Health news: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बीमारियां भी बदल रही हैं। पहले जो दिक्कतें सिर्फ बुजुर्गों या बड़े शहरों के लोगों तक सीमित थीं, अब वो छोटे शहरों और युवाओं तक पहुंच रही हैं। ऐसी ही एक बीमारी है गंभीर गुर्दा रोग यानी क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD), जो अब देश में एक बड़ी स्वास्थ्य चिंता बनती जा रही है।
लाइफस्टाइल है बीमारी का कारण
एक प्रख्यात गुर्दा रोग विशेषज्ञ ने बताया कि CKD का सबसे बड़ा कारण है हमारी बदलती जीवनशैली जैसे मधुमेह (डायबिटीज) और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर)। इसके अलावा पर्यावरणीय और व्यावसायिक कारण भी इस बीमारी को और जटिल बना रहे हैं।
अब सिर्फ बुजुर्ग नहीं, हर वर्ग हो रहा है प्रभावित
डॉ. एच. सुदर्शन बल्लाल ने कहा कि अब गुर्दे की बीमारी सिर्फ बुजुर्गों या अमीर तबके तक सीमित नहीं रही। ये हर वर्ग और उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ये बीमारी महामारी का रूप ले सकती है।
इलाज की सुविधा बढ़ी है, लेकिन जरूरत से कम
डॉ. बल्लाल ने बताया कि जब वो 1991 में अमेरिका से भारत लौटे थे, तब पूरे देश में सिर्फ 800 नेफ्रोलॉजिस्ट (गुर्दा रोग विशेषज्ञ) थे। उस समय अमेरिका में भारत से ज्यादा भारतीय विशेषज्ञ काम कर रहे थे। अब तीन दशक बाद हालात बेहतर हुए हैं, देशभर में हजारों विशेषज्ञ और आधुनिक इलाज की सुविधाएं मौजूद हैं।
आंकड़े बताते हैं कितनी बड़ी है ये चुनौती
बल्लाल ने कहा, "स्थिति 30 साल पहले की तुलना में कम गंभीर है। लेकिन हम अब भी उन सभी रोगियों का इलाज नहीं कर पाए हैं जिन्हें उपचार की आवश्यकता है। गुर्दे की बीमारी बहुत आम है। हर साल, लगभग दो लाख लोग गंभीर गुर्दा रोग का शिकार होते हैं, और दस गुना अधिक लोग हल्के गुर्दा रोग से पीड़ित हैं। दुर्भाग्य से, उनमें से 25 प्रतिशत से भी कम लोगों को किसी प्रकार का उपचार मिल पाता है।”
सिर्फ इलाज नहीं, रोकथाम भी जरूरी
गुर्दे की बीमारी धीरे-धीरे एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सिर्फ इलाज की सुविधा बढ़ाना काफी नहीं है, लोगों को रोकथाम, नियमित जांच और जागरूकता की भी जरूरत है। वरना ये बीमारी आने वाले समय में देश की सेहत पर भारी पड़ सकती है।