
उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसा काम किया है कि भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत गदगद हो गए। उन्होंने कहा कि वो जिस राज्य में जाएंगे, यूपी का उदाहरण देंगे। इतना ही नहीं, सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें दूसरे राज्यों में यूपी का उदाहरण देने में गर्व महसूस होगा। सवाल है कि आखिर यूपी योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऐसा क्या कर दिया?
दरअसल, सीजेआई सूर्यकांत शनिवार को उत्तर प्रदेश के चंदौली गए थे। उन्होंने वहां में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस एवं औरैया जिलों के एकीकृत न्यायालय परिसरों (Intergrated Court Complexes यानी ICC) का भूमि पूजन किया। सीजेआई सूर्यकांत ने शिलान्यास करने से पहले अपने संबोधन में कहा, 'एक बार जब ये (आईसीसी) बन जाएंगे, तो मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश पूरे भारत के लिए एक उदाहरण स्थापित करेगा। ये परिसर पूरे देश के लिए एक मानक बनेंगे।'
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, 'मैं जिस भी राज्य में जाऊंगा, गर्व और खुशी के साथ उत्तर प्रदेश का उदाहरण दूंगा। मैं संबंधित राज्य सरकार और उच्च न्यायालय से आह्वान एवं अपील करूंगा कि उस राज्य में भी यही सुविधा प्रदान की जाए।' आखिर यूपी सरकार की इन इंटिग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स (आईसीसी) में ऐसी क्या सुविधाएं मिलेंगी जो सीजेआई पूरे देश के लोगों के मुहैया करवाना चाहते है? आइए समझते हैं कि आखिर ये एकीकृत न्यायालय परिसर हैं क्या?
एकीकृत न्यायालय परिसर ऐसे आधुनिक न्यायिक परिसर हैं, जहां एक ही छत के नीचे विभिन्न स्तर की अदालतें- जिला अदालतें, दीवानी, फौजदारी, परिवार न्यायालय आदि मौजूद होती हैं। ये परिसर न्याय व्यवस्था को एकीकृत, कुशल और सुविधाजनक बनाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, जिसमें अदालत कक्षों के अलावा अधिवक्ताओं के चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास, जनपद न्यायाधीश का आवासीय भवन और अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल होती हैं।
उत्तर प्रदेश में ये परिसर विशेष रूप से उन जिलों में विकसित किए जा रहे हैं जहां पहले अस्थायी या अपर्याप्त संरचनाएं थीं। अब नए परिसरों से लोगों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी। साथ ही, सबके लिए न्याय पाना आसान होगा। उदाहरण के तौर पर चंदौली के परिसर में 37 अदालत कक्ष और अन्य सुविधाओं पर लगभग 236 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है, जो अप्रैल 2027 तक पूर्ण होने की उम्मीद है।
प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने इनकी इतनी तारीफ की क्योंकि वे इन्हें पूरे देश के लिए एक आदर्श मानते हैं, जो न्याय व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएंगे। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में कहा गया है- प्रजा सुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्। अर्थात, प्रजा के सुख में राजा का सुख है, और प्रजा के हित में राजा का हित। शासन की सफलता जनकल्याण पर निर्भर है, और न्याय जैसी बुनियादी सुविधा इसमें केंद्रीय भूमिका निभाती है।
इन एकीकृत न्यायालय परिसरों की खासियतें ऐसी हैं जो उन्हें राष्ट्रीय मानक बनाने योग्य बनाती हैं। सबसे पहले, सभी न्यायिक कार्य एक ही स्थान पर केंद्रित होने से समय और संसाधनों की बचत होगी, जो न्याय में मिलने वाली देरी की समस्या का समाधान करती है। दूसरा, आधुनिक सुविधाएं जैसे डिजिटल कोर्ट रूम, सुरक्षा व्यवस्था और आवासीय इकाइयां न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं की दक्षता बढ़ाती हैं। तीसरा, ये परिसर उन जिलों में बनाए जा रहे हैं जहां पहले अस्थायी संरचनाएं थीं, जैसे कि महोबा या हाथरस में, जहां 37 अदालतों वाला विशाल परिसर 51 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला होगा।
सीजेआई सूर्यकांत का मानना है कि उत्तर प्रदेश की यह पहल अन्य राज्यों को प्रेरित करेगी, क्योंकि यह परिसर पुरानी, बिखरी हुई न्यायिक संरचनाओं को बदलकर एक इंटिग्रेटेड मॉडल पेश करेंगे, जो न्याय की गति और गुणवत्ता को बढ़ाएंगे। वे इसे गर्व से अन्य राज्यों में उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने की बात कहते हैं, क्योंकि यह न्याय की सार्वभौमिक पहुंच को मजबूत करती है।
कुल मिलाकर, लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ये परिसर न्याय को जनकेंद्रित बनाते हैं, जो महात्मा गांधी के 'सर्वोदय' सिद्धांत से प्रेरित है, जहां सबका उदय न्याय की समानता से होता है। सामाजिक उन्नति तभी संभव है जब सबसे कमजोर वर्ग को न्याय मिले। सीजेआई सूर्यकांत इसीलिए कह रहे हैं कि उन्हें दूसरे राज्यों को यूपी का उदाहरण देकर गर्व होगा।
बहरहाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिलान्यास समारोह में सीजेआई सूर्यकांत को गुलदस्ता और स्मृति चिह्न भेंट कर उनका सम्मान किया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने सीजेआई को प्रतीक चिह्न देकर उनका स्वागत किया। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति पंकज मित्तल समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
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