
Delhi HC: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ‘सीरियल लिटिगेंट’ पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। यह व्यक्ति राष्ट्रीय राजधानी में संपत्तियों के गैरकानूनी निर्माण के खिलाफ कई याचिकाएं दायर कर चुका था। बाद में उन्हें आगे नहीं बढ़ाया। यह मामला तब सामने आया जब जस्टिस मिनी पुष्करना आरके पुरम क्षेत्र में संपत्ति के गैरकानूनी निर्माण के खिलाफ उसी याचिकाकर्ता द्वारा दायर पांचवीं रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। उन्होंने नोट किया कि याचिकाकर्ता बार-बार याचिकाएं दायर कर रहा है, लेकिन उन्हें आगे नहीं बढ़ा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, याचिकाकर्ता हरदीप सिंह हंसपाल की याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने रिकॉर्ड पर लिया कि याचिकाकर्ता द्वारा दायर की गई पांचवीं याचिका थी और इसमें अलग-अलग संपत्ति में अवैध निर्माण का आरोप लगाया गया था, जबकि इससे उसका सीधा संबंध नहीं था। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक सीरियल लिटिगेंट है और उसने उक्त क्षेत्र में स्थित कई संपत्तियों के खिलाफ विभिन्न रिट याचिकाएं दायर की हैं। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया कि वह संपत्ति में मौजूद अवैध निर्माण के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करे।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा याचिकाओं को दायर करने के बाद याचिकाकर्ता द्वारा इस आधार पर जोर नहीं दिया जाता है कि उक्त संपत्ति के मालिकों व किरायेदारों ने खुद ही अवैध निर्माण को हटाने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। पीठ ने कहा कि याचिकाएं दायर करने का इरादा और मकसद नेक होना चाहिए। किसी भी छिपे हुए एजेंडे या अपने स्वार्थ के लिए याचिका दायर नहीं की जा सकती है। यह कोर्ट ऐसी किसी भी याचिका पर विचार नहीं करेगा, जो बाहरी या स्वार्थी उद्देश्यों के लिए दायर की गई हो। कोर्ट ने कई बार कहा है कि कोई भी पार्टी कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं कर सकती।
7 अप्रैल, 2025 को रोहिणी सेक्टर-15 की संपत्ति संख्या C-6/44 के संबंध में दायर की गई थी, लेकिन याचिकाकर्ता ने बाद में इसे आगे नहीं बढ़ाया।
संपत्ति संख्या C-7/38 के संबंध में दायर की गई। बाद में, याचिकाकर्ता ने यह कहते हुए इसे आगे न बढ़ाने की बात कही कि मालिक/कब्जाधारी ने स्वयं अवैध निर्माण हटाना शुरू कर दिया है।
संपत्ति संख्या C-8/5 के खिलाफ दायर डब्ल्यूपी (सी) 6793/2025। इसका निपटारा 20 मई, 2025 को इस नोट के साथ किया गया कि एमसीडी ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
20 मई, 2025 के आदेश की अवमानना का आरोप लगाते हुए एक अवमानना याचिका दायर की गई थी। इसे आदेश के चार दिन के भीतर ही दायर किया गया था। बाद में याचिकाकर्ता ने इसे भी यह कहते हुए वापस ले लिया कि मालिक ने खुद निर्माण हटाना शुरू कर दिया।
‘सीरियल लिटिगेंट’ का मतलब है ऐसा व्यक्ति जो बार-बार अदालत में याचिकाएं या मुकदमे दायर करता है, लेकिन उन्हें आगे बढ़ाने या सच्चाई तक पहुंचाने में गंभीर नहीं होता। आसान शब्दों में, यह कोई ऐसा व्यक्ति है जो कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करता है। बार-बार शिकायतें, रिट या केस दायर करता है। अक्सर बिना सही कारण या नेक इरादे के, सिर्फ समय बर्बाद करने, परेशान करने या अपने निजी स्वार्थ के लिए। दिल्ली हाईकोर्ट के मामले में भी याचिकाकर्ता ने कई बार गैरकानूनी निर्माण के खिलाफ याचिकाएं दायर कीं, लेकिन उन्हें आगे नहीं बढ़ाया, इसलिए उन्हें ‘सीरियल लिटिगेंट’ कहा गया।
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