
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा सामने आते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस डील को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे भारत के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि “इतने गले मिलने और फोटो खिंचवाने के बाद भी कुछ खास हासिल नहीं हुआ,” और मशहूर पंक्ति “दोस्त दोस्त न रहा” दोहराई।
सरकार की ओर से जारी भारत-अमेरिका संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत ने अमेरिका की सभी औद्योगिक वस्तुओं और कई खाद्य व कृषि उत्पादों पर टैक्स खत्म या कम करने पर सहमति जताई है। इसमें पशु आहार के लिए सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन, लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट जैसे उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा, भारत अगले पांच साल में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान, विमान के कल-पुर्जे, बहुमूल्य धातुएं, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा रखता है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस समझौते की बारीकियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि संयुक्त बयान में कई अहम बातों पर चुप्पी है। उन्होंने दावा किया कि इससे भारत रूस से तेल आयात कम या बंद कर सकता है और अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए भारत अपने आयात शुल्क घटाएगा, जिसका नुकसान सीधे भारतीय किसानों को होगा। रमेश का कहना है कि अमेरिका से आयात बढ़ने से भारत का लंबे समय से बना व्यापार अधिशेष खत्म हो सकता है और देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।
दूसरी ओर शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने और भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह डील किसी बराबरी की बातचीत का नतीजा नहीं, बल्कि अमेरिका के “आदेश” का पालन है। उनके मुताबिक, सरकार ने वही बातें मान लीं, जो अमेरिकी राष्ट्रपति पहले ही सोशल मीडिया पर कह चुके थे। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी चिंता जताई कि औद्योगिक सेक्टर को पूरी तरह खोल दिया गया है और कृषि से जुड़े प्रावधान आगे चलकर मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
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