
BMC Election 2026: महाराष्ट्र में 29 महानगर पालिकाओं के लिए चुनाव हो रहे हैं। इसके लिए राज्य में 15 जनवरी 2025 को वोट डाले जाएंगे। इससे पहले महाराष्ट्र में सियासी घमासान मचा हुआ है। सभी राजनीतिक दल महाराष्ट्र में मुंबई महानगर पालिका यानी BMC की सत्ता के लिए जोर लगा रहे हैं। कभी BMC पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना का कब्जा हुआ करता था। ठाकरे खानदान ने करीब 20 साल तक BMC की सत्ता संभाली है। अब ठाकरे ब्रदर्स और BJP-शिंदे की शिवसेना आमने -सामने हैं। बीएमसी चुनाव पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएमसी का सालाना बजट 74,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह बजट किसी भी राज्य की 28 अन्य महानगरपालिकाओं के कुल बजट से भी ज्यादा है। बीएमसी के पास मेडिकल कॉलेज, सरकारी अस्पताल, पानी की व्यवस्था, फायर ब्रिगेड, झील और कई ऐसी व्यवस्थाएं है, जो कि देश में किसी भी महानगरपालिका के पास नहीं हैं। 2026 के BMC चुनावों में मुंबई को चलाने वाली नगर पालिका की 227 सीटें है। यह भारत के सबसे बड़े शहरों में से एक है।
बीएमसी की तिजोरी में करीब 80,000 करोड़ रुपये का फिक्स डिपॉजिट है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पर्याप्त बजट होने से काम के लिए बजट मिलने में मुश्किल नहीं होती है, जिससे प्रतिनिधि क्षेत्र की अपेक्षाओं को पूरा कर सकते हैं।
बीएमसी के पास तगड़ा बजट होने की वजह से हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट बीएमसी खुद पूरा करती है। इसके लिए उसे किसी से फंड की जरूरत नहीं पड़ती है। वहीं अन्य महानगर पालिकाएं ऐसे काम के लिए राज्य सरकार या केंद्र सरकार का मुंह देखती है। यही वजह है कि कोस्टल रोड, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसे हजारों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को बीएमसी आसानी से पूरा कर लेती है।
बीएमसी की कमाई का एक बड़ा हिस्सा बिल्डरों के प्रीमियम से होती है। इसके बाद प्रॉपर्टी टैक्स, जीएसटी लागू होने से होने वाली टैक्स की भरपाई भी आय का बड़ा स्रोत है। प्रॉपर्टी टैक्स को मराठी में "घर पट्टी" कहते हैं। हालांकि, पिछले कुछ सालों से बीएमसी के बढ़ते खर्च की वजह से कमाई के नए साधन खोजने में जुट गई है। इतनी ज्यादा कमाई को देखते हुए बीएमसी को देश की मलाईदार महानगर पालिका के नाम से भी पुकारा जाता है।
इस वक्त हर तरह BMC के बजट की चर्चा है। बता दें, इसका सालाना बजट कुल 74,427 करोड़ है, जोकि एशिया का सबसे बड़ा बजट है। बीएमसी के बजट की एक खास बात यह भी है कि यह न केवल भारत के अन्य राज्यों बल्कि दुनियाभर के लगभग 50 से ज्यादा देशों की जीडीपी के बजट से अधिक है।
अरुणाचल प्रदेश सरकार की ओर से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 39,842.23 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया है, जोकि पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। इस बजट के तहत जनता के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण पर ज्यादा जोर दिया गया है। यह बीएमसी के मुकाबले इस राज्य का बजट कम है।
साल 2025-26 के लिए त्रिपुरा का बजट लगभग 32,423.44 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इस बजट के तहत कुल 7,903 करोड़ रुपये रोजगार के लिए और 1,885 करोड़ रुपये कृषि के लिए निर्धारित किया गया है। यह भी बीएमसी के सामने कम है।
बात अगर मणिपुर के बजट की जाए तो इसका बजट भी बीएमसी के बजट की तुलना में छोटा है। मणिपुर का बजट लगभग 35,103.90 करोड़ रुपये है। इसमें 500 करोड़ रुपये आकस्मिक निधि और 400 करोड़ रुपये राहत शिविरों के लिए निर्धारित किया गया है।
लद्दाख का बजट भी बीएमसी के बजट के आगे छोटा है। बता दें, साल 2025-26 के लिए लद्दाख का बजट लगभग 4,692 रुपये पेश किया गया है। इसके साथ ही लद्दाख का बजट पिछले साल 2024-25 की तुलना में 1266 करोड़ रुपये कम है।
1. मुंबई महानगर पालिका का बजट 74 हजार करोड़ रुपये हैं।
2. पुणे की पिंपरी-चिंचवड महानगर पालिका का बजट 9.5 हजार करोड़ रुपये हैं।
3. नवी मुंबई महानगर पालिका का बजट 5.7 हजार करोड़ रुपये हैं।
4. मीरा-भाईदर महानगर पालिका का बजट 2.7 हजार करोड़ रुपये है।
5. ठाणे महानगर पालिका का बजट 5.6 हजार करोड़ रुपये है। यह पूर्व सीएम एकनाथ शिंदे का गृह जिला है।
6. कल्याण-डोबिवली महानगर पालिका का बजट 3.3 हजार करोड़ रुपये है।
7. उल्हासनगर महानगर पालिका का बजट 1 हजार करोड़ रुपये है।
8. भिवंडी महानगर पालिका का बजट 1.1 हजार करोड़ रुपये है।
9. पनवेल महानगर पालिका का बजट 4 हजार करोड़ रुपये है।
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