
Delhi government energy report 2025: दिल्ली के घरों में अब रसोई गैस सिलेंडर की जगह पाइप वाली गैस (PNG) तेजी से अपनी जगह बना रही है। दिल्ली सरकार की हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि शहर के लोग पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर के बजाय पीएनजी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। पिछले चार सालों के आंकड़े बताते हैं कि जहां पीएनजी के ग्राहकों में भारी इजाफा हुआ है, वहीं एलपीजी की बिक्री लगभग स्थिर हो गई है। यह बदलाव न केवल सुविधा बल्कि पर्यावरण और खर्च के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2021-22 में दिल्ली में पीएनजी कनेक्शनों की संख्या 12.6 लाख थी। साल 2024-25 तक यह आंकड़ा बढ़कर 17.2 लाख के पार पहुंच गया है। यानी महज चार साल में कनेक्शनों में करीब 37% की बढ़ोतरी हुई है। जानकारों का कहना है कि लोग अब ज्यादा सुविधाजनक और आधुनिक विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, 2025 के सटीक आंकड़े इस साल के अंत तक सामने आएंगे।
रिपोर्ट बताती है कि पिछले कुछ वर्षों में एलपीजी सिलेंडर की बिक्री में कोई खास बढ़त नहीं देखी गई है। कुछ सेगमेंट में तो इसकी मांग कम भी हुई है। पीएनजी को इसके मुकाबले ज्यादा किफायती और आसान माना जा रहा है। हालांकि सब्सिडी वाला सिलेंडर शुरुआत में सस्ता लग सकता है, लेकिन लंबी अवधि में पीएनजी का बिल कम पड़ता है। साथ ही, पीएनजी में सिलेंडर बुक करने का झंझट नहीं होता और गैस की सप्लाई भी बिना रुके चौबीसों घंटे मिलती रहती है।
शहर में सिर्फ रसोई नहीं, बल्कि सड़कों पर भी ईंधन का मिजाज बदल रहा है। साल 2024-25 में पेट्रोल की खपत बढ़कर 1,035 हजार मीट्रिक टन हो गई है, जो 2021-22 में 693 हजार मीट्रिक टन थी। इसके उलट, डीजल की बिक्री में लगातार गिरावट आ रही है। साल 2022-23 में डीजल की बिक्री 662 हजार मीट्रिक टन थी, जो 2024-25 में घटकर 558 हजार मीट्रिक टन रह गई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदूषण नियमों में सख्ती और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बढ़ते चलन की वजह से लोग डीजल से दूरी बना रहे हैं।
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के एक अधिकारी ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि पिछले पांच वर्षों में दिल्ली में गैस पाइपलाइन का नेटवर्क दोगुना हो गया है। पहले यह नेटवर्क 16,000 किलोमीटर का था, जो अब बढ़कर लगभग 32,000 किलोमीटर तक पहुंच गया है। इसी विस्तार की वजह से ज्यादा से ज्यादा घरों तक गैस पहुंचाना संभव हो पाया है। हालांकि, तकनीकी दिक्कतों और सुरक्षा कारणों से अभी भी कई अनाधिकृत कॉलोनियां इस ग्रिड से बाहर हैं। वहां के लोग आज भी एलपीजी सिलेंडर पर ही निर्भर हैं।
सरकार का अगला लक्ष्य दिल्ली के गांवों को पीएनजी से जोड़ना है। दिल्ली के करीब 350 गांवों में से 260 से ज्यादा गांवों को ग्रिड से जोड़ा जा चुका है। आईजीएल अधिकारी के अनुसार, बाकी बचे इलाकों में काम तेजी से चल रहा है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक दिल्ली के सभी गांव पीएनजी नेटवर्क के दायरे में आ जाएंगे। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि लोगों को सस्ती और सुलभ ऊर्जा भी मिलेगी।
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