गैंगरेप की कथित पीड़िता से मुआवजे की रकम वसूली का आदेश, कोर्ट ने आरोपियों को भी किया बरी

False Gangrape Case: दिल्ली की एक अदालत ने नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न और सामूहिक दुष्कर्म सहित विभिन्न अपराधों के नौ आरोपियों को आरोप-मुक्त कर दिया।कोर्ट ने कहा कि आरोपियों पर सिर्फ संदेह के आधार पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

Naveen Kumar Pandey( विद इनपुट्स फ्रॉम भाषा)
अपडेटेड6 Nov 2025, 09:45 PM IST
दिल्ली कोर्ट ने गैंगरेप की कथित पीड़िता के आरोपियों को रिहा किया (सांकेतिक तस्वीर)
दिल्ली कोर्ट ने गैंगरेप की कथित पीड़िता के आरोपियों को रिहा किया (सांकेतिक तस्वीर)(Mint)

Gaziabad Gangrape Case: नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में नौ लोगों को जेल में रहना पड़ा, लेकिन बाद में मामला फुस्स निकला। अब अदालत ने न केवल उन्हें आरोप मुक्त कर दिया बल्कि कथित पीड़िता को दी गई मुआवजा राशि की वसूली का भी आदेश दे दिया। कोर्ट ने कहा कि जब कोई सबूत नहीं मिले तो सिर्फ संदेह के आधार पर किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाते रहा जा सकता है।

2023 के मामले में नौ आरोपियों की रिहाई

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत ने लड़की को अंतरिम मुआवजे के रूप में दी गई 3.75 लाख रुपये की राशि भी उससे वसूलने का निर्देश दिया। दिल्ली पुलिस ने एक महिला सहित नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया था, जिसमें कहा गया था कि इन आरोपियों ने लड़की का अपहरण किया और उसे 25 सितंबर, 2023 को गाजियाबाद ले गए, जहां उससे दुष्कर्म किया था।

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पीड़िता और मां ने बार-बार दिए विरोधाभासी बयान

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता एक मंदिर परिसर में रह रही थी और आरोपी मंदिर प्रबंधन के सदस्य थे। यह आदेश 27 सितंबर को दिया गया था जो हाल ही में उपलब्ध हो सका है। आदेश में अदालत ने कहा, 'हर बार पीड़िता और उसकी मां ने लगातार अपने बयान बदले हैं और यह विरोधाभास इतना व्यापक है कि एक बयान दूसरे बयान के खुद ही उलट है।'

गैंगरेप की घटना रिकॉर्ड करने का दावा भी निकला झूठा

अभियोजन पक्ष के इस आरोप पर गौर करते हुए कि सामूहिक दुष्कर्म और अन्य अपराधों की घटना पीड़िता की मां के मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड की गई थी, अदालत ने कहा कि जब डिवाइस को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया तो ऐसा कोई वीडियो नहीं मिला। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश तथ्यों को लेकर ‘गंभीर संदेह’ हैं।

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अब मुआवजे के 3.75 लाख रुपये की भी होगी वसूली

अदालत ने आरोपियों को आरोप-मुक्त करते हुए कहा, 'परिस्थितियां आरोपियों पर गंभीर संदेह पैदा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और यह महज संदेह का मामला है। कानून का यह स्थापित सिद्धांत है कि महज संदेह की स्थिति में आरोपियों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।' यह देखते हुए कि कोई अपराध नहीं हुआ है, अदालत ने दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के सचिव को पीड़िता से अंतरिम मुआवजे (3.75 लाख रुपये की राशि) की वसूली की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया। यह राशि अदालत द्वारा पीड़िता को अगस्त 2024 में प्रदान करवाई गई थी।

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