
दिल्ली में ट्रैफिक का दर्द किसी से छिपा नहीं है। ऑफिस टाइम हो या वीकेंड, सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें आम बात बन चुकी हैं। ऐसे में अगर शहर को एक नया वैकल्पिक रास्ता मिल जाए, तो सफर आसान हो सकता है। इसी दिशा में दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। नजफगढ़ ड्रेन के दोनों किनारों पर दो-लेन सड़क बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे दी गई है, जिस पर कुल 453.95 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह सिर्फ सड़क बनाने का काम नहीं है, बल्कि दिल्ली के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को नया आकार देने की कोशिश है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को वित्त व्यय समिति की बैठक हुई, जिसमें इस परियोजना को हरी झंडी दी गई। दिल्ली सचिवालय में हुई बैठक में कैबिनेट सहयोगी प्रवेश साहिब सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। पहले ही संबंधित तकनीकी समिति और बाढ़ नियंत्रण बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी थी। अब वित्त समिति की स्वीकृति के बाद आगे की प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
इस योजना के तहत झटीकरा ब्रिज से छावला ब्रिज तक ड्रेन के बाएं किनारे पर 5.94 किलोमीटर लंबी दो-लेन सड़क बनाई जाएगी। इसके बाद छावला से बसईदारापुर तक ड्रेन के दोनों किनारों पर 27.415 किलोमीटर लंबाई में सड़क का निर्माण होगा। दोनों किनारों को मिलाकर कुल लंबाई 54.83 किलोमीटर होगी। यानी राजधानी को एक लंबा, सीधा और वैकल्पिक कॉरिडोर मिलने वाला है, जो कई इलाकों को आपस में जोड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करना है। जब नई सड़क बनेगी तो जाम की स्थिति कम हो सकती है। कम जाम का मतलब है यात्रा का समय घटेगा और ईंधन की बचत होगी। साथ ही वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण भी घटेगा। सरकार का दावा है कि यह परियोजना दिल्ली में एक वैकल्पिक इंट्रा-सिटी कॉरिडोर के रूप में काम करेगी और परिवहन ढांचे को नई दिशा देगी।
यह सड़क ढांसा से लेकर बसईदारापुर तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जोड़ेगी। उत्तम नगर, विकासपुरी, नजफगढ़, बिजवासन, छावला, गोयला डेयरी, द्वारका, बापरोला, निलोठी, पश्चिम विहार, राजौरी गार्डन और आईजीआई एयरपोर्ट जैसे कई प्रमुख इलाकों को इसका फायदा मिलेगा।
इसके अलावा गुरुग्राम के सेक्टर-104 और सेक्टर-110 तक संपर्क मजबूत होगा। यानी दिल्ली और हरियाणा के बीच कनेक्टिविटी और बेहतर होगी। द्वारका एक्सप्रेसवे से जुड़े गांव गालिबपुर, रावता मोड़, दौराला, झुझुली, सारंगपुर, ढांसा, घुम्मनहेड़ा, शिकारपुर, झटीकरा, कांगनहेड़ी और छावला भी बेहतर संपर्क से जुड़ेंगे। इससे ग्रामीण इलाकों को शहर से जोड़ने में बड़ी मदद मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक जरूरी प्रशासनिक मंजूरी दी जाए, अप्रैल 2026 तक टेंडर प्रक्रिया पूरी हो और मई 2026 तक काम शुरू कर दिया जाए। पूरी परियोजना को नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का कहना है कि यह परियोजना सिर्फ यातायात सुधार तक सीमित नहीं है। ड्रेन के किनारों पर सड़क बनने से सरकारी भूमि की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। अनधिकृत कब्जों पर रोक लगाने में भी मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे दिल्ली में सतत, हरित और सुव्यवस्थित परिवहन प्रणाली की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे यातायात सुगमता बढ़ेगी, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी और शहरी-ग्रामीण विकास को नई रफ्तार मिलेगी। यानी यह योजना ट्रैफिक, पर्यावरण और भूमि प्रबंधन तीनों पहलुओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
राजधानी लंबे समय से ट्रैफिक के बोझ से जूझ रही है। ऐसे में नजफगढ़ ड्रेन के किनारे बनने वाली यह सड़क उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि तय समय पर काम शुरू होता है या नहीं, और क्या यह परियोजना सच में दिल्ली के ट्रैफिक की तस्वीर बदल पाएगी।
यह परियोजना दिल्ली के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करेगी और राजधानी को एक नया वैकल्पिक रास्ता देगी। अगर तय समयसीमा के भीतर काम पूरा होता है, तो दिल्ली को आने वाले वर्षों में ट्रैफिक के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है।
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