
केंद्र सरकार ने मंगलवार को प्रशांत सीताराम लोखंडे को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे राहुल सिंह की जगह लेंगे, जिन्हें उसी दिन सरकार ने पद से हटा दिया था।
लोखंडे की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब सरकार ने CBSE अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है। साथ ही, बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से जुड़ी सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच समिति भी गठित की गई है।
यह कदम उस विवाद के बाद उठाया गया, जिसमें 12वीं कक्षा के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया था कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपियां उनकी लिखावट से मेल नहीं खातीं। इससे डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए थे।
प्रशांत लोखंडे वर्ष 2001 बैच के IAS अधिकारी हैं। वे AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर से संबंध रखते हैं। इससे पहले वे गृह मंत्रालय के गृह विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत थे। मार्च 2026 में भारत सरकार ने उन्हें उसी विभाग में अतिरिक्त सचिव (Additional Secretary) के पद पर पदोन्नत किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी है।
पूर्व CBSE अध्यक्ष राहुल सिंह को अब कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया है।
वहीं, CBSE सचिव हिमांशु गुप्ता (2012 बैच IAS अधिकारी) को प्रशासनिक कारणों से उनके मूल कैडर यानी गृह मंत्रालय में वापस भेज दिया गया है।
सरकार ने वरुण भारद्वाज, जो 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा (IIS) अधिकारी हैं और वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय में निदेशक हैं, को नया CBSE सचिव नियुक्त किया है।
विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ 12वीं के छात्रों ने आरोप लगाया कि CBSE पोर्टल पर दिखाई गई उनकी उत्तर पुस्तिकाएं उनकी असली कॉपियां नहीं लग रही थीं। इसके अलावा बोर्ड को निम्नलिखित मुद्दों पर भी आलोचना का सामना करना पड़ा:
12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुति दी और OSM प्रणाली से जुड़े टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि:
सार्थक का आरोप है कि इन बदलावों से एक विशेष सेवा प्रदाता कंपनी को फायदा पहुंचा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि OSM प्रणाली को पूरे देश में लागू करने से पहले बड़े स्तर पर परीक्षण किया जाना चाहिए।
सार्थक सिद्धांत ने कहा कि OSM प्रणाली का ठेका पाने वाली COEMPT कंपनी पहले Globarena नाम से जानी जाती थी और उसका अतीत विवादों से जुड़ा रहा है। उनका आरोप है कि:
सार्थक ने दावा किया कि इन बदलावों से यह संकेत मिलता है कि बड़ी कंपनियों की बजाय COEMPT को प्राथमिकता दी गई। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक जांच चल रही है और सरकार ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है।
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