
दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए धमाके ने पूरे देश को हिला दिया है। जांच में कई बड़े खुलासे हुए हैं। बताया जा रहा है कि इस धमाके के पीछे कोई आम गिरोह नहीं, बल्कि एक डॉक्टर आतंकी मॉड्यूल था, जो जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा बताया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मॉड्यूल से जुड़े 15 लोगों को गिरफ्तार किया है और 3 को हिरासत में लिया गया है। जांच के दौरान करीब 56 डॉक्टरों से पूछताछ की जा चुकी है। आरोप है कि यही ग्रुप 10 नवंबर की शाम लाल किले के पास हुए विस्फोट के पीछे था।
अस्पताल के सूत्रों ने यूनीवार्ता को बताया कि मृतकों के शरीर पर किसी विस्फोटक सामग्री के होने का प्रमाण नहीं मिला, हालांकि जांचकर्ताओं को संदेह है कि विस्फोट में एक संशोधित विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया होगा। यह विस्फोट बेहद शक्तिशाली था और इसके टुकड़े दूर तक फैले मिले।
इस केस की शुरुआत श्रीनगर के नौगाम इलाके से हुई, जहां पुलिस को धमकी भरा एक पोस्टर मिला था। उसी से 19 अक्टूबर को मामला दर्ज हुआ और जांच आगे बढ़ी। जांच के शुरुआती चरण में 20 से 27 अक्टूबर के बीच शोपियां से मौलवी इरफान अहमद वाघ और गंदेरबल के वाकुरा से जमीर अहमद की गिरफ्तारी हुई।
5 नवंबर को सहारनपुर से डॉ. आदिल को पकड़ा गया, जिसके बाद अनंतनाग अस्पताल से AK-47 और गोला-बारूद मिले। फिर 8 नवंबर को फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी से राइफलें, पिस्तौलें और गोला-बारूद बरामद हुए। पुलिस ने आगे की पूछताछ में डॉ. मुजम्मिल को भी पकड़ लिया, जिसके पास भारी मात्रा में हथियार मिले।
9 नवंबर को फरीदाबाद के धोज निवासी मद्रासी नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद फरीदाबाद के ढेरा कॉलोनी स्थित अल फलाह मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद इश्तियाक के आवास से 10 नवंबर को 2,563 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुए।
इसके अतिरिक्त छापों में 358 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री, डेटोनेटर और टाइमर बरामद किए गए, जिससे विस्फोटकों की कुल मात्रा लगभग 3,000 किलोग्राम हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार अल फलाह विश्वविद्यालय का कर्मचारी और कथित मॉड्यूल का सदस्य डॉ. उमर मोहम्मद फिलहाल फरार है।
राष्ट्रीय राजधानी में लाल किले के पास ही 10 नवंबर की शाम को दिल दहलाने वाला विस्फोट हुआ, जिसके बाद दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी), राष्ट्रीय जांच एजेंसी ( एनआईए) और फोरेंसिक टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और घटनास्थल से डीएनए नमूने, विस्फोटक अवशेष और अन्य साक्ष्य एकत्र किए गए।
लाल किले के विस्फोट स्थल से जांच दल को एक कटा हुआ हाथ मिला है, जिसके बारे में संदेह है कि वह डॉ. उमर मोहम्मद का था, जिस पर आत्मघाती हमलावर होने का आरोप है। इसकी पुष्टि के लिए उसकी मां के डीएनए नमूनों की जांच की जा रही है।
जांच से संकेत मिला है कि उमर अल फलाह विश्वविद्यालय में छात्रों को कट्टरपंथी बना रहा था। यह विश्वविद्यालय इस मॉड्यूल का संचालन केंद्र था। उमर के पड़ोसी और सहयोगी डॉ. मुजम्मिल शकील को गिरफ्तार कर लिया गया है। विस्फोट में इस्तेमाल की गई कार डॉ. शाहीन शाहिद के नाम पर पंजीकृत थी, जिसे बाद में लखनऊ से गिरफ्तार किया गया। डॉ. शाहीन शाहिद की पहचान भारत में जैश-ए-मोहम्मद के अभियानों की कमान संभालने वाली महिला के रूप में हुई है। उसने कथित तौर पर लगभग दो साल तक विस्फोटक जमा करने और सहयोगी डॉक्टरों के साथ मिलकर एक बड़े आतंकवादी हमले की साजिश रचने की बात कबूल की है।
पुलिस सूत्रों ने कहा, "सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि डॉ. उमर मोहम्मद गाड़ी चला रहा था और विस्फोट में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक फरीदाबाद में जब्त किए गए विस्फोटकों से मेल खाते हैं।" पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या ये हमला पहले से प्लान किया गया था या भागते समय उमर के घबराने से अचानक विस्फोट हुआ था।
जांच से यह भी पता चला कि दिल्ली लाए जाने से पहले गाड़ी 29 अक्टूबर से 10 नवंबर को तक फरीदाबाद के धौज स्थित अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में खड़ी थी। मामले की गंभीरता देखते हुए 11 नवंबर को यह केस औपचारिक रूप से NIA को सौंप दिया गया।
Oops! Looks like you have exceeded the limit to bookmark the image. Remove some to bookmark this image.