कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई मुलाकात ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का आधा समय पूरा होते ही नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें पहले से चल रही थीं और इस मुलाकात ने उन्हें और हवा दी। हालांकि, पार्टी के शीर्ष नेताओं ने स्पष्ट किया कि आलाकमान स्तर पर किसी तरह का भ्रम या संकट नहीं है।
डीके शिवकमार ने CM पद पर चर्चा से किया इनकार
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में डीके शिवकुमार ने साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री पद या नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने बताया कि बातचीत का केंद्र केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में प्रस्तावित बदलाव और आगामी कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक थी। शिवकुमार ने कहा कि न तो उन्होंने और न ही किसी और ने मुख्यमंत्री के मुद्दे को उठाया, क्योंकि फिलहाल ऐसा कोई विषय मौजूद ही नहीं है।
आलाकमान के फैसले के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई
डिप्टी सीएम शिवकुमार ने खुद को किसी पद का दावेदार मानने से इनकार करते हुए कहा कि वे आजीवन कांग्रेस कार्यकर्ता हैं। उन्होंने पार्टी के लिए हर स्तर पर काम करने का हवाला दिया और दोहराया कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और वे दोनों आलाकमान के निर्णय के अनुसार चलेंगे। दिल्ली जाने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि जब तक पार्टी नेतृत्व बुलावा नहीं देता, उनकी राजधानी जाने की कोई योजना नहीं है।
मनरेगा मुद्दे पर केंद्र पर तीखा हमला
नेतृत्व की चर्चाओं से इतर, शिवकुमार ने केंद्र सरकार के मनरेगा को बदलने के प्रस्ताव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे ग्रामीण रोजगार कमजोर होगा और राज्यों पर 40 प्रतिशत का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। उन्होंने इसे केवल कर्नाटक नहीं, बल्कि पूरे देश का मुद्दा बताया और पंचायत प्रतिनिधियों व मनरेगा कार्यकर्ताओं को साथ लेकर जन आंदोलन छेड़ने की घोषणा की।