E-Air taxi: दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक से जूझ रहे लोगों के लिए एक नई उम्मीद सामने आई है। आने वाले समय में वर्टिकल लैंडिंग और टेकऑफ करने वाली ई-एयर टैक्सी छतों से उड़ान भर सकती है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, वर्टिकल लैंडिंग और टेकऑफ करने वाली इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी यानी ई-एयर टैक्सी सफर में लगने वाले घंटों को मिनटों में बदल सकती हैं। इतना ही नहीं, जिन इमारतों की छतों का इस्तेमाल इन टैक्सियों के लिए होगा, वे कमाई का नया जरिया भी बन सकती हैं।
गुरुग्राम से जेवर एयरपोर्ट तक पायलट कॉरिडोर का सुझाव
उद्योग परिसंघ कॉन्फेडरशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) की एडवांस्ड एयर मोबिलिटी पर जारी रिपोर्ट में ई-एयर टैक्सी के लिए एक पायलट कॉरिडोर मॉडल पर चर्चा की गई है। रिपोर्ट में गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने वाले कॉरिडोर को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने का सुझाव दिया गया है, जिसे आगे दूसरे इलाकों तक बढ़ाया जा सकता है।
भीड़भाड़ और समय की बचत
CII का कहना है कि ई-एयर टैक्सी से शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर की रुकावटें कम होंगी और ऑपरेशन में लगने वाला समय काफी घटेगा। सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे शहर की भीड़भाड़ को संभालने में मदद मिल सकती है।
किसने जारी की रिपोर्ट?
यह रिपोर्ट नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु और नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने जारी की। इस मौके पर नागर विमानन महानिदेशालय के महानिदेशक फैज अहमद किदवई और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के विपिन कुमार भी मौजूद थे।
पर्यावरण के लिहाज से भी फायदेमंद
रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी तकनीक से देश के नेट-जीरो लक्ष्यों को भी समर्थन मिलेगा। हालांकि, कम ऊंचाई पर उड़ान होने की वजह से सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा, जिसके लिए सख्त नियम और निगरानी जरूरी होगी।
छतें बनेंगी वर्टिपोर्ट
CII की रिपोर्ट में छतों से टेकऑफ और लैंडिंग को एक अहम समाधान बताया गया है। कमर्शियल हब, अस्पताल, टेक पार्क और रेजिडेंशियल टावर की छतों का इस्तेमाल वर्टिपोर्ट के तौर पर किया जा सकता है। इससे मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जा सकेगा।
ड्रोन लॉजिस्टिक्स पर भी जोर
रिपोर्ट में 50 से 100 किलोमीटर की रेंज में ड्रोन-आधारित लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन की भी सिफारिश की गई है। खास तौर पर जरूरी मेडिकल सप्लाई और कार्गो को तेजी से पहुंचाने पर फोकस किया गया है। इसके लिए टेकऑफ और लैंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की पहले से योजना बनाने पर जोर दिया गया है।
कहां से होगी शुरुआत?
ई-एयर टैक्सी को बड़े पैमाने पर शुरू करने से पहले पायलट जोन तय करने की सलाह दी गई है, ताकि रियल-वर्ल्ड टेस्टिंग और रेगुलेटरी प्रोटोटाइपिंग की जा सके। इससे तकनीक और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
अगर ये योजना जमीन पर उतरी, तो दिल्ली-NCR जैसे बड़े शहरों में सफर का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। ट्रैफिक जाम से राहत, समय की बचत और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक, ई-एयर टैक्सी शहरी आवागमन का अगला बड़ा कदम बन सकती है।