
Goa Startup Zimbabwe: गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के ‘डिजिटल गोवा’ और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने वाले विजन को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिल रही है। अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे ने अपने स्कूलों में गोवा के रोबोटिक्स और स्टेम (STEM) आधारित शिक्षा मॉडल को लागू करने का निर्णय लिया है। यह कदम न केवल गोवा के शैक्षिक प्रयासों की वैश्विक स्वीकृति को दर्शाता है, बल्कि भारत की नवाचार क्षमता को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती प्रदान करता है।
जिम्बाब्वे की कैबिनेट ने गोवा स्थित स्टार्टअप क्यूरियस माइंड इन्फोटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस पहल के तहत जिम्बाब्वे के स्कूलों में ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स’ (ToT) कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से गोवा के अनुभवी मास्टर ट्रेनर्स स्थानीय शिक्षकों को रोबोटिक्स, कोडिंग और आधुनिक तकनीकी शिक्षा के विभिन्न पहलुओं में प्रशिक्षित करेंगे। इससे जिम्बाब्वे के शिक्षकों की क्षमता में वृद्धि होगी और वे छात्रों को बेहतर तरीके से तकनीकी शिक्षा प्रदान कर सकेंगे।
इस परियोजना के अंतर्गत गोवा के स्टार्टअप द्वारा विकसित रोबोटिक्स किट का जिम्बाब्वे के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्रालय द्वारा व्यापक परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान यह किट अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी और इसे छात्रों के लिए उपयोगी एवं प्रभावी पाया गया। इसके आधार पर इसे स्कूलों में लागू करने की सिफारिश की गई है। यह उपलब्धि गोवा के स्टार्टअप इकोसिस्टम की गुणवत्ता और नवाचार क्षमता को दर्शाती है।इसके अतिरिक्त, क्यूरियस माइंड इन्फोटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को जिम्बाब्वे के ‘नेशनल रोबोटिक्स और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी फ्रेमवर्क’ में एक रणनीतिक विकास भागीदार के रूप में भी शामिल किया गया है। यह भूमिका कंपनी को जिम्बाब्वे में तकनीकी शिक्षा के विकास और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने का अवसर प्रदान करेगी।
ये सफलता मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत द्वारा राज्य में तकनीकी शिक्षा को प्राथमिकता देने और उसे मजबूत आधार प्रदान करने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। गोवा में स्कूल स्तर पर कोडिंग और रोबोटिक्स कार्यक्रमों की शुरुआत ने छात्रों में तकनीकी समझ और नवाचार की सोच विकसित की है। इन पहलों ने राज्य में एक सुदृढ़ शैक्षिक ढांचा तैयार किया है, जो अब अन्य देशों के लिए एक आदर्श मॉडल बन रहा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि युवाओं को सही संसाधन, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए, तो वे वैश्विक स्तर पर नवाचार और तकनीकी विकास में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। उनका ‘डिजिटल गोवा’ विजन इसी सोच पर आधारित है, जिसमें भविष्य की तकनीकों को शिक्षा के साथ जोड़कर युवाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया है।
इस सहयोग को और आगे बढ़ाने के उद्देश्य से जिम्बाब्वे का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल गोवा पहुंचा है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य राज्य के विभिन्न स्कूलों, रोबोटिक्स लैब्स और प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा कर रहे हैं। वे गोवा में लागू किए गए शैक्षिक मॉड्यूल, तकनीकी ढांचे और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन कर रहे हैं, ताकि उन्हें जिम्बाब्वे में प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जिम्बाब्वे के बीच यह साझेदारी STEM शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसरों का द्वार खोलेगी। इससे दोनों देशों के बीच ज्ञान, तकनीक और कौशल का आदान-प्रदान बढ़ेगा, जिससे छात्रों और शिक्षकों को समान रूप से लाभ होगा।
गोवा सरकार राज्य को एक ‘नॉलेज हब’ के रूप में विकसित करने के अपने लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके तहत छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, कोडिंग और अन्य उभरती तकनीकों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को न केवल रोजगार के लिए तैयार करना है, बल्कि उन्हें नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी सक्षम बनाना है। इस प्रकार, जिम्बाब्वे के साथ यह साझेदारी गोवा के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो राज्य की शैक्षिक नीतियों और तकनीकी प्रगति को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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