केरल में सबरीमाला मंदिर से जुड़े बहुचर्चित सोना चोरी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate - ED) ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। ईडी ने केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 21 जगहों पर छापेमारी की। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कोच्चि जोनल ऑफिस की टीमों द्वारा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत सुबह से ही छापे मारे जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह जांच केरल क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई कई फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) से शुरू हुई है, जिनसे "त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड के अधिकारियों, प्राइवेट लोगों, बिचौलियों और ज्वैलर्स से जुड़ी एक गहरी आपराधिक साज़िश" का खुलासा हुआ है।
अब तक 13 लोग गिरफ्तार
इस मामले में एसआईटी ने अब तक कुल मिलकर 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए सभी लोग फिलहाल ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं और उनसे पूछताछ जारी है।
पुराना मामले में नए खुलासे, क्या है सबरीमाला सोना चोरी विवाद?
केरल के विश्व-प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से जुड़ा सोना चोरी विवाद पहली बार 2019 में सामने आया, लेकिन जांच में पता चला कि इसकी जड़ें 1998–99 से शुरू होती हैं। साल 2019 में मंदिर की मरम्मत और गोल्ड प्लेटिंग के नाम पर भगवान अयप्पा मंदिर की मूर्तियों और संरचनाओं पर चढ़ा सोना बाहर भेजा गया था। कुल 42.8 किलो सोने की प्लेटेड मूर्तियां मरम्मत के लिए चेन्नई की एक निजी फर्म को दी गईं। लेकिन जब ये मूर्तियां लौटीं, तो उनका वजन केवल 38.2 किलो पाया गया, यानी करीब 4.5 किलो सोना गायब था।
घिसावट' बताकर दी गई सफाई, बोर्ड ने कागजों में खेल किया
जब वजन कम निकलने पर सवाल उठे, तो इसे सामान्य घिसावट बताकर नजरअंदाज कर मामले पर लीपापोती करने की कोशिश की गई। इससे भी गंभीर बात यह थी कि मंदिर प्रबंधन संस्था त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने कागजों में सोने की प्लेटों को तांबे की प्लेट के रूप में दर्ज कर दिया। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही और संदिग्ध कार्रवाई माना। अदालत के आदेश पर बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) ने पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना की. इससे स्पष्ट हुआ कि मंदिर की मूर्तियों, दरवाज़ों, सीढ़ियों, नक्काशीदार हिस्सों से सोने की परत जानबूझकर हटाई गई थी। हालांकि भगवान अयप्पा की मुख्य मूर्ति से सोना चोरी के सीधे सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन मंदिर की बाकी संरचनाओं से सोना गायब होने की पुष्टि हुई है।
जांच का उद्देश्य
ईडी के अधिकारियों ने बताया कि यह जांच सबरीमाला मंदिर सोना चोरी मामले से हुई कमाई का पता लगाने, लाभार्थियों की पहचान करने, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त करने और इसमें शामिल मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी सीमा का पता लगाने के लिए की जा रही है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि जांच में सबरीमाला मंदिर में अन्य वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों के संकेत भी मिले हैं, जिसमें मंदिर के चढ़ावे और अनुष्ठानों से संबंधित धन का घोटाला शामिल है। PMLA ढांचे के तहत इसकी जांच की जा रही है।