केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक विवादास्पद भाषण दिया था। इसी से संबंधित एक पुनरीक्षण याचिका बुधवार को मऊ के जिला एवं सत्र न्यायालय (एमपी-एमएलए अदालत) ने स्वीकार कर ली है। अदालत ने संबंधित पत्रावली अधीनस्थ न्यायालय को भेज दी है।
क्या था मामला?
यह मामला स्थानीय निवासी और भगवान हनुमान के भक्त नवल किशोर शर्मा ने दर्ज की गई एक शिकायत से जुड़ा है। नवल किशोर शर्मा के वकील गनी अहमद नोमानी ने कहा कि 2022 में बदायूं में एक चुनावी रैली के दौरान अमित शाह ने कथित तौर पर भगवान हनुमान को 'बाहुबली' कहते हुए एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने माफिया नेताओं शहाबुद्दीन और मुख्तार अंसारी से तुलना की थी।
भेजा गया था कानूनी नोटिस
नोमानी ने बताया कि अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में यह खबर देखकर आहत हुए हनुमान भक्त शर्मा ने अमित शाह को एक कानूनी नोटिस भेजा था। जब इस नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने एमपी-एमएलए अधीनस्थ न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई थी।
वकील ने बताया कि जिस दिन शिकायत दर्ज की गई थी, उसी दिन अधीनस्थ न्यायालय ने नवल किशोर शर्मा या उनके वकील को सुने बिना ही अधिकार क्षेत्र के अभाव का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी थी। इस फैसले के बाद शर्मा ने मंगलवार को सत्र न्यायालय में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।
एमपी-एमएलए अदालत में याचिका स्वीकार
नोमानी ने बताया कि एमपी-एमएलए अदालत ने बुधवार को एक आदेश पारित कर पुष्टि की कि मऊ जिले में मामले की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि जिला और सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार वत्स की अदालत ने नवल किशोर शर्मा की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर ली है और मामले की फाइल अब साक्ष्य दर्ज करने के लिए अधीनस्थ न्यायालय भेज दी गई है।
नोमानी ने आगे कहा कि अधीनस्थ न्यायालय स्वतंत्र रूप से गवाहों की गवाही की तारीखें तय करेगा और कार्यवाही जारी रखना सुनिश्चित करेगा।