Delhi Unauthorized Colonies : 1,511 कॉलोनियों होंगी नियमित, 24 अप्रैल से शुरू होंगे आवेदन

Delhi Unauthorized Colonies Regularization News in Hindi: दिल्ली की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का बड़ा फैसला लिया गया है। PM-UDAY योजना के तहत 24 अप्रैल से Swagam पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन शुरू होंगे।

Naveen Kumar Pandey
अपडेटेड7 Apr 2026, 09:06 PM IST
दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों के लाखों मकान मालिकों के लिए खुशखबरी।
दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों के लाखों मकान मालिकों के लिए खुशखबरी।

Delhi News in Hindi : दिल्ली के लाखों लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। सरकार ने शहर की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला करीब 50 लाख लोगों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा लेकर आएगा। अब लोगों को अपने घर का मालिकाना हक पाने के लिए सालों का इंतजार नहीं करना होगा। आइए जानते हैं कि दिल्ली सरकार का यह फैसला कैसे सीधे तौर पर आपके घर की रजिस्ट्री और प्रॉपर्टी वैल्यू को प्रभावित करेगा।

1,511 कॉलोनियों के लिए ऐतिहासिक फैसला

PM-UDAY योजना के तहत कुल 1,731 में से 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया जा रहा है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कैबिनेट मिनिस्टर प्रवेश साहिब सिंह वर्मा और केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसे दिल्ली के लिए ऐतिहासिक दिन बताया है। उन्होंने कहा कि इससे 50 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

'जैसा है, जहां है' के आधार पर नियमितीकरण

सरकार ने नियमों को काफी सरल कर दिया है। अब कॉलोनियों को 'जैसा है, जहां है' के आधार पर नियमित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के अनुसार, 'नियमितीकरण के लिए अब लेआउट प्लान की जरूरत नहीं होगी। सभी प्लॉट और भवनों को आवासीय माना जाएगा।' इसके अलावा, छोटे व्यापारियों को राहत देते हुए 20 वर्गमीटर तक की दुकानों को भी शर्तों के साथ नियमित किया जाएगा।

24 अप्रैल से शुरू होगी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल और समयबद्ध होगी। इसके लिए 'SWAGAM' पोर्टल लॉन्च किया गया है, जिस पर 24 अप्रैल, 2026 से आवेदन शुरू होंगे। सरकार ने इसके लिए एक फास्ट ट्रैक सिस्टम तैयार किया है ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

तय समय सीमा में होगा काम

नए सिस्टम के तहत हर काम के लिए दिन निर्धारित किए गए हैं-

  • 7 दिन में GIS सर्वे रिपोर्ट तैयार होगी।
  • 15 दिन में आवेदन की कमियों को दूर किया जाएगा।
  • 45 दिन में कन्वेंस डीड जारी कर दी जाएगी।
  • TOD पॉलिसी से बदलेगी दिल्ली की सूरत

सरकार ट्रांजिट ओरियेंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति पर भी जोर दे रही है। इसके तहत मेट्रो और RRTS कॉरिडोर के आसपास के 500 मीटर के दायरे में हाई-डेंसिटी और मिक्स्ड यूज डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे सस्ती आवास व्यवस्था और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। अब एडीएम को सिंगल अथॉरिटी बनाया गया है और पूरा नियंत्रण दिल्ली सरकार के पास होगा।

फीचरपुराना सिस्टमनया सिस्टम (Fast Track)
सर्वेDDA करता थापटवारी और नायब तहसीलदार करेंगे
कंट्रोलDDA के पास थादिल्ली सरकार (ADM सिंगल अथॉरिटी)
लेआउट प्लानअनिवार्य थाअब जरूरत नहीं
कन्वेंस डीडलंबा इंतजारअधिकतम 45 दिन

भविष्य की योजनाएं

सरकार केवल नियमितीकरण तक ही सीमित नहीं है। आने वाले समय के लिए लैंड पूलिंग पॉलिसी, मास्टर प्लान 2041, लीजहोल्ड को फ्रीहोल्ड में बदलना और वन टाइम सेटलमेंट स्कीम जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम चल रहा है।

PM-UDAY योजना: शुरुआत और उद्देश्य

केंद्र सरकार अक्टूबर 2019 में प्रधानमंत्री अनऑथराइज्ड कॉलोनीज इन दिल्ली आवास अधिकार योजना (PM-UDAY) की शुरुआत की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों निवासियों को उनके घरों का मालिकाना हक प्रदान करना है। ऐतिहासिक रूप से, इन कॉलोनियों के निवासी केवल पावर ऑफ अटॉर्नी या 'सेल एग्रीमेंट' के भरोसे रहते थे, जिससे उन्हें बैंक लोन लेने या कानूनी रूप से संपत्ति बेचने में भारी कठिनाई होती थी।

इस योजना के तहत सरकार निवासियों को कन्वेंस डीड और 'आथोराइजेशन स्लिप' जारी करती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब ये संपत्तियां कानूनी रूप से वैध मानी जाती हैं, जिससे निवासी अपनी संपत्ति को गिरवी रखकर बैंकों से लोन ले सकते हैं और बिना किसी डर के निर्माण कार्य कर सकते हैं। यह योजना दिल्ली के शहरी परिदृश्य को व्यवस्थित करने और 'सबको आवास' के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

दिल्ली में कैसे बसीं अनधिकृत कॉलोनियां?

दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का विकास विभाजन के बाद की आबादी के दबाव और बाद के दशकों में हुए तीव्र शहरीकरण का परिणाम है। जब योजनाबद्ध आवासीय कॉलोनियां बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने में विफल रहीं, तो प्रवासी आबादी और कम आय वर्ग के लोगों ने खेती की जमीन पर बिना किसी आधिकारिक मास्टर प्लान के घर बनाना शुरू कर दिया। समय के साथ, ये छोटे समूह विशाल बस्तियों में बदल गए।

अनधिकृत कॉलोनियों का बुरा हाल

यहां रहने वाली आबादी को दशकों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव की गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा है। संकरी गलियां, जल निकासी की खराब व्यवस्था, और साफ पीने के पानी की कमी यहां की प्रमुख समस्याएं रही हैं। इसके अलावा, कानूनी मान्यता न होने के कारण इन इलाकों में सीवरेज लाइन और व्यवस्थित सड़कों का निर्माण करना प्रशासन के लिए भी कठिन रहा है। सबसे बड़ी चुनौती 'बेदखली का डर' और संपत्ति पर कानूनी अधिकार न होना था, जिसने इन निवासियों को सामाजिक और आर्थिक रूप से असुरक्षित बना रखा था। अब नियमितीकरण की प्रक्रिया इन चुनौतियों को समाप्त करने की एक कोशिश है।

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