
झारखंड में इस वर्ष होने वाले राज्यसभा के दो सीटों के द्विवार्षिक चुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इन दोनों सीटों में से एक सीट दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पिछले वर्ष चार अगस्त को निधन के बाद से रिक्त है, जबकि दूसरी सीट भाजपा नेता दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हो जाएगी। ऐसे में सत्ताधारी दलों और विपक्ष-दोनों की निगाहें इन सीटों पर टिकी हुई हैं।
राज्य की सबसे बड़ी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के भीतर इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि पार्टी की ओर से दिशोम गुरु शिबू सोरेन की बेटी अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजा जाए। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता से लेकर जिला स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं तक का मानना है कि सोरेन परिवार का संसद में प्रतिनिधित्व करना जेएमएम के लिए सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का विषय रहा है। शिबू सोरेन के निधन के बाद यह पहली बार है जब परिवार का कोई भी सदस्य लोकसभा या राज्यसभा में नहीं है।
अंजनी सोरेन, शिबू सोरेन और रूपी सोरेन की पुत्री हैं। विवाह के बाद से वे ओडिशा के मयूरभंज क्षेत्र में रहकर जेएमएम के संगठन को मजबूत करने में जुटी रही हैं। उन्होंने आदिवासी समाज के मुद्दों को लगातार उठाया है और पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम किया है। झामुमो ने उन्हें 2019 और 2024 में ओडिशा विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उम्मीदवार बनाया था। हालांकि वे चुनाव जीत नहीं पाईं, लेकिन उन्हें उल्लेखनीय वोट मिले।
जेएमएम के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि अंजनी सोरेन सिर्फ गुरुजी की बेटी नहीं, बल्कि संघर्ष और विचारधारा की प्रतिनिधि हैं। यदि उन्हें राज्यसभा भेजा जाता है, तो इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा और ओडिशा में जेएमएम संगठन को भी मजबूती मिलेगी। जेएमएम के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भी अंजनी सोरेन के नाम का समर्थन करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में ओडिशा जेएमएम का संगठन लगातार मजबूत हुआ है।
वहीं, केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने आज कहा कि लंबे समय से संसद में सोरेन परिवार का कोई सदस्य नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि अंजनी सोरेन राज्यसभा के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं, हालांकि अंतिम फैसला पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेना है। विधानसभा गणित की बात करें तो 81 सदस्यीय विधानसभा में जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के चार तथा सीपीआई माले के दो विधायक महागठबंधन के हिस्सा हैं।
ऐसे में राज्यसभा सदस्य के उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के वोट से जीत दिलाने के लिए जरूरी 27 से अधिक की संख्या बल इसके पास है। सवाल उठता है कि जेएमएम अकेले दोनों सीटों के लिए उम्मीदवार उतारेगा या एक सीट कांग्रेस से शेयर करेगा। आरजेडी या सीपीआई माले के हिस्से कोई सीट आने की कोई संभावना नहीं है। संख्या बल के आधार पर इस बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को झारखंड से राज्यसभा की सीट मिलना मुश्किल है। इसी वजह से जेएमएम के भीतर उम्मीदवार को लेकर मंथन तेज हो गया है।
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