चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बधाई देते हुए भारत-चीन रिश्तों को लेकर एक सकारात्मक संदेश दिया है। उन्होंने भारत और चीन को “अच्छे पड़ोसी, दोस्त और साझेदार” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के लिए “ड्रैगन और हाथी का एक साथ नृत्य” करना ही सही और व्यावहारिक रास्ता है। शी चिनफिंग का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बीते कुछ महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ धीरे-धीरे पिघलती नजर आ रही है और कूटनीतिक स्तर पर संवाद फिर से तेज हुआ है। आइए जानते हैं पूरी खबर के बारे में विस्तार से।
लगातार बेहतर हो रहे रिश्ते
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, शी चिनफिंग ने अपने संदेश में कहा कि भारत-चीन संबंध दोनों देशों और उनके लोगों के मूलभूत हितों के अनुरूप हैं और ये रिश्ते लगातार बेहतर और विकसित हो रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एशिया की दो बड़ी ताकतों के बीच सहयोग न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है, बल्कि वैश्विक शांति और समृद्धि को बनाए रखने में भी इसकी अहम भूमिका है। चीन लंबे समय से यह मानता रहा है कि अच्छे पड़ोसी और साझेदार बनकर एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करना ही दोनों देशों के लिए सबसे सही विकल्प है।
प्रधानमंत्री ली किंग ने दी बधाई
शी चिनफिंग ने उम्मीद जताई कि भारत और चीन उस साझा समझ पर कायम रहेंगे, जिसमें दोनों को “सहयोग और विकास के अवसरों के साझेदार” माना गया है। उन्होंने रणनीतिक संवाद को मजबूत करने, आपसी आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ाने तथा एक-दूसरे की चिंताओं को संवेदनशीलता के साथ सुलझाने की जरूरत पर भी जोर दिया। शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इसी क्रम में चीनी प्रधानमंत्री ली किंग ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गणतंत्र दिवस की बधाई दी, जिसे बीजिंग की ओर से रिश्तों को सामान्य दिशा में आगे बढ़ाने का संकेत माना जा रहा है।
2020 से चला आ रहा सैन्य गतिरोध
गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में 2020 से चले आ रहे सैन्य गतिरोध के बाद भारत-चीन रिश्तों में खटास आ गई थी। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हाल के शिखर सम्मेलनों के बाद हालात में सुधार देखने को मिला है। इसके बाद पिछले कुछ महीनों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चार साल से अधिक समय तक चले तनाव को खत्म करने के बाद रिश्तों को सामान्य करने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। ऐसे में शी चिनफिंग का यह बयान भारत-चीन संबंधों के नए अध्याय की ओर इशारा करता नजर आ रहा है।