
Dubai AYUSH Summit: गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां केवल हमारी प्राचीन विरासत ही नहीं हैं, बल्कि आधुनिक युग में विभिन्न रोगों की रोकथाम, उपचार और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए एक ठोस, प्रमाण-आधारित और भरोसेमंद मार्ग हैं।
वे दुबई में आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय आयुष सम्मेलन एवं प्रदर्शनी के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन में दुनिया भर से आए नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और वेलनेस विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिससे यह आयोजन वैश्विक स्तर पर समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है।
डॉ. सावंत ने कहा कि आयुष पद्धतियां -आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी -मानव स्वास्थ्य को केवल रोग-मुक्त करने तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन के माध्यम से संपूर्ण जीवनशैली सुधार पर जोर देती हैं। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में तनाव, जीवनशैली-जनित रोगों और मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों के समाधान के लिए पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां अत्यंत प्रासंगिक और उपयोगी सिद्ध हो रही हैं।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आज दुनिया को एकीकृत और समग्र स्वास्थ्य सेवा की राह दिखा रहा है। वैश्विक विशेषज्ञों की इस भव्य भागीदारी ने सिद्ध कर दिया है कि दुनिया अब आयुर्वेद और आयुष की वैज्ञानिकता तथा प्रभावशीलता को स्वीकार कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान, मानकीकरण और डिजिटल तकनीक के साथ जोड़कर इसे अधिक विश्वसनीय और वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य बनाया है।
मुख्यमंत्री ने अपने विजन को साझा करते हुए बताया कि गोवा को वेलनेस टूरिज्म, समग्र स्वास्थ्य सेवाओं और आयुष अनुसंधान के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य का प्राकृतिक सौंदर्य, स्वच्छ पर्यावरण, उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की उपलब्धता इसे एक प्रमुख वैश्विक वेलनेस गंतव्य बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को भारत और विशेष रूप से गोवा आकर प्रामाणिक आयुष उपचार और भारतीय जीवनशैली का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया।
डॉ. सावंत ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रिवेंटिव हेल्थकेयर यानी रोगों की रोकथाम पर विशेष बल देती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में आयुष पद्धतियां विकासशील देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
विश्व आयुर्वेद संस्थान और साइंस इंडिया फोरम के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव, भारतीय मिशन के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न देशों से आए विशेषज्ञ उपस्थित रहे। सम्मेलन का उद्देश्य आयुष पद्धतियों को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और साक्ष्य-आधारित समग्र चिकित्सा को मजबूत करना था।
इस अवसर पर वक्ताओं ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ज्ञान-विनिमय और संयुक्त शोध की आवश्यकता पर भी बल दिया। सम्मेलन में विभिन्न सत्रों, प्रदर्शनी और विचार-विमर्श के माध्यम से नवाचार, नीति-निर्माण और व्यावहारिक समाधान पर चर्चा की गई।सम्मेलन का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां भविष्य की वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और मानवता के लिए सुरक्षित, सुलभ तथा टिकाऊ स्वास्थ्य समाधान प्रदान करेंगी।
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