली सीट से देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारी अंतर से हराना माना जाता है।
मल्होत्रा पिछले 45 सालों में दिल्ली से 5 बार सांसद और 2 बार विधायक रहे। वर्ष 2004 के आम चुनाव में, मल्होत्रा दिल्ली में अपनी सीट जीतने वाले एकमात्र भाजपा उम्मीदवार थे। अपने पूरे करियर में मल्होत्रा एक बेदाग और स्वच्छ छवि वाले नेता रहे। मल्होत्रा ने हिंदी साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। वह राजनीति और सामाजिक कामों के अलावा दिल्ली में शतरंज और तीरंदाजी क्लबों के प्रशासन में भी शामिल रहे। राजनीति, शिक्षा और खेल के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी याद किया जाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
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