Delhi Blast: हरियाणा में मिली लाल फोर्ड इकोस्पोर्ट! क्या इसी कार में छिपे हैं ब्लास्ट के सबूत?

Delhi Red Fort Blast Case Update: दिल्ली पुलिस को लाल किला विस्फोट केस में एक और सुराग मिल गया है। दिन में पुलिस ने जिस लाल फोर्ड कार के लिए अलर्ट जारी किया था, वो गाड़ी हरियाणा से बरामद कर ली गई है। यह गाड़ी आरोपी डॉ. उमर के नाम पर रजिस्टर्ड है। 

Priya Shandilya
पब्लिश्ड12 Nov 2025, 06:14 PM IST
दिल्ली कार ब्लास्ट: लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट कार का पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस अलर्ट
दिल्ली कार ब्लास्ट: लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट कार का पता लगाने के लिए दिल्ली पुलिस अलर्ट(Reuters)

Delhi Red Fort Blast Case Update: दिल्ली पुलिस ने लाल किला विस्फोट मामले में एक और चौंकाने वाली कड़ी जोड़ दी है। मुख्य आरोपी उमर उन नबी की लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट कार हरियाणा के खंडावली गांव से बरामद हुई है। गाड़ी, हरियाणा में उमर के दोस्त के फार्महाउस से मिली है। इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि उमर के दोस्त से भी पुलिस कि पूछताछ चल रही है।

दिन में पहले जहां दिल्ली पुलिस ने इस गाड़ी को लेकर अलर्ट जारी किया था, वहीं अब इसका मिल जाना जांच के लिए बड़ा सुराग साबित हो सकता है।

दिनभर चला अलर्ट

दिन में दिल्ली पुलिस ने लाल फोर्ड इकोस्पोर्ट को लेकर सभी थानों, चौकियों और सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया था। पुलिस को शक था कि विस्फोट के संदिग्धों के पास पहले से मिली गाड़ी के अलावा एक और कार थी।

इस गाड़ी की तलाश में पांच टीमें तैनात की गई थीं, जबकि उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस को भी जांच में मदद के लिए अलर्ट किया गया था।

डॉ. उमर के नाम पर रजिस्टर्ड गाड़ी

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह फोर्ड इकोस्पोर्ट डॉ. उमर उन नबी के नाम पर रजिस्टर्ड है। शक जताया जा रहा है कि उमर ने इस कार का इस्तेमाल टोही (रेकी) गतिविधियों के लिए किया था। अब जब यह गाड़ी हरियाणा में बरामद हो चुकी है, तो जांच एजेंसियां उसके लोकेशन डेटा और डीएनए सैंपल खंगालने में जुट गई हैं। गाड़ी का रजिस्ट्रेशन डिटेल्स पहले ही सभी सीमावर्ती यूनिट्स को भेजे गए थे, ताकि किसी भी संदिग्ध मूवमेंट पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

सहारनपुर में डॉक्टरों की कड़ियां सामने आईं

इसी बीच, जांच का एक और सिरा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर तक जा पहुंचा है। यहां के फेमस मेडिकेयर हॉस्पिटल के कंसल्टिंग फिजिशियन डॉ. आदिल अहमद राथर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब उनके करीबी लोगों की तलाश में जुटी हैं।

डॉ. आदिल यहां अमन विहार कॉलोनी में किराए के मकान में रहते थे, जिस पर गिरफ्तारी के बाद से ताला लगा हुआ है। बताया गया है कि यह मकान उन्हें अस्पताल में कार्यरत डॉ. बाबर ने दिलवाया था, जो खुद सरसावा कस्बे के रहने वाले हैं।

शादी, रिश्ते और जांच का फैलता दायरा

डॉ. बाबर और डॉ. असलम जैदी (रुड़की) से भी पुलिस ने पूछताछ की थी, मगर कुछ संदिग्ध नहीं मिला। दोनों अब वापस ड्यूटी पर लौट आए हैं। दिलचस्प बात यह है कि डॉ. बाबर अन्य साथियों के साथ 4 अक्टूबर को डॉ. आदिल अहमद की श्रीनगर में डॉ. रूकैया के साथ हुए शादी समारोह में भाग लेने भी गए थे।

हॉस्पिटल के एमडी मनोज मिश्रा ने कहा कि “हम इस पूरी घटना से बेहद हताश और निराश हैं। मैंने दोनों डॉक्टरों को वापस बुला लिया है, लेकिन खुद अब सहारनपुर छोड़ने का फैसला किया है।”

डॉ. बाबर ने आदिल के बारे में कही ये बात

डॉ बाबर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि डॉ. आदिल अहमद ने अस्पताल के स्टाफ के कुछ लोगों को शादी के कार्ड दिए थे। वह अन्य लोगों के साथ शादी में कश्मीर गए भी थे। उन्होंने कहा कि डॉ. आदिल अहमद किसी भी तरह से संदिग्ध आतंकी की तरह ना दिखते थे और ना ही कोई आपत्तिजनक व्यवहार करते थे। उनके सब जगह बतौर चिकित्सक रजिस्ट्रेशन हो रखे थे उसी आधार पर उनकी यहां 20 मार्च से नियुक्ति हुई थी।

डॉ. आदिल के घर रात में आते थे 8-9 लोग

पत्रकारों ने आदिल के किराए के मकान के आसपास के लोगों से गहन पूछताछ कर जो जानकारियां ली हैं। उसमें यह बात सामने आई है कि रात में 8-9 लोग अक्सर डॉ. आदिल के घर आते थे, और उनके लिए खाना ऑनलाइन मंगाया जाता था। इलाके में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, जिससे पुलिस को यह पता लगाने में मुश्किल हो रही है कि उनके संपर्क में कौन लोग थे।

डॉ. आदिल ने अपनी गिरफ्तारी के बाद कश्मीर की श्रीनगर पुलिस को अपने फरीदाबाद, लखनऊ और सहारनपुर संपर्कों के बारे में सूचित किया था। उसी आधार पर फरीदाबाद से कई गिरफ्तारियां अमल में आईं।

नए गिरफ्तार डॉक्टरों से खुला नेटवर्क

फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉ. शाहिन सईद अंसारी के छोटे भाई डॉ. परवेज अंसारी को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया। परवेज पहले सहारनपुर में प्रैक्टिस करते थे और बाद में लखनऊ चले गए थे। उनके पास से यूपी-11 बीडी-3563 नंबर की आल्टो कार मिली, जो उन्होंने सहारनपुर के एक युवक से खरीदी थी।

अब यह भी सामने आया है कि डॉ. परवेज, डॉ. शाहिन और डॉ. आदिल तीनों का सहारनपुर कनेक्शन है और यही जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

जैश-ए-मोहम्मद लिंक की जांच

सूत्रों के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क जैश-ए-मोहम्मद के सरगना अजहर मसूद से जुड़ा हो सकता है। जांच एजेंसियां इस लिंक को लेकर बेहद गंभीर हैं और हर शहर में जुड़े चेहरों की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं।

दिल्ली से लेकर सहारनपुर तक फैली यह जांच अब कई शहरों और चेहरों को जोड़ रही है। डॉक्टरों के नेटवर्क से लेकर कार की रजिस्ट्री तक हर कड़ी किसी बड़े रहस्य की तरफ इशारा कर रही है। क्या इस पूरी कहानी के पीछे कोई बड़ा आतंकी नेटवर्क है? इसका जवाब आने वाले दिनों में साफ हो सकता है।

(इनपुट्स: भाषा और वार्ता)

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