
BMC Election 2026: देशभर की निगाहें मुंबई महानगर पालिका (BMC) पर टिकी हुई हैं। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के चुनाव का मतदान 15 जनवरी को होगा। 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे। यह देश की सबसे बड़ी महानगर पालिका है। इसके बजट के सामने कई छोटे राज्य बौने साबित हो रहे हैं। बीएमएसी में 227 सदस्य हैं। बीएमसी का रण जीतने के लिए सभी राजनीतिक दल एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं। इसके लिए कई राजनीतिक दलों ने गठबंधन भी किया है। वहीं 20 साल से अलग चल रहे ठाकरे ब्रदर्स भी बीएमसी चुनाव में एकसाथ मैदान में उतर चुके हैं।
मुख्य रूप से मुकाबला महायुति (भाजपा+शिंदे सेना) और महाविकास अघाड़ी के बिखरे हुए दलों के बीच है। पिछले तीन चुनाव से 227 में 75 से 85 तक सीटें जीतने वाली शिव सेना का बीएमएसी में दबदबा रहा है और वही सत्ता पर काबिज रही है। लेकिन इस बार हालात थोड़े अलग हैं।
भारतीय जनता पार्टी एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी ने बीएमसी में 137 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना 90 सीटों पर ताल ठोंक रही है। अजित पवार की NCP (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) महायुति से अलग चुनाव लड़ रही है। अजित पवार की पार्टी ने 94 सीटों पर कैंडिडेट उतारे हैं। इसमें पवार ने 52 सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतार कर बड़ा दांव खेला है।
उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट नवनिर्माण सेना से हाथ मिलाया है। उद्धव और राज चचेरे भाई हैं। पिछले 20 साल से दोनों अलग थे। इस बार बीएमसी चुनाव में दोनों एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार के चुनाव में शिवसेना यूबीटी सबसे अधिक 163 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 53 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) की पार्टी में बीएमसी चुनावी मैदान में कूद गई है। पार्टी सिर्फ 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
कांग्रेस ने किसी से भी गठबंधन नहीं किया है। पार्टी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है। 167 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं।
वंचित बहुजन आघाडी (VBA) ने 46 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
BMC का पिछला चुनाव 2017 में हुआ था। इसमें 227 में 84 सीटों पर शिवसेना ने जीत दर्ज की थी। वहीं बीजेपी ने 82, कांग्रेस ने 31, एनसीपी ने नौ, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने सात और अन्य ने 14 सीटों पर कब्जा जमाया था। इसी तरह से 2012 के चुनाव में 75 सीटों पर शिवसेना ने जीत दर्ज की थी। वहीं बीजेपी ने 31, कांग्रेस ने 52, एनसीपी ने 13, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने 28 जबकि अन्य ने 28 सीटों पर कब्जा जमाया था। वहीं 2012 के चुनाव में शिवसेना ने 84 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी ने 28, कांग्रेस ने 71, एनसीपी ने 14, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने सात और अन्य ने 23 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
अब मुद्दे की बात यह है कि साल 2017 और 2026 के बीच स्थितियों में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है। इन सालों में शिव सेना का बंटवारा हो चुका है। शिवसेना ने जब 2017 का चुनाव लड़ा था, तो वह महाराष्ट्र की बड़ी पार्टी थी। ऊपर से बीजेपी भी उसके साथ थी। लेकिन नवंबर 2019 में बीजेपी के साथ उसका 35 साल पुराना गठबंधन टूट गया। बाद में शिव सेना ने एनसीपी और कांग्रेस से हाथ मिला लिया था। कहा जाता है कि इसी बात से नाराज होकर उद्धव ठाकरे की सरकार में मंत्री रहे एकनाथ शिंदे ने अपनी अलग राह पकड़ ली और शिवसेना को तोड़ दिया। बाद में कोर्ट के फैसले से शिवसेना पर शिंदे गुट का ही कब्जा हो गया।
इस बीएमसी चुनाव से पहले केवल शिवसेना नहीं टूटी है, राज्य की एक और बड़ी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी दो टुकड़ों में बंट चुकी है। इसमें से एक धड़े का नेतृत्व पार्टी के संस्थापक शरद पवार कर रहे हैं तो दूसरे का नेतृत्व उनके भतीजे और राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार कर रहे हैं।
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