अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के कई निकायों और 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को बाहर निकालने का फैसला किया है। इनमें भारत-फ्रांस के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) भी शामिल है। ट्रंप ने इन संस्थाओं को अनावश्यक और अमेरिका के हितों के विरुद्ध बताया।
ट्रंप ने बुधवार को 'संयुक्त राज्य अमेरिका के हितों के प्रतिकूल अंतरराष्ट्रीय संगठनों, सम्मेलनों और संधियों से अमेरिका को बाहर निकालना' शीर्षक वाले एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर के बाद ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है कि 66 संयुक्त राष्ट्र और गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों का सदस्य बने रहना, उनमें भागीदारी करना या किसी भी रूप में उन्हें समर्थन देना अमेरिका के हितों के विपरीत है। व्हाइट हाउस से जारी एक पत्र के अनुसार, इनमें 31 संयुक्त राष्ट्र निकाय और 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठन शामिल हैं, जो अमेरिकी राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि या संप्रभुता के विरुद्ध कार्य करते हैं।
ट्रंप ने सभी कार्यकारी विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे इन संगठनों से अमेरिका को बाहर निकाले जाने संबंधी फैसले को तुरंत लागू करने के लिए तत्काल कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र निकायों के मामले में कानूनी समयसीमा तक, इन संस्थाओं में भागीदारी या फंडिंग समाप्त करना ही वापसी माना जाएगा।
जिन संगठनों से अमेरिका अलग हो रहा है, उनमें जलवायु परिवर्तन पर भारत और फ्रांस की संयुक्त पहल अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) भी शामिल है। वर्तमान में आईएसए के 100 से अधिक देश हस्ताक्षरकर्ता हैं और 90 से अधिक देशों ने पूर्ण सदस्य बनने के लिए इसकी पुष्टि की है। उधर, संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने जिन संगठनों से अमेरिका को बाहर निकाला है, उनकी पूरी सूची उन्हें प्राप्त हो गई है और इस पर गुरुवार को टिप्पणी की जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि अमेरिका अब उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों को न तो फंड करेगा और न ही उनमें भागीदारी करेगा, जो अमेरिकी हितों को पूरा नहीं करते या कई मामलों में उनके विरुद्ध हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने इन 66 संस्थानों को 'अपने दायरे में अनावश्यक, कुप्रबंधित, अपव्ययी, खराब ढंग से संचालित, अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने वाले तत्वों के कब्जे में या देश की संप्रभुता, स्वतंत्रता और समग्र समृद्धि के लिए खतरा' पाया है।
रुबियो ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि अमेरिकी जनता के खून-पसीने और धन को ऐसे संस्थानों पर खर्च करना अब स्वीकार्य नहीं है, जिनसे बहुत कम या कुछ भी हासिल नहीं होता। करदाताओं के अरबों डॉलर विदेशी हितों पर खर्च करने के दिन अब खत्म हो गए हैं।' उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों से अमेरिका को बाहर निकाला जा रहा है, उनकी सूची यह दर्शाती है कि शांति और सहयोग के लिए बना व्यावहारिक अंतरराष्ट्रीय ढांचा अब 'वैश्विक शासन की एक विशाल संरचना' में बदल गया है, जो अक्सर प्रगतिशील विचारधारा से प्रभावित और राष्ट्रीय हितों से कटा हुआ है।
रुबियो ने कहा, 'हम उन संस्थाओं में संसाधन, कूटनीतिक पूंजी और अपनी भागीदारी जारी नहीं रखेंगे, जो हमारे हितों से अप्रासंगिक या उनके विरोध में हैं। जहां सहयोग हमारे लोगों के हित में होगा, हम वहां सहयोग करेंगे और जहां नहीं होगा, वहां दृढ़ रहेंगे।' रुबियो ने कहा, 'आज राष्ट्रपति ट्रंप ने 66 अमेरिका विरोधी, बेकार या अपव्ययी अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका के बाहर निकलने की घोषणा की। अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की समीक्षा अभी जारी है।'
जिन 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों और 31 संयुक्त राष्ट्र निकायों से अमेरिका बाहर निकल रहा है, उनमें अंतरसरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (IPCC), अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, यूक्रेन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र, संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों का विभाग शामिल हैं। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ICOSOC) के तहत अफ्रीका, लातिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र, एशिया-प्रशांत तथा पश्चिम एशिया के आर्थिक आयोग, शांति निर्माण आयोग और कोष, व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र इकाई, संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष भी सूची में शामिल हैं।
ट्रंप संयुक्त राष्ट्र और उसकी एजेंसियों के तीखे आलोचक रहे हैं। पिछले वर्ष 20 जनवरी को शपथ लेने के कुछ घंटों के भीतर ही उन्होंने पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को फिर से बाहर निकालने का कार्यकारी आदेश जारी किया था, जो उनके पहले कार्यकाल के फैसले की पुनरावृत्ति थी। अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती हफ्तों में ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अमेरिका की भागीदारी समाप्त करने, यूनेस्को की सदस्यता की समीक्षा करने और फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) को दी जाने वाली मदद रोकने का आदेश दिया था।
पिछले वर्ष सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान राष्ट्रपति के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र पर तीखा हमला किया था। उन्होंने कहा था, 'संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य क्या है? इसमें अपार संभावनाएं हैं, लेकिन यह उन पर खरा नहीं उतर पा रहा है। अधिकतर मामलों में कम से कम अभी, यह केवल कड़े शब्दों वाला पत्र लिखता है और फिर उस पर कोई कार्रवाई नहीं करता। खोखले शब्द युद्ध का समाधान नहीं करते।'
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