SIR: अब देश के 22 राज्यों में होगा SIR, नागरिकता साबित करने के लिए ये डॉक्यूमेंट्स रखें तैयार

SIR: चुनाव आयोग ने 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के निर्देश दिए हैँ। उम्मीद जताई जा रही है कि यह काम अप्रैल से शुरू हो जाएगा। इस पहल का मकसद पूरे देश में सही और अपडेटेड वोटर लिस्ट तैयार करना है।

Jitendra Singh
अपडेटेड19 Feb 2026, 08:12 PM IST
SIR: इलेक्शन कमीशन ने 1951 से लेकर 2004 तक करीब 8 बार SIR कराया है।
SIR: इलेक्शन कमीशन ने 1951 से लेकर 2004 तक करीब 8 बार SIR कराया है।

SIR: चुनाव आयोग ने अपने राज्य चुनाव अधिकारियों को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के लिए तैयार रहने को कहा है। बिहार-यूपी समेत देश के 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा पूरे देश में SIR की प्रक्रिया कराई जाएगी। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने बताया है कि इसी साल अप्रैल महीने से पूरे देश में SIR की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 12 राज्यों में फिलहाल यह प्रक्रिया चल रही है, लिहाजा बाकी बचे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

अब इस प्रक्रिया में बचे दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश समेत 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रैल से SIR शुरू हो सकता है। चुनाव आयोग की तरफ से इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को तैयारी करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

इन राज्यों में होगा SIR

आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड में SIR की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। चुनाव आयोग की ओर से इन राज्यों के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर्स को एक पत्र लिखा गया है। इस पत्र में कहा गया है कि वोटर्स लिस्ट के पैन-इंडिया SIR का ऑर्डर पिछले साल जून में दिया गया था।

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बता दें कि बिहार में SIR एक्सरसाइज पूरी हो गई है और नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) में SIR प्रक्रिया चल रही है। असम में, SIR की जगह 'स्पेशल रिवीजन' 10 फरवरी को पूरा किया गया।

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन क्या है?

वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन कहा जाता है। यह काम चुनाव आयोग की ओर से किया जाता है। इसे कभी छोटे तो कभी बड़े लेवल पर किया जाता रहा है। इस प्रोसेस में 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है। चुनाव आयोग ने 1951 से लेकर 2004 तक करीब 8 बार SIR करा चुका है। आखिरी बार SIR 21 साल पहले 2002 से लेकर 2004 में पूरा किया गया था।

देश में SIR से क्या फायदा होगा?

SIR का पहला मकसद विदेशी अवैध प्रवासियों के जन्म स्थान की जांच करके उन्हें बाहर निकालना है। यह कदम बांग्लादेश और म्यांमार समेत कई राज्यों में अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। बिहार के बाद बाकी राज्यों SIR कराने से फेक वोटर्स और फर्जीवाड़े के मामले सामने आएंगे। इससे सिस्टम में ट्रांसपिरेंसी आएगी। फाइनल SIR कट-ऑफ डेट के रूप में काम करेगी, ठीक उसी तरह जैसे बिहार की 2003 की वोटर लिस्ट का इस्तेमाल चुनाव आयोग ने SIR के लिए किया था। ज्यादातर राज्यों में वोटर लिस्ट का अंतिम बार SIR 2002 और 2004 के बीच हुआ था। दिल्ली में 2008 में और इससे पहले उत्तराखंड में 2006 में SIR हुआ था।

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जानिए SIR प्रक्रिया में क्या होता है

बीएलओ आपके घर आएं तो परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड, उम्र सर्टिफिकेट और निवास प्रमाण पत्र होना जरूरी है। इसके अलावा अगर आपके परिवार में किसी सदस्य की उम्र 18 साल हो गई है, तो उसका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जा सकता है। अगर परिवार का सदस्य किसी अन्य जगह शिफ्ट हो गया है, तो उसका नाम हटाकर नई जगह जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा आपके वोटर आईडी में फोटो पुरानी या धुंधली हो चुकी है, तो उसे साफ फोटो देकर हटवा सकते है।

SIR प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर मतदाता सूची में दर्ज व्यक्ति के बारे में जांच करते हैं। इसके जरिए पता लगाया जाता है कि दर्ज व्यक्ति अभी वहां रहता है या नहीं। वहीं अगर किसी मतदाता की मृत्यु हो जाती है तो उनका नाम हटाया जाता है। इसके अलावा नाम, उम्र, खराब क्वालिटी वाली फोटो और एड्रेस की गड़बड़ी को इस अभियान के साथ ठीक किया जाता है।

SIR के लिए इन डॉक्यूमेंट्स को दिखाना होगा

SIR के दौरान अपनी आइडेंटिटी और रेजिडेंशियल एड्रेस प्रूफ दिखाना होता है। इसमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बिजली-पानी या गैस का बिल, बैंक पासबुक, मनरेगा जॉब कार्ड और 2002 की वोटर लिस्ट की प्रति को मान्य दस्तावेज माना जाएगा। ये सभी कागजात व्यक्ति की पहचान और स्थायी पते की पुष्टि के लिए जरूरी होंगे।

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इन लोगों को डॉक्यूमेंट नहीं दिखाना

जिन लोगों का नाम 2002 की लिस्ट में है, उन्हें सिर्फ फॉर्म और उसके साथ 2002 की लिस्ट का प्रिंटआउट जमा करना होगा। इसके सिवाय कोई और डॉक्यूमेंट देने की जरूरत नहीं होगी। अगर किसी वोटर का नाम 2002 की वोटर लिस्ट में नहीं है, लेकिन उसके माता-पिता का नाम इस लिस्ट में है, तो उसे काउंटिंग फॉर्म के साथ आईडी प्रूफ और अपने 2002 की लिस्ट में दर्ज माता-पिता के नाम का सर्टिफिकेट पेश करना होगा।

क्या डॉक्यूमेंट नहीं दिखाने पर नाम कट जाएगा?

सिर्फ डॉक्यूमेंट्स नहीं दिखाने पर वोटर लिस्ट से नाम नहीं हटेगा। BLO वोटर से संपर्क करेगा। अगर व्यक्ति की पहचान और स्थायी निवास की पुष्टि नहीं हो पाती है, तभी नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आयोग का कहना है कि ये पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और हर वोटर को डॉक्यूमेंट दिखाने का पूरा मौका मिलेगा।

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