अब मोबाइल पर दिखेगा कॉल करने वाले का असली नाम, TRAI और DoT का फैसला

अब अज्ञात नंबर से कॉल आने पर आपके मोबाइल स्क्रीन पर कॉलर के नंबर के साथ ही उसका नाम भी दिखेगा। वो भी बिना किसी ऐप यूज किए। टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI (ट्राई) और DOT (दूरसंचार विभाग) ने मोबाइल कॉल से होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए यह कदम उठाया है।

Jitendra Singh
अपडेटेड29 Oct 2025, 10:13 AM IST
इस फीचर का फायदा शुरुआती दौर में सिर्फ 4G और 5G यूज़र्स को ही मिलेगा।
इस फीचर का फायदा शुरुआती दौर में सिर्फ 4G और 5G यूज़र्स को ही मिलेगा। (Livemint)

अनजान नंबर से फोन आने पर बहुत से लोग परेशान हो जाते हैं। कभी-कभी लोगों को समझ में नहीं आता है कि कॉल रिसीव करें या नहीं। लेकिन अब यूजर्स की समस्या का जल्द ही समाधआन होने वाला है। अब मोबाइल की घंटी बजने पर फोन नंबर तो दिखाई देगा ही, इसके साथ ही फोन करने वाले का नाम भी दिखाई देगा। यह फीचर एक हफ्ते के भीतर शउरु हो जाएगा। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (TRAI) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (Department of Telecommunications- DoT) ने यह फैसला किया है। यह सुविधा सबके लिए डिफॉल्ट रहेगी।

ऐसा होने पर स्कैम और स्पैम कॉल आप पहले ही पहचान सकेंगे। इस फैसले का मकसद धोखाधड़ी रोकना और डिजिटल सुरक्षा बढ़ाना है। यह सर्विस शुरुआती दौर में 4G और उससे नई तकनीक वाले नेटवर्क पर शुरू होगी। इससे लोगों को फर्जी कॉल से बचाने में मदद मिलेगी। 2G और 3G पर बैंडविड्थ कम होने से तकनीकी दिक्कत है। इसलिए इन नेटवर्क का इस्तेमाल करने वालों को कॉलर का असली नाम नहीं नजर आएगा।

60 दिन तक चलेगा पायलट

मनीकंट्रोल में छपी खबर के मुताबिक, DoT ने टेलीकॉम रेगुलेटर को अलग से बताया है कि ऑपरेटर्स ने 4G और नए नेटवर्क के लिए कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सर्विस के ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। ऐसे में इसे फौरन रोलआउट करने का रास्ता साफ हो गया है। मनीकंट्रोल ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सरकार ने ऑपरेटर्स को पायलट शुरू करने के लिए सात दिन का समय दिया है, जो लगभग 60 दिनों तक चलेगा। इसके सफल रहने के बाद पूरे देश में ये सर्विस लागू होगी। कंपनियों को हर हफ्ते इसकी रिपोर्ट सरकार को देनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर सरकार इसमें आने वाली दिक्कतों को दूर करेगी।

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हालांकि, पहले ट्राई ने सुझाव दिया था कि यह सेवा सिर्फ मांगने पर चालू होनी चाहिए। लेकिन DoT इस बात से सहमत नहीं था। इसके बाद दोनों की एकराय बनी और फैसला लिया गया। यह नाम वही होगा जो यूजर ने मोबाइल नंबर कनेक्शन लेते समय आईडी प्रूफ में दिया होगा। यह डिफाल्ट सुविधा होगी। अगर कोई यूजर यह सुविधा नहीं चाहता, तो वह इसे डिएक्टिवेट भी करा सकेगा। इस सर्विस के लिए टेलीकॉम कंपनियों ने मुंबई और हरियाणा सर्किल में पिछले साल ट्रायल किया था।

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फ्रॉड कॉल रोकने के लिए बदलाव

यह कदम देशभर में धोखाधड़ी वाली कॉल्स और साइबर अपराधों जैसे डिजिटल अरेस्ट और वित्तीय घोटालों को रोकने के लिए उठाया गया है। इससे उपभोक्ता को पता होगा कि उसे कौन कॉल कर रहा है, जिससे वह फर्जी कॉल्स को पहचानने में सक्षम होगा।

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