
Ali Khamenei alive or not: मध्य पूर्व में शनिवार को हालात अचानक बेहद तनावपूर्ण हो गए जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की। जवाब में ईरान की तरफ से भी पलटवार की खबरें सामने आईं। ईरानी मीडिया के मुताबिक राजधानी तेहरान के कई इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं और कुछ जगहों पर धुएं के गुबार उठते देखे गए। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि कम से कम एक हमला उन परिसरों के आसपास हुआ जो ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई से जुड़े बताए जाते हैं। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए खामेनेई की मौत का दावा कर दिया, जिससे पूरी दुनिया में सियासी हलचल और तेज हो गई है।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने लिखा, "इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक, खामेनेई की मौत हो गई है...वह हमारे इंटेलिजेंस और बहुत एडवांस्ड ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं पाया और इजरायल के साथ मिलकर काम करते हुए, वो या उसके साथ मारे गए दूसरे नेता कुछ भी नहीं कर सके। ईरानी लोगों के लिए अपना देश वापस लेने का यह सबसे बड़ा मौका है। हम सुन रहे हैं कि उनके कई IRGC, मिलिट्री और दूसरी सिक्योरिटी और पुलिस फोर्स अब लड़ना नहीं चाहते और हमसे इम्युनिटी चाहते हैं। जैसा कि मैंने कल रात कहा था, 'अभी उन्हें इम्यूनिटी मिल सकती है, बाद में उन्हें सिर्फ मौत मिलेगी!" उम्मीद है कि IRGC और पुलिस शांति से ईरानी देशभक्त के साथ मिल जाएंगे और देश को उस महानता पर वापस लाने के लिए एक यूनिट के तौर पर मिलकर काम करेंगे जिसका वह हकदार है।"
"यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो जानी चाहिए क्योंकि न सिर्फ खामेनेई की मौत हुई है बल्कि देश सिर्फ एक दिन में पूरी तरह बर्बाद हो गया है और यहां तक कि पूरी तरह खत्म हो गया है। भारी और सटीक बमबारी पूरे हफ्ते बिना रुके जारी रहेगी, या जब तक मिडिल ईस्ट और असल में पूरी दुनिया में शांति के हमारे मकसद को पाने के लिए जरूरी होगा।"
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अली खामेनेई की मौत के दावे को ईरान ने सिरे से नकार दिया। तस्नीम और मेहर न्यूज एजेंसियों ने रिपोर्ट किया कि सुप्रीम लीडर “मजबूती से हालात की कमान संभाले हुए हैं।” ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघ्ची ने एनबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार सुप्रीम लीडर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी स्वस्थ हैं। खामेनेई के पब्लिक रिलेशंस ऑफिस ने भी ट्रंप के दावों को “मेंटल वॉरफेयर” यानी मनोवैज्ञानिक युद्ध बताया, संकेत देते हुए कि तेहरान इसे एक प्रचार रणनीति के तौर पर देख रहा है।
हालांकि, ईरान इंटरनेशनल नाम की एक एजेंसी ने दावा किया कि शनिवार के एयरस्ट्राइक में खामेनेई मारे गए। यही विरोधाभास इस पूरी घटना को और रहस्यमय बना रहा है।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने भी टीवी पर आकर इस खबर को हवा दी। उन्होंने कहा कि सुबह के एक शक्तिशाली सरप्राइज स्ट्राइक में तेहरान के दिल में स्थित खामेनेई के ठिकाने को तबाह कर दिया गया है। नेतनयाहू ने दावा किया कि ऐसे कई संकेत हैं जिनसे साफ होता है कि 'तानाशाह' अब जीवित नहीं है। उन्होंने ईरानी नागरिकों से अपील की कि वे सड़कों पर उतरें और इस शासन का अंत करें।
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इजरायल का दावा है कि इस ऑपरेशन का मकसद ईरान के कमांड स्ट्रक्चर को पूरी तरह ध्वस्त करना था। लगभग 30 वरिष्ठ सैन्य और नागरिक अधिकारियों को निशाना बनाया गया। इजरायली वायु सेना (IAF) ने उन 7 बड़े नामों की सूची भी जारी की है जो इस हमले में मारे गए बताए जा रहे हैं:
इजरायल का कहना है कि इन अधिकारियों के खत्म होने से दुनिया एक बेहतर और सुरक्षित जगह बनेगी।
फिलहाल ईरान की स्थिति अंधेरे में तीर चलाने जैसी है। यदि ट्रंप और नेतन्याहू के दावे सच साबित होते हैं, तो यह न केवल ईरान बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट के भूगोल और राजनीति को बदलकर रख देगा। लेकिन अगर ईरान के दावे सच निकले, तो यह अमेरिका और इजरायल की साख के लिए बड़ा झटका होगा।
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